दीनदयाल अस्पताल: बिना अलर्ट पहले से दवा भरकर रख लीं सिरिंज, मामले की होगी जांच
सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष या वार्ड को किसी भी दुर्घटना होने पर प्रशासनिक अलर्ट दिया जाता है। स्टाफ को तैयार रहने के लिए कहा जाता है। तब स्टाफ दर्द निवारक, हृदयाघात या गंभीर चोट से संबंधित इंजेक्शन सहित अन्य संसाधन तैयार करके रखता है। उसमें सिरिंज पर चिट लगाई जाती है कि सिरिंज में कौन सी दवा भरी है।
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कहने को प्रदेश स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते हैं, मगर यहां जिला स्तर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय (डीडीयू) में लापरवाही की इंतिहा है। 15 जुलाई को इमरजेंसी वार्ड का स्टाफ करीब सौ सिरिंज पहले से ही भरकर बैठा था, जबकि किसी तरह का कोई अलर्ट जारी नहीं हुआ था। अब ये कब से भरके रखी गई थीं? और इनके किसी मरीज के लगने पर क्या रिएक्शन हो सकता है? इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है। खुद सीएमएस भी इसे लेकर चिंतित हैं।
वाकया दोपहर करीब एक बजे का है। इमरजेंसी कक्ष में स्टाफ तैनात था। कक्ष के ठीक सामने इमरजेंसी वार्ड में दवाओं व स्टाफ वाले कमरे में सभी लोग बैठे थे। उस कमरे में एक कार्टन व इंजेक्शन वाली ट्रे में करीब सौ सिरिंज भरी हुई रखी थीं। जब वहां मौजूद महिला स्टाफ से पूछा गया कि ये इतनी सिरिंज क्यों भरी रखी हैं तो जवाब मिला कि हम लोग किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहते हैं। हमेशा ऐसे ही भरकर तैयार रखते हैं। मगर किसी भी सिरिंज पर ये चिट नहीं लगी थी कि इसमें से कौन सी सिरिंज किस दवा या उपचार से संबंधित है। जब इसे लेकर सवाल जवाब किए तो स्टाफ इधर-उधर देखने लगा।
ये है नियम
सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष या वार्ड को किसी भी दुर्घटना होने पर प्रशासनिक अलर्ट दिया जाता है। स्टाफ को तैयार रहने के लिए कहा जाता है। तब स्टाफ दर्द निवारक, हृदयाघात या गंभीर चोट से संबंधित इंजेक्शन सहित अन्य संसाधन तैयार करके रखता है। उसमें सिरिंज पर चिट लगाई जाती है कि सिरिंज में कौन सी दवा भरी है। उसकी भी एक दो घंटे की समयावधि होती है। मगर आज इस तरह का कोई अलर्ट किसी स्तर से जारी नहीं हुआ था।
अंदेशा इस बात का भी
इस विषय में जानकार लोग बताते हैं कि अमूमन सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में गंभीर बीमारी वाले मरीजों को डिस्टिल वाटर के इंजेक्शन इसी तरह से लगा दिए जाते हैं। उसे मरीज से संबंधित बीमारी का इंजेक्शन करार दे दिया जाता है और उसे अपनी बला टालने के लिए रेफर कर दिया जाता है। मरीज भी इंजेक्शन के नाम पर संतुष्ट होकर चला जाता है। कुल मिलाकर यहां भी कुछ इसी तरह का अंदेशा समझ में आ रहा है।
यह विषय बेहद गंभीर है। बिना किसी अलर्ट के इस तरह से सिरिंज भरकर रखना गलत है। हालांकि विषय संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कराकर दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की तैयारी सिर्फ किसी आपात सूचना या अलर्ट पर की जानी चाहिए।- डा.एमके माथुर, सीएमएस दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय।