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बढ़ रही धुंध से लोगों का फूल रहा दम
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दोपहर 2 बजे रेलवे ट्रेक पर छाई धुंध।
- फोटो : CITY OFFICE
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धुंध की वजह से प्रदूषण लगातार बिगड़ रहा है। नोएडा में तो स्कूल बंदी तक का आदेश हो गया। मगर अपने यहां अभी यह धुंध इस स्तर पर नहीं। मगर इसके बढ़ने के संकेत लगातार परेशान कर रहे हैं। पिछले दो दिन में इसके स्तर में 14 माइक्रो ग्राम की बढ़ोत्तरी हुई है। इधर, अस्पताल में भी लगातार सांस व अस्थमा रोगियों की संख्या बढ़ रही है। लोगों की सांस फूल रही है। बुखार, वायरल व डेंगू के बीच 20 फीसदी इस समस्या से ग्रसित मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। आने वाले दिनों में हवा की रफ्तार घटते ही एक्यूआई का स्तर आगामी एक सप्ताह के अंदर बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
आलम यह है कि पिछले कई दिन से शहर और आसपास के इलाकों में आसमान में धुंध छाने लगी है। इससे आंखों में जलन के साथ ही गले में खराश होने की शिकायत हो रही है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में मरीज जिला मलखान सिंह अस्पताल एवं पंडित दीनदयाल चिकित्सालय में पहुंचे। चिकित्सकों के अनुसार इनमें से 20 फीसदी से अधिक लोग आंखों में जलन, सांस और हृदय रोग की समस्या से पीड़ित थे। आंखों में जलन को लेकर नेत्र चिकित्सकों के पास भी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला मलखान सिंह अस्पताल की ओपीडी में 1299 मरीज पहुंचे तो दीनदयाल चिकित्सालय में 1600 मरीज पहुंचे थे। डॉ. संजय सिंघल के अनुसार 20 फीसदी से अधिक मरीज अस्थमा, सांस लेने में दिक्कत को लेकर पहुंचे थे। प्रदूषण विशेषज्ञों की मानें तो हवा का प्रवाह थमते ही वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। इससे आंखों में जलन और गले में खराश की समस्या बन गई है। हालांकि अपने यहां पंजाब हरियाणा की पराली जलाने वाली समस्या का असर कम है। फिर भी नोएडा की ओर से आने वाली हवाएं जहरीली धुंध का अपने जिले में असर दिखा रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि हवा का प्रवाह कम रहा तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाएगा। उन्होंने बताया कि लगातार इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। दो दिन में प्रदूषण स्तर बढ़ा है। हालांकि दिवाली के बाद बढ़े स्तर में गिरावट हुई है।
- लगभग चार सालों से सांस की बीमारी से परेशान हूं, जब तक दवा खाती हूं सांस नहीं उखड़ती है जैसे ही दवा बंद होती है सांस फूलने लगती है धुआं से सांस उखड़ती है खांसी आती है।
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- सरिता देवी मरीज
- लगभग 15 20 सालों से सांस की बीमारी से परेशान हूं धुएं से बहुत परेशानी होती है। सांस फूलने लगती है सहन नहीं कर पाता हूं।
- कल्याण सिंह मरीज
- जवां सिकंदरपुर से दवा लेने आया हूं। सांस का मरीज हूं, कई सालों से बीमारी है। डेढ़ दो घंटे में ही धुआं से सांस उखड़ती है, खांसी उठती है। सहने की शक्ति नहीं होती बहुत परेशान हूं।
-राकेश मरीज
मरीजों को करना पड़ रहा इंतजार, नहीं हो पा रहे भरती
इधर, दीनदयाल अस्पताल में शुक्रवार को सर्वाधिक भीड़ दिखाई दी। इस दौरान मरीजों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। दूसरा वे आसानी से भरती नहीं हो पा रहे। वायरल का अपना असर है। लोग परेशान हैं।
खास बातें
प्रदूषण का मानक
- 0-60- उत्तम हवा, सुरक्षित
- 69-99 - सामान्य
-100-149- हल्का प्रदूषण, सांस के मरीजों के लिए सतर्कता जरूरी
- 150- 200- बेहद प्रदूषित हवा, सभी के लिए नुकसानदायक
- 201- 299 -हर किसी के स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर
- 300 से ज्यादा- अधिक हानिकारक, हृदय, लंग्स और ब्रेन के लिए खतरनाक ,सांस और ह्दय रोगियों के लिए बेहद खतरा
प्रदूषण = अलीगढ़ महानगर
तारीख, प्रदूषण (माइक्रो ग्राम पर मीटर क्यू में)
तीन दिन पहले 235
03 नवंबर को 249
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आलम यह है कि पिछले कई दिन से शहर और आसपास के इलाकों में आसमान में धुंध छाने लगी है। इससे आंखों में जलन के साथ ही गले में खराश होने की शिकायत हो रही है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में मरीज जिला मलखान सिंह अस्पताल एवं पंडित दीनदयाल चिकित्सालय में पहुंचे। चिकित्सकों के अनुसार इनमें से 20 फीसदी से अधिक लोग आंखों में जलन, सांस और हृदय रोग की समस्या से पीड़ित थे। आंखों में जलन को लेकर नेत्र चिकित्सकों के पास भी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला मलखान सिंह अस्पताल की ओपीडी में 1299 मरीज पहुंचे तो दीनदयाल चिकित्सालय में 1600 मरीज पहुंचे थे। डॉ. संजय सिंघल के अनुसार 20 फीसदी से अधिक मरीज अस्थमा, सांस लेने में दिक्कत को लेकर पहुंचे थे। प्रदूषण विशेषज्ञों की मानें तो हवा का प्रवाह थमते ही वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। इससे आंखों में जलन और गले में खराश की समस्या बन गई है। हालांकि अपने यहां पंजाब हरियाणा की पराली जलाने वाली समस्या का असर कम है। फिर भी नोएडा की ओर से आने वाली हवाएं जहरीली धुंध का अपने जिले में असर दिखा रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि हवा का प्रवाह कम रहा तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाएगा। उन्होंने बताया कि लगातार इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। दो दिन में प्रदूषण स्तर बढ़ा है। हालांकि दिवाली के बाद बढ़े स्तर में गिरावट हुई है।
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- लगभग चार सालों से सांस की बीमारी से परेशान हूं, जब तक दवा खाती हूं सांस नहीं उखड़ती है जैसे ही दवा बंद होती है सांस फूलने लगती है धुआं से सांस उखड़ती है खांसी आती है।
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- सरिता देवी मरीज
- लगभग 15 20 सालों से सांस की बीमारी से परेशान हूं धुएं से बहुत परेशानी होती है। सांस फूलने लगती है सहन नहीं कर पाता हूं।
- कल्याण सिंह मरीज
- जवां सिकंदरपुर से दवा लेने आया हूं। सांस का मरीज हूं, कई सालों से बीमारी है। डेढ़ दो घंटे में ही धुआं से सांस उखड़ती है, खांसी उठती है। सहने की शक्ति नहीं होती बहुत परेशान हूं।
-राकेश मरीज
मरीजों को करना पड़ रहा इंतजार, नहीं हो पा रहे भरती
इधर, दीनदयाल अस्पताल में शुक्रवार को सर्वाधिक भीड़ दिखाई दी। इस दौरान मरीजों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। दूसरा वे आसानी से भरती नहीं हो पा रहे। वायरल का अपना असर है। लोग परेशान हैं।
खास बातें
प्रदूषण का मानक
- 0-60- उत्तम हवा, सुरक्षित
- 69-99 - सामान्य
-100-149- हल्का प्रदूषण, सांस के मरीजों के लिए सतर्कता जरूरी
- 150- 200- बेहद प्रदूषित हवा, सभी के लिए नुकसानदायक
- 201- 299 -हर किसी के स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर
- 300 से ज्यादा- अधिक हानिकारक, हृदय, लंग्स और ब्रेन के लिए खतरनाक ,सांस और ह्दय रोगियों के लिए बेहद खतरा
प्रदूषण = अलीगढ़ महानगर
तारीख, प्रदूषण (माइक्रो ग्राम पर मीटर क्यू में)
तीन दिन पहले 235
03 नवंबर को 249