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Vijay Diwas: 25 वर्ष से रोज मां खाना लगाती है बलिदानी बेटे प्रेमपाल सिंह का, बिस्तर बिछाती हैं, वहीं सोती है
Fri, 26 Jul 2024 02:14 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 26 Jul 2024 02:14 AM IST
सार
प्रेमपाल सिंह का जन्म 16 दिसंबर 1979 को हुआ था। 1997 में उनका चयन आर्मी में हो गया था। प्रेमपाल सिंह ने 4 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में अपना बलिदान दे दिया था।
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25 साल से बेटै का लगाती है बिस्तर, वहीं पर सोती है मां
- फोटो : वीडियो ग्रैब
विस्तार
पच्चीस साल पहले 4 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में बलिदान हुए प्रेमपाल सिंह के लिए 25 साल बाद भी उनकी मां वीरवती हर रोज खाना बनाती हैं। बिस्तर बिछाकर उन्हें सुलाती हैं। उनके घर में आज भी खाने की पहली थाली प्रेमपाल के लिए ही निकलती है। परिवार वालों का कहना है कि जब प्रेमपाल बलिदान हुए थे तब उनकी मां ने छह माह तक सही से खाना नहीं खाया था।
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प्रेमपाल इगलास तहसील क्षेत्र के गांव खेमकावास के रहने वाले थे। प्रेमपाल के पिता शिवसिंह पेशे से किसान थे। घर वाले बताते हैं कि प्रेमपाल की बचपन से ही सेना में जाने की इच्छा थी। जब वह बड़े हुए तो उन्होंने इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी थीं। 1997 में वह आर्मी में भर्ती हो गए थे। प्रेमपाल 42 वीं बटालियन 9 महार में जवान थे। वे पांच बहनों से छोटे थे, इसलिए हमेशा घर में सभी के लाडले रहे।
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प्रेमपाल के छोटे भाई महावीर बताते हैं कि कारगिल युद्ध के समय ही भैया की शादी की बात चल रही थी। यह जिक्र करते हुए महावीर की आंख भर आती है। कहते हैं...4 जुलाई (1999) का दिन था जब कारगिल युद्ध में उनके भाई बलिदान हो गए। आठ जुलाई को उनका पार्थिव शरीर गांव आया था। मां वीरवती तो उस वक्त बुरी तरह से टूट गईं थीं। महीनों तक सही से खाना भी नहीं खाया। बस प्रेमपाल को याद करके रोती रहती थीं। किसी तरह से उन्हें संभाला गया।
घर वाले बताते हैं कि वीरवती तभी से हर रोज घर में सबसे पहले प्रेमपाल के लिए खाने की थाली सजाती हैं। उनकी तस्वीर के आगे थाली रखती हैं और निवाला तोड़कर स्पर्श भी कराती हैं। उसके बाद ही खुद खाना खाती हैं। इतना ही नहीं वह पिछले पच्चीस साल से हर रोज प्रेमपाल का बिस्तर भी बिछाती हैं। उस चारपाई पर बैठकर ऐसे बातें करती हैं कि मानो उनका बेटा आज भी उनके साथ है। बेटे की चारपाई के बगल में ही अपनी भी बिस्तर लगाती हैं।