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शादी में आ रही परेशानी, विवाहिक जीवन में अनबन को कैसे करें ज्योतिषी से दूर, जानें विवाह ज्योतिष डॉ. विनय बजरंगी से
Mon, 26 Jul 2021 08:38 PM IST
प्रशांत कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 26 Jul 2021 08:38 PM IST
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डॉ. विनय बजरंगी
- फोटो : amar ujala
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र में विवाह को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति का विवाह नहीं होता है तो उस व्यक्ति की कुंडली के 12 भावों में से 7 भाव जागृत हुए बिना रह जाते हैं और उसका फल जातक को प्राप्त नहीं हो पाता है। विवाह ज्योतिष अनुसार माना जाता है कि विवाह सुख में कमी की ये स्थिति जातक के पूर्व जन्म से ही आरंभ होती है और इस कारण व्यक्ति का वैवाहिक सुख बाधित होता है।
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आइए जानते हैं जाने माने वैदिक ज्योतिष डॉ. विनय बजरंगी से कुछ मुख्य बातों को जो विवाह में परेशानी का कारण बनती हैं और कैसे ज्योतिष द्वारा इनका निदान किया जा सकता।
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कुंडली में प्रेम विवाह
विवाह से जुड़े मुद्दों में सबसे पहले बात करते हैं प्रेम विवाह की, प्रेम विवाह की गणना सिर्फ प्रेम के विवाह में बदलने की जानकारी तक ही सीमित नहीं होती है, गणना इस बात की भी होती है कि यदि प्रेम विवाह होगा तो उसका सुख मिलेगा या नहीं, प्रेम जीवन भर साथ देगा या नहीं देगा तथा उस प्रेम विवाह से परिवार और दंपती लाभान्वित होंगी या नहीं। इन सभी बातों का उत्तर हमें विवाह ज्योतिष से मिलता है। एक अच्छा ज्योतिषी ही आपकी कुंडली में नकारात्मक ग्रहों को जो की विवाह के अंदर बाधक हो सकते हैं या परेशानी दे सकते हैं उनको सही करने का तरीका बतला सकता है। ध्यान दें ये तरीका उपायों के माध्यम से नहीं होता है इसके लिए कर्मा करेक्शन यानी के कर्मों के संशोधन की आवश्यकता पड़ती है।
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विवाह में देरी
किसी का विवाह ही नहीं हो रहा हो या विवाह में देरी हो तो इन सभी बातों के बारे में कुंडली के माध्यम से बहुत पहले ही जान सकते हैं। बच्चे की कुंडली जब पहली बार देखी जाती है तो उस समय पर ही इन बातों का अध्ययन आसानी से किया जा सकता है। यदि माता-पिता को इसके बारे में उस समय पर ही पता चल जाए की बच्चों की कुंडली में इस प्रकार का कोई अवरोध है, तो उसको ठीक करने का तरीका उन्हें समय रहते ही मिल सकता है।
विवाह में अनबन या वाद-विवाद से कैसे बचें
विवाह तो हो गया है लेकिन विवाह के पश्चात संबंधों में कड़वाहट भर जाने से, वैचारिक मतभेदों के उत्पन्न होने या किसी भी अन्य कारण से तनाव बना हुआ है तो इस से बचने का सटीक उपाय भी विवाह ज्योतिष शास्त्र में दिया गया है। यदि आप अपनी और अपने जीवन साथी दोनों की कुंडली दिखाएंगे तो निश्चित तौर से आपको बहुत अच्छा लाभ प्राप्त हो सकता है।
विवाह में अलगाव या तलाक से कैसे बचा जाए
विवाह अगर टूट रहा है, बात अगर तलाक या अलग होने तक पहुंच गई हो। अगर बात यहां तक पहुंच गई है कि आप डिवोर्स लेना चाहते हैं या फिर ऐसा लगता है की एक लेना चाहता है और दूसरा लेना नहीं चाहता है, तो सबसे पहले इन सभी समस्याओं से बचने के लिए आपको चाहिए कि अपनी कुंडली की पड़ताल किसी योग्य ज्योतिषी से कराएं।
क्यों जरूरी है मैरिज काउंसलिंग
शादी से पहले या शादी के बाद झगड़े हो रहे हों या ऐसा लगे की बात बनेगी ही नही तो उसके लिए एक काउंसलिंग सैशन लिया जा सकता है. मैं यहां ये बताना चाहूंगा की अगर हम को ये पता चले की कौन-कौन से ग्रह नहीं मिलते हैं तो हम उन सभी ग्रहों के हिसाब से आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसकी एक लिस्ट दे सकते हैं, कर्मा करेक्शन के तरीके बता सकते हैं. यदि आप इन बातों का पालन करते हैं तो विवाह से जुड़ी सभी समस्याओं का हल पा सकते हैं.
कुंडली मिलान और गुण मिलान
विवाह के अंदर एक अन्य महत्वपूर्ण बात कुंडली मिलान की भी होती है। यहां मै बताना चाहूंगा की कुंडली का मिलान सिर्फ गुण मिलान या अष्टकूट मिलान से कहीं ज्यादा होता है। अष्टकूट मिलान पूर्ण कुंडली मिलान का सिर्फ 20 प्रतिशत ही होता है। कुण्डली मिलान का बाकी 80 प्रतिशत जो है वह अन्य मिलान कारकों से संपूर्ण होता है। इसमें सप्तम भाव, सप्तम भाव के अधिपति, नवांश, नवांश के पंचम-सप्तम भाव का मिलान, गुरु का मिलान और उसके पश्चात डी 12 चार्ट और डी 30 चार्ट को भी देखा जाता है जो अत्यंत आवश्यक होता है। तो कुंडली मिलान और गुण मिलान का अंतर जानिए और पूर्ण कुंडली मिलान में ही विश्वास करें।