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अलीगढ़ः धान की खेती की लागत 35 से 40 फीसदी बढ़ी
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आशीष श्रीवास्तव
डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने धान उत्पादक किसानों की हालत पतली कर दी है। धान की खेती की लागत में करीब 35 से 40 फीसदी तक इजाफा हुआ है। मजदूरी महंगी हो गई है तो ट्रैक्टर से जुताई भी एक से डेढ़ गुना वृद्धि हो गई है। ऊपर से कम वर्षा ने किसानों के हलक सुखा दिए हैं। किसान इंद्रदेव की ओर टकटकी लगाने पर मजबूर हैं हैं, क्योंकि जुलाई महीने मेें अब तक मात्र तीन एमएम बारिश हुई है। ऐसे में खेतों में लगी धान की पौध सूखने लगी है। छोटे किसान ज्यादा परेशान हैं। सिंचाई के लिए उनको ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है, जो उनकी जेब ढीली कर रहा है। गौरतलब हो कि अब तक करीब 70 फीसदी धान की पौध लग चुकी है। हालांकि, शनिवार को हुई बारिश से किसान राहत महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि कम से कम एक दिन तो खेत गीला करने के लिए प्रयास नहीं करने होंगे। किसानों का कहना है कि यदि फसल कम पैदा हुई और दाम अच्छे नहीं मिले तो लागत भी नहीं निकल पाएगी।
पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल दाम
- डीजल - पिछले साल जुलाई में करीब 60 रुपये प्रति लीटर, इस साल 90.33 रुपये प्रति लीटर है।
- पेस्टीसाइड और हर्बीसाइड - पिछले साल की तुलना में दस से पंद्रह फीसदी की बढ़ोत्तरी।
- बिजली - पिछले साल 140 रुपये प्रति हार्स पावर, इस साल 170 रुपये प्रति हार्सपावर।
- मजदूरी - पिछले साल बुवाई 500 रुपये प्रति बीघा, इस साल 650 रुपये प्रति बीघा है। पिछले साल कटाई 600 से 800 रुपये थी। इस बार 150 से 200 रुपये की वृद्धि अनुमानित।
- ट्रैक्टर से जुताई - पिछले साल 140 रुपये प्रति बीघा, इस साल 200 रुपये प्रति बीघा है।
- कीटनाशक दवाओं के स्प्रे की मजदूरी - पिछले साल 60 रुपये थी, इस साल 80 रुपये है।
चार से पांच हजार रुपये है एक बीघा की लागत
किसानों के मुताबिक विभिन्न मदों में बढ़े दामों के चलते वर्तमान में एक बीघा में धान की फसल की लागत औसतन चार से पांच हजार रुपये आ रही है। जबकि पिछले साल ढाई से तीन हजार रुपये औसत लागत थी। किसान को सबसे ज्यादा खर्च सिंचाई में करना पड़ रहा है। बताते चलें कि एक बीघा खेत की सिंचाई में कम से कम दो घंटे इंजन (पंपसेट) चलाना होता है, वह भी रोज। डीजल के 90 रुपये लीटर के हिसाब से देखें तो किसान को प्रतिदिन 180 रुपये से ज्यादा डीजल के रूप में खर्च करने पड़ रहे हैं।
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धान की किस्म के हिसाब से एक बीघा खेत में उत्पादन
- सुगंधा-एक बीघा में अनुमानित- 5 क्विंटल
- 1509-एक बीघा में अनुमानित-3 क्विंटल
- पी-10-एक बीघा में अनुमानित-4 क्विंटल
पिछले साल मिले विभिन्न फसलों के रेट
-सुगंधा-2200 रुपये क्विंटल
-1509-2600 रुपये क्विंटल
-पी-10-3000 रुपये क्विंटल
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क्या कहते हैं किसान
- बिजली एवं डीजल की दरों में बेतहाशा वृद्धि से धान की खेती की लागत में 35 से 40 फीसदी इजाफा हुआ है। खाद, बीज एवं पेस्टीसाइड के दामों में भी पिछले साल की तुलना में वृद्धि हुई है। बारिश भी इस माह कम होने से जलस्तर नीचे पहुंच गया है। इससे किसान को सिंचाई के लिये ज्यादा देर तक पंपसेट चलाना पड़ रहा है।
-डा. शैलेंद्र पाल सिंह, प्रांतीय महासचिव भाकियू भानु
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- किसानों की हितैषी बनने वाली योगी सरकार के राज में डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में बेतहाशा वृद्धि के चलते धान उत्पादक किसानों की लागत डेढ़ से दो गुनी हो गई है। ऊपर से कम वर्षा ने लागत में और भी इजाफा किया है। इससे किसान परेशानियों में उलझ कर रह गया है।
विमल तोमर, जिलाध्यक्ष भाकियू टिकैत गुट
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डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने धान उत्पादक किसानों की हालत पतली कर दी है। धान की खेती की लागत में करीब 35 से 40 फीसदी तक इजाफा हुआ है। मजदूरी महंगी हो गई है तो ट्रैक्टर से जुताई भी एक से डेढ़ गुना वृद्धि हो गई है। ऊपर से कम वर्षा ने किसानों के हलक सुखा दिए हैं। किसान इंद्रदेव की ओर टकटकी लगाने पर मजबूर हैं हैं, क्योंकि जुलाई महीने मेें अब तक मात्र तीन एमएम बारिश हुई है। ऐसे में खेतों में लगी धान की पौध सूखने लगी है। छोटे किसान ज्यादा परेशान हैं। सिंचाई के लिए उनको ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है, जो उनकी जेब ढीली कर रहा है। गौरतलब हो कि अब तक करीब 70 फीसदी धान की पौध लग चुकी है। हालांकि, शनिवार को हुई बारिश से किसान राहत महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि कम से कम एक दिन तो खेत गीला करने के लिए प्रयास नहीं करने होंगे। किसानों का कहना है कि यदि फसल कम पैदा हुई और दाम अच्छे नहीं मिले तो लागत भी नहीं निकल पाएगी।
पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल दाम
- डीजल - पिछले साल जुलाई में करीब 60 रुपये प्रति लीटर, इस साल 90.33 रुपये प्रति लीटर है।
- पेस्टीसाइड और हर्बीसाइड - पिछले साल की तुलना में दस से पंद्रह फीसदी की बढ़ोत्तरी।
- बिजली - पिछले साल 140 रुपये प्रति हार्स पावर, इस साल 170 रुपये प्रति हार्सपावर।
- मजदूरी - पिछले साल बुवाई 500 रुपये प्रति बीघा, इस साल 650 रुपये प्रति बीघा है। पिछले साल कटाई 600 से 800 रुपये थी। इस बार 150 से 200 रुपये की वृद्धि अनुमानित।
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- ट्रैक्टर से जुताई - पिछले साल 140 रुपये प्रति बीघा, इस साल 200 रुपये प्रति बीघा है।
- कीटनाशक दवाओं के स्प्रे की मजदूरी - पिछले साल 60 रुपये थी, इस साल 80 रुपये है।
चार से पांच हजार रुपये है एक बीघा की लागत
किसानों के मुताबिक विभिन्न मदों में बढ़े दामों के चलते वर्तमान में एक बीघा में धान की फसल की लागत औसतन चार से पांच हजार रुपये आ रही है। जबकि पिछले साल ढाई से तीन हजार रुपये औसत लागत थी। किसान को सबसे ज्यादा खर्च सिंचाई में करना पड़ रहा है। बताते चलें कि एक बीघा खेत की सिंचाई में कम से कम दो घंटे इंजन (पंपसेट) चलाना होता है, वह भी रोज। डीजल के 90 रुपये लीटर के हिसाब से देखें तो किसान को प्रतिदिन 180 रुपये से ज्यादा डीजल के रूप में खर्च करने पड़ रहे हैं।
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धान की किस्म के हिसाब से एक बीघा खेत में उत्पादन
- सुगंधा-एक बीघा में अनुमानित- 5 क्विंटल
- 1509-एक बीघा में अनुमानित-3 क्विंटल
- पी-10-एक बीघा में अनुमानित-4 क्विंटल
पिछले साल मिले विभिन्न फसलों के रेट
-सुगंधा-2200 रुपये क्विंटल
-1509-2600 रुपये क्विंटल
-पी-10-3000 रुपये क्विंटल
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क्या कहते हैं किसान
- बिजली एवं डीजल की दरों में बेतहाशा वृद्धि से धान की खेती की लागत में 35 से 40 फीसदी इजाफा हुआ है। खाद, बीज एवं पेस्टीसाइड के दामों में भी पिछले साल की तुलना में वृद्धि हुई है। बारिश भी इस माह कम होने से जलस्तर नीचे पहुंच गया है। इससे किसान को सिंचाई के लिये ज्यादा देर तक पंपसेट चलाना पड़ रहा है।
-डा. शैलेंद्र पाल सिंह, प्रांतीय महासचिव भाकियू भानु
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- किसानों की हितैषी बनने वाली योगी सरकार के राज में डीजल, बिजली, खाद, बीज एवं कीटनाशकों के दामों में बेतहाशा वृद्धि के चलते धान उत्पादक किसानों की लागत डेढ़ से दो गुनी हो गई है। ऊपर से कम वर्षा ने लागत में और भी इजाफा किया है। इससे किसान परेशानियों में उलझ कर रह गया है।
विमल तोमर, जिलाध्यक्ष भाकियू टिकैत गुट