{"_id":"642b03094b6ea92ba70c2f17","slug":"premmurti-deepak-maharaj-shed-devotional-juice-in-the-story-2023-04-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: प्रेममूर्ति दीपक महाराज ने कथा में बहाई भक्ति रस धारा, कहा अनुकरणीय है प्रभु श्रीराम का आदर्श","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: प्रेममूर्ति दीपक महाराज ने कथा में बहाई भक्ति रस धारा, कहा अनुकरणीय है प्रभु श्रीराम का आदर्श
Mon, 03 Apr 2023 10:17 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Mon, 03 Apr 2023 10:17 PM IST
सार
प्रेममूर्ति पूजा दीपक महाराज ने शिवलोक सूर्य सरोवर कॉलोनी स्थित मां दुर्गा मंदिर में पूज्य दीपक महाराज ने कहा कि त्रेता युग में पूरी धरती रावण के अत्याचार से कांप उठी थी। सारी धरती त्राहि-त्राहि करने लगी। तब सभी देवता मिलकर भगवान ब्रह्मा जी के पास पहुंचे।
विज्ञापन
श्रीराम कथा में एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रेममूर्ति पूजा दीपक महाराज ने सोमवार को प्रभु राम के जन्मोत्सव की कथा सुनाई। प्रभु राम का जन्म होते ही चारों दिशाओं में खुशियां फैल गईं। देवताओं ने पुष्प बारिश करके स्वागत किया।
विज्ञापन
शिवलोक सूर्य सरोवर कॉलोनी स्थित मां दुर्गा मंदिर में पूज्य दीपक महाराज ने कहा कि त्रेता युग में पूरी धरती रावण के अत्याचार से कांप उठी थी। सारी धरती त्राहि-त्राहि करने लगी। तब सभी देवता मिलकर भगवान ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। भगवान ब्रह्मा जी से निवेदन किया कि रावण के अत्याचार से पूरी धरती भयभीत है। प्रभु इस अत्याचार से हम सबको बचाइए। भगवान ब्रह्मा जी ने कहा की इसका निवारण मेरे पास नहीं है। सभी मिलकर भगवान विष्णु के पास चलते हैं। देवतागण के अनुनय विनय करने पर भगवान विष्णु ने कहा पृथ्वी को अत्याचार से मुक्त करने के लिए नर रूप में धरती पर अवतार लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
दूसरे प्रसंग में महाराज जी ने कहा कि एक बार राजा दशरथ इंद्र के पास पहुंचे और इंद्र के सिंहासन के बगल में बैठ गए। राजा दशरथ के जाने के बाद इंद्र ने उस स्थान को धुलवा दिया। बाद में पता चला कि राजा दशरथ की कोई संतान नहीं है। इसलिए इंद्र ने यह कार्य किया। इस बात पर राजा दशरथ को बहुत ग्लानि हुई और पुत्र की प्राप्ति के लिए उन्होंने महायज्ञ कराया। पूज्य महाराज जी ने कहा की प्रभु राम का जन्म होते ही सारी अयोध्या नगरी खुशी से झूम उठी। हर तरफ आनंद ही आनंद था। देवता भी खुशी से झूम उठे। चारों तरफ बधाइयां बजने लगीं। राजा दशरथ राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को आंगन में खेलते हुई देखकर निहाल हो उठे।
उनकी आंखें खुशी से छलक गई। तीनों माताएं अपने लाल को खिला कर आनंदित होने लगी। दीपक महाराज ने कहा कि भगवान के जन्म से तीनो लोक आनंदित हो गया। इसलिए हमें प्रभु राम के आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए। अपने बच्चों के अंदर राम के गुणों को समाहित करना चाहिए। आज हम सब अपने बच्चों को कथा नहीं सुनाते उन्हें जिससे उनके अंदर संस्कार का बीजारोपण नहीं हो रहा है। प्रभु राम के आदर्श के बारे में बताते नहीं हैं। आज गांव गांव शहर शहर कथाएं होनी चाहिए जिससे जीवन में संस्कार आ सके।
प्रभु श्रीराम जीवन के आधार हैं
कथा में एमएलसी डॉ मानवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रभु राम हम सबके जीवन के आधार हैं। उनके बिना तो जीवन की कल्पना ही करना मुश्किल है। केंद्र में पीएम मोदी और प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ जी का आशीर्वाद है कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बन रहा है। हम सब का सपना साकार हो रहा है। हम सब ने बहुत संघर्ष झेला है। इसलिए सुखद पल को देखकर आज आनंद से मन गदगद हो जाता है। डॉ मानवेंद्र ने कहा कि प्रभु राम का जीवनी स्मरणीय, वंदनीय, पूजनीय है। अयोध्या में बन रहे भव्य मंदिर में हर एक व्यक्ति ने कुछ ना कुछ अपना सहयोग किया। भव्य मंदिर निर्माण के लिए बहुत सारे देश के धनवान अकेले सहयोग कर सकते थे। लेकिन पूर्व के मंदिर में कुछ ना कुछ सभी का सहयोग हो इसलिए सभी के अंशदान के माध्यम से मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। 1 जनवरी 2024 को प्रभु राम के मंदिर के दर्शन का अवसर मिलेगा।
भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष गोपाल सिंह ने कथा में 11000 रुपए का सहयोग किया। उन्होंने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि प्रभु की कथा में हमें सहयोग करने का अवसर मिल रहा है। इससे बड़ा सौभाग्य और कुछ नहीं हो सकता है। साध्वी पुनीता चेतन ने कहा कि प्रभु राम के जन्मोत्सव का आनंद ही कुछ और है, हमें प्रभु की कृपा के लिए इस तरह के आयोजन करते रहने चाहिए। कथा में यजमान रमेश चंद्र सिंह पत्नी सुशीला सिंह, वीरेंद्र सिंह पत्नी ने कथा व्यास का पूजन किया। कथा में बंटी जादौन, भगवान स्वरूप, धर्मेंद्र राजपूत, बंटी यादव, पप्पू सिंह आदि मौजूद थे।