तीन दिन से नहीं बुझी आग: मिर्च-मसाले जलने से बनी तीखी गंध से लोग परेशान, 13 गांव प्रभावित, आई इंश्योरेंस टीम
हाथरस के कोल्ड स्टोर में आग लगने से उसमें रखे मिर्च मसाले जल गए। जिनकी तीखी गंध से आसपास के गांव वाले परेशान हैं। गांव बरसै, महमूदपुर, शाहपुर, कोरना, जगीपुर, रुहेरी,नगला गलिया, दरकौली, जगीपुर, सठिया, रघनियां, श्रीनगर, नगला सुखा आदि गांवों के लोग प्रभावित हैं।
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पिछले तीन दिन से शीतगृह में लगी आग नहीं बुझ पाई है। इसमें मिर्च मसालों के जलने से उठ रही तीखी गंध हवा और धुएं के साथ आसपास के करीब दस किलोमीटर दायरे में स्थित 13 गांवों तक पहुंच रही है और लोग परेशान है।
सांस लेना मुश्किल हो रहा है। हालात यह है कि आंखों में जलन और धसक के चलते लोग खांसते-खांसते परेशान है। लोग मुंह पर कपड़ा बांधकर काम कर रहे हैं। शीतगृह के आसपास तो और भी बुरा हाल है। हवा का रुख जिधर हो जाता है, उधर ही समस्या बढ़ जाती है। गांव बरसै, महमूदपुर, शाहपुर, कोरना, जगीपुर, रुहेरी,नगला गलिया, दरकौली, जगीपुर, सठिया, रघनियां, श्रीनगर, नगला सुखा आदि गांवों के लोग प्रभावित है।
आग का धुआं फैलने से लोगों को दिक्कत हो रही है। अजीब सी जलन एवं गंध आ रही है। जिससे सांस लेने में परेशानी हो रही है।-राहुल, रघनियां।
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आग लगने से जो धुआं फैला है, उससे आंखों में जलन हो रही है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है।-अशोक कुमार, रघनियां।
आग पर तीन दिन बाद भी काबू न पाना चिंता जनक है। व्यापारियों एवं किसानों को नुकसान की चिंता में रात में नींद भी नहीं आ रही है।-अनिल, जगीपुर, किसान।
यह बड़ी विडंबना है कि एक अप्रैल को लगी आग अभी तक आग बेकाबू है। जिन किसानों का माल शीत गृह में रखा हुआ है, वह परेशान है।-आसू सिंह, किसान, जगीपुर।
दूसरे चैंबर में आग लगने की सूचना चिंता बढ़ा रही है। शीघ्र इस पर नियंत्रण कर आग को दूसरे चैंबरों में फैलने से रोका जाए।-केके सिंह , किसान , जगीपुर।
शीतगृह के चैंबर में भर गया पांच-पांच फुट पानी
शीतगृह परिसर में लगी आग पर काबू पाने के लिए एक अप्रैल की सुबह से लगातार पानी की बौछार की जा रही है। चैंबर संख्या पांच में पांच-पांच फुट पानी भरा हुआ है, अब इसके चलते दमकल कर्मियों को अंदर घुसने में परेशानी आ रही है।
आसपास के खेतों और शीतगृह परिसर में दलदल की स्थिति बन गई है। अब तक करीब दो लाख लीटर पानी की बौछार यहां की जा चुकी है। चैंबर संख्या पांच में ही सबसे पहले आग लगी थी। इसमें पानी भर जाने के कारण दमकलकर्मी अंदर नहीं घुस पा रहे हैं। जेसीबी घुसाने की कोशिश की गई तो पिलर बाधा बन रहे थे। लिंटर और पिलरों को काटकर जेसीबी की मदद से माल को बाहर निकाला जा रहा है, जिससे माल में लगी आग को खुले में लाकर बुझाया जा सके। अब तक शीतगृह की दो तरफ की दीवारों में 10 छेद किए जा चुके हैं, जिनसे सामान निकालकर बाहर खेतों में रखा जा रहा है।
व्यापारी, किसान और अफसर डाले हुए हैं डेरा
शीतगृह पर तीन दिन से व्यापारी, किसान और अफसर डेरा डाले हुए हैं। व्यापारियों को अपने किराने के सामान और किसानों को आलू के नुकसान की चिंता है। अधिकारी भी आग बुझाने की स्थिति की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे रहे हैं।
व्यापारी भीगकर खराब हुए अपने सामान को कोल्ड से बाहर निकलते ही धूप में सुखाने के लिए खेतों में फैला रहे है, जिससे उसे नष्ट होने से बचाया जा सके। आग आलू के चैंबरों तक न पहुंच जाए, इससे किसान चिंतित है। चैंबर संख्या चार में आग लगने की आशंका जताई जा रही है। उसमें भी धुआं ही धुआं फैला हुआ है। इसमें आलू रखा हुआ है।
इन गांवों के लोग हैं प्रभावित
गांव बरसै, महमूदपुर, शाहपुर, कोरना, जगीपुर, रुहेरी, नगला गलिया, दरकौली, जगीपुर, सठिया, रघनियां, श्रीनगर, नगला सुखा आदि गांव इस आग की वजह से प्रभावित हैं।
नुकसान का आकलन करने पहुंची बीमा कंपनी की टीम
शीतगृह में आग की सूचना पर आगरा से इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी की टीम पहुंच गई है। आगरा से आई टीम के सदस्यों ने 3 अप्रैल को शीतगृह में हुए संभावित नुकसान की जानकारी ली। हालांकि अभी नुकसान का सही आकलन नहीं हो सका है। स्टॉक रजिस्टर से मिलान किया जाएगा। इसके बाद बीमित धनराशि मिल जाएगी।