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मरीजों की जान से खेल रहे निजी अस्पताल और एंबुलेंस संचालक
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कोरोना महामारी में शहर के कुछ निजी अस्पतालों और एंबुलेंस संचालकों ने इस आपदा को अवसर बना लिया है। दीनदयाल अस्पताल, जिला अस्पताल, जेएन मेडिकल कॉलेज के बाहर सक्रिय इनका रैकेट मरीजों व तीमारदारों को बेहतर इलाज का झांसा देकर फंसा रहा है। उनसे मनमाने रुपये वसूले जाते हैं, जब मरीज की हालत बिगड़ जाती है तो बहाना बनाकर इलाज करने से मना कर दिया जाता है। ऐसे में परेशान तीमारदार फिर सरकारी अस्पताल की ओर रुख करता है। इन सब के चक्कर में मरीज की जान चली जाती है। शुक्रवार को ऐसा ही एक मामला सामने आया।
वाकया शुक्रवार सुबह का है। क्वार्सी के शताब्दी नगर निवासी राजकुमार (40) पुत्र कालीचरण की हालत बिगड़ गई थी। उनका ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरता जा रहा था। परिजन मरीज को लेकर दीन दयाल अस्पताल पहुंचे। बेटी नेहा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती कराने की प्रक्रिया पूरी करा रही थी। तभी एक एंबुलेंस संचालक आया, उसने जल्दी जांच कराने व निजी अस्पताल में अच्छा उपचार दिलाने का भरोसा दिया। लगातार हालत बिगड़ती देख परिजन एंबुलेंस संचालक की बातों में आ गए। राजकुमार को क्वार्सी इलाके के निजी अस्पताल में ले गए।
आरोप है कि अस्पताल में कोरोना जांच के लिए एक हजार रुपये लिए गए। इसके बाद एंटीजन किट से जांच की गई। जांच रिपोर्ट देने के बजाय एंटीजन किट का फोटो खींचकर दे दिया और बताया गया कि मरीज कोरोना निगेटिव है। इधर, राजकुमार का ऑक्सीजन लेवल लगातार गिरता जा रहा था। हालत बिगड़ती देखकर अस्पताल प्रबंधन ने ऑक्सीजन की कमी का हवाला दिया। परिजनों ने काफी मिन्नत की तो एक दिन के इलाज के एवज में 35 हजार रुपये की मांग रखी। नेहा के मुताबिक, इलाज का खर्च सुन वह पिता को वापस वापस दीनदयाल अस्पताल लेकर पहुंची, वहां उनको भर्ती किया गया। लेकिन आधे घंटे बाद उनकी मौत हो गई।
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ढाई तीन किमी चली एंबुलेंस, किराया लिया 6500 रुपये
नेहा ने बताया कि दीनदयाल अस्पताल से एंबुलेंस संचालक उनको बमुश्किल एक किमी की दूरी पर स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां इलाज का खर्च सुनने के बाद वह उसी एंबुलेंस में पिता को दीनदयाल अस्पताल लेकर आई। यहां पिता की मौत होने के बाद फिर से उसी एंबुलेंस संचालक से संपर्क किया तो उसने दीनदयाल से घर (शताब्दी नगर) ले जाने के लिए 2500 रुपये लिए। इससे पहले दीनदयाल अस्पताल से निजी अस्पताल ले जाने और वहां से वापस लाने के 4000 रुपये लिए थे।
कैसे मिली अस्पताल को एंटीजन किट, स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा
राजकुमार का क्वार्सी इलाके के जिस निजी अस्पताल में कोरोना टेस्ट हुआ। उक्त अस्पताल को न तो कोविड अस्पताल की मान्यता है और न ही इनके यहां कोई जांच लैब संचालित है। इसके बाद भी मरीजों की एंटीजन किट से जांच की जा रही है। इस जांच के बदले एक हजार रुपये लिए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस अस्पताल को एंटीजन जांच किट कहां से और कैसे मिल गई। यह मामला प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को जांच सौंपी है। एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग जांच कर रहा है। किसी निजी अस्पताल के पास एंटीजन किट कहां से आई, इसकी रिपोर्ट ली जा रही है।
एंटीजन घोटाले की रिपोर्ट आज तक नहीं हुई उजागर
बीते साल भी कोरोना महामारी के दौरान निजी अस्पतालों के पास एंटीजन किट उपलब्ध होने की बात सामने आई थी। डीएम ने इस मामले में जांच बैठाई थी। स्वास्थ्य विभाग के ही कुछ लोगों पर एंटीजन किट चोरी करके निजी अस्पतालों को सप्लाई करने का आरोप लगा था। इन किट को कई ऐसे लोगों की जांच में इस्तेमाल दर्शाया गया, जिनकी जांच ही नहीं हुई थी। इस मामले की आज तक रिपोर्ट उजागर नहीं हुई है।
निजी एंबुलेंस और निजी अस्पतालों के इस रैकेट की स्वास्थ्य विभाग जांच करेगा। लोगों से भी अपील है कि वह सरकारी सेवाओं पर भरोसा रखें। जिन भी लोगों के साथ इस रैकेट ने इलाज के नाम पर बेईमानी की है, उनसे अनुरोध है कि वह विभाग को इस संबंध में लिखित शिकायत दें, जिससे की कार्रवाई ठोस तरीके से की जा सके।
- डा. बीपी कल्याणी, सीएमओ
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वाकया शुक्रवार सुबह का है। क्वार्सी के शताब्दी नगर निवासी राजकुमार (40) पुत्र कालीचरण की हालत बिगड़ गई थी। उनका ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरता जा रहा था। परिजन मरीज को लेकर दीन दयाल अस्पताल पहुंचे। बेटी नेहा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती कराने की प्रक्रिया पूरी करा रही थी। तभी एक एंबुलेंस संचालक आया, उसने जल्दी जांच कराने व निजी अस्पताल में अच्छा उपचार दिलाने का भरोसा दिया। लगातार हालत बिगड़ती देख परिजन एंबुलेंस संचालक की बातों में आ गए। राजकुमार को क्वार्सी इलाके के निजी अस्पताल में ले गए।
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आरोप है कि अस्पताल में कोरोना जांच के लिए एक हजार रुपये लिए गए। इसके बाद एंटीजन किट से जांच की गई। जांच रिपोर्ट देने के बजाय एंटीजन किट का फोटो खींचकर दे दिया और बताया गया कि मरीज कोरोना निगेटिव है। इधर, राजकुमार का ऑक्सीजन लेवल लगातार गिरता जा रहा था। हालत बिगड़ती देखकर अस्पताल प्रबंधन ने ऑक्सीजन की कमी का हवाला दिया। परिजनों ने काफी मिन्नत की तो एक दिन के इलाज के एवज में 35 हजार रुपये की मांग रखी। नेहा के मुताबिक, इलाज का खर्च सुन वह पिता को वापस वापस दीनदयाल अस्पताल लेकर पहुंची, वहां उनको भर्ती किया गया। लेकिन आधे घंटे बाद उनकी मौत हो गई।
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ढाई तीन किमी चली एंबुलेंस, किराया लिया 6500 रुपये
नेहा ने बताया कि दीनदयाल अस्पताल से एंबुलेंस संचालक उनको बमुश्किल एक किमी की दूरी पर स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंचा। वहां इलाज का खर्च सुनने के बाद वह उसी एंबुलेंस में पिता को दीनदयाल अस्पताल लेकर आई। यहां पिता की मौत होने के बाद फिर से उसी एंबुलेंस संचालक से संपर्क किया तो उसने दीनदयाल से घर (शताब्दी नगर) ले जाने के लिए 2500 रुपये लिए। इससे पहले दीनदयाल अस्पताल से निजी अस्पताल ले जाने और वहां से वापस लाने के 4000 रुपये लिए थे।
कैसे मिली अस्पताल को एंटीजन किट, स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा
राजकुमार का क्वार्सी इलाके के जिस निजी अस्पताल में कोरोना टेस्ट हुआ। उक्त अस्पताल को न तो कोविड अस्पताल की मान्यता है और न ही इनके यहां कोई जांच लैब संचालित है। इसके बाद भी मरीजों की एंटीजन किट से जांच की जा रही है। इस जांच के बदले एक हजार रुपये लिए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस अस्पताल को एंटीजन जांच किट कहां से और कैसे मिल गई। यह मामला प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को जांच सौंपी है। एडीएम सिटी राकेश कुमार मालपाणी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग जांच कर रहा है। किसी निजी अस्पताल के पास एंटीजन किट कहां से आई, इसकी रिपोर्ट ली जा रही है।
एंटीजन घोटाले की रिपोर्ट आज तक नहीं हुई उजागर
बीते साल भी कोरोना महामारी के दौरान निजी अस्पतालों के पास एंटीजन किट उपलब्ध होने की बात सामने आई थी। डीएम ने इस मामले में जांच बैठाई थी। स्वास्थ्य विभाग के ही कुछ लोगों पर एंटीजन किट चोरी करके निजी अस्पतालों को सप्लाई करने का आरोप लगा था। इन किट को कई ऐसे लोगों की जांच में इस्तेमाल दर्शाया गया, जिनकी जांच ही नहीं हुई थी। इस मामले की आज तक रिपोर्ट उजागर नहीं हुई है।
निजी एंबुलेंस और निजी अस्पतालों के इस रैकेट की स्वास्थ्य विभाग जांच करेगा। लोगों से भी अपील है कि वह सरकारी सेवाओं पर भरोसा रखें। जिन भी लोगों के साथ इस रैकेट ने इलाज के नाम पर बेईमानी की है, उनसे अनुरोध है कि वह विभाग को इस संबंध में लिखित शिकायत दें, जिससे की कार्रवाई ठोस तरीके से की जा सके।
- डा. बीपी कल्याणी, सीएमओ