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अलीगढ़ः चेहरे पुराने, नए समीकरण, भाजपा को घेरने में जुटा विपक्ष

Fri, 04 Feb 2022 01:27 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Feb 2022 01:27 AM IST
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Opposition gathered to surround BJP
विवेक बंसल । कोल कांग्रेस प्रत्याशी - फोटो : CITY OFFICE
अभिषेक शर्मा
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सियासी समर में सूरमाओं की जोर-आजमाइश जारी है। इसी जोर आजमाइश के बीच अगर हम बात करें जिले की कोल विधानसभा सीट की तो सियासी मायनों में यह सीट भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आजादी के बाद से लेकर अब तक इस सीट पर सर्वाधिक बार भाजपा का कब्जा रहा है। इस बार भी भाजपा ने पुराने चेहरे को चुनाव मैदान में उतारा है। अन्य दलों की बात करें तो अधिकांश पुराने चेहरे भाजपा को टक्कर दे रहे हैं। बस समीकरण नए बन रहे हैं। कहीं विरोधी लहर का जोर है तो कहीं चेहरों का विरोध है। इन्हीं सब के सहारे विपक्ष इस बार भाजपा को घेरने में जुटा हुआ है। सभी की निगाह मुस्लिम वोटों पर टिकी है। यह वोट किस तरफ जाएगा? विभाजित होगा? या ऐन वक्त पर ध्रुवीकरण होगा? यही इस सीट का परिणाम तय करेगा?
ये है सियासी दलों की अपनी रणनीती
इस सीट पर वापसी भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। यही वजह है कि भाजपा इस सीट पर एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। एक तरफ जहां विरोधी लहर के कारण वैश्य वोटों पर पकड़ बनाए रखने के लिए पीयूष गोयल को बुलाया जा रहा है। ठाकुर वोटों को साधने के लिए जिले के भाजपा के सभी ठाकुर नेता इस सीट पर प्रचार में जुटे हैं। खुद मुख्यमंत्री को ठाकुर बहुल मडराक क्षेत्र में सभा के लिए बुलाया जा रहा है। खुद प्रत्याशी ब्राह्मण होने के नाते ब्राह्मण वोटों पर जोर लगाए हुए हैं, जबकि मैथिल ब्राह्मण वोटों के लिए पार्टी के मैथिल नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह अन्य जातियों में लगातार विकास योजनाओं व सरकारी सहयोगों के सहारे प्रयास बरकरार हैं। इधर, कांग्रेस के दिग्गज लगातार तीसरी बार सीट पर मैदान में हैं तो खुद प्रत्याशी के साथ-साथ पार्टी की भी प्रतिष्ठा दांव पर है। पार्टी की एक बड़ी टीम यहां डेरा डाले है। विरोध करने वाले वर्ग में लगातार वोटरों को साधने का प्रयास हो रहा है। पिछली बार इसी सीट पर बसपा से चुनाव लड़े मैथिल समाज के नेता को कांग्रेस में शामिल कराकर उनकी मदद ली जा रही है। मुस्लिमों में खुद प्रत्याशी अपनी पकड़ के दम पर मेहनत कर रहे हैं। कमोबेश यही हालात सपा के पुराने चेहरे के साथ है। चूंकि, पार्टी ने पुराने चेहरे के लिए नए चेहरे का टिकट काटकर उनको ही मौका दिया है। इसलिए मुस्लिमों के साथ-साथ भाजपा के एंटी इन्कंबेंसी वाले इलाकों में पूरा प्रयास है और पिछड़े वर्ग में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बसपा भी अनुसूचित व मुस्लिम वोटों के सहारे प्रयास कर रही है।
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मतदाता कहीं खुल्लम-खुल्ला तो कहीं साधे है चुप्पी
कोल सीट पर मतदाता कहीं खुल्लम-खुल्ला बात कर रहा है तो कहीं चुप्पी साधे हुए है। हालांकि, मुद्दों की बात करें तो शहरी क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं व ग्रामीण क्षेत्र में विकास योजनाएं बड़े मुद्दे हैं। पर सरकार की योजनाओं को लोग नकार नहीं पा रहे हैं। कमजोर तबके में सर्वाधिक राशन वितरण को लेकर चर्चा है। स्वर्ण जयंती नगर में इलेक्ट्रॉनिक की दुकान करने वाले मदनलाल लोधी कहते हैं कि मौजूदा प्रत्याशी और सरकार ने जो काम किए हैं। ऐसा कभी देखने को नहीं मिला। इसी तरह अतरौली अड्डे के चाय विक्रेता भोला कश्यप का कहना है कि सरकार की योजनाओं से वह बेहद संतुष्ट हैं। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। जीवनगढ़ के मुनव्वर कहते हैं कि अभी हर प्रत्याशी के अपने दावे और प्रयास हैं। मत कहां जाना है ये ऐन वक्त पर तय होगा। कुल मिलाकर मतदाता अभी सभी का वजन तौल रहा है।
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2022 के रण में ये प्रत्याशी
- अनिल पाराशर-भाजपा, विवेक बंसल-कांग्रेस, शाज उर्फ अज्जू इशहाक-सपा, मो.बिलाल-बसपा।
-2022 के चुनाव में मतदाता-
- कुल मतदाता - 404737
- पुरुष मतदाता - 214345
- महिला मतदाता - 190365
- 2017 का चुनाव परिणाम
- कुल मतदाता : 363057
- कुल मतदान : 228587
- 14 प्रत्याशी मैदान में थे
प्रमुख प्रत्याशियों को मिले मत--
- अनिल पाराशर (भाजपा) को मिले मत - 93814
- शाज उर्फ अज्जू इशहाक (सपा) को मिले मत -42851
- विवेक बंसल (कांग्रेस) को मिले मत - 38623
- रामकुमार शर्मा (बसपा) को मिले मत -37909
- जमीर उल्लाह खां (निर्दलीय) को मिले मत -10912
- क्षेत्र के बड़े मुद्दे -
- नए शहर में विकास, शहर के बढ़ते क्षेत्र में बुनियादी जरूरतों की पूर्ति, शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्र में विकास, पुराने बाईपास के चौड़ीकरण/सौंदर्यीकरण, नगर निगम के कामकाज से लोग असंतुष्ट है। मगर मतदान के समय इस सीट पर ध्रुवीकरण बड़ा मुद्दा बनता रहा है।

- अनुमानित जातीय मतदाता -
- 1.25 लाख मुस्लिम
- 50 हजार ब्राह्मण
- 45 हजार ठाकुर
- 30 हजार जाटव
- 30 हजार वैश्य
- 30 हजार बघेल
- 15 हजार लोधी
- 10 हजार सिख
- बाकी अन्य
- अब तक निर्वाचित विधायक--
-1952 व 1957 में रामप्रसाद देशमुख- कांग्रेस
-1962 में भूप सिंह- आरपीआई
-1967 में किशनलाल दिलेर- जनसंघ
-1969 में पूरनचंद्र- बीकेडी
-1974 में पूनचंद्र - कांग्रेस
-1977 किशनलाल दिलेर - जनता पार्टी
-1980 व 1985 में किशनलाल दिलेर - भाजपा
-1989 में रामप्रसाद देशमुख - कांग्रेस
-1991 व 1993 में किशनलाल दिलेर - भाजपा
-1996 में रामसखी कठेरिया - भाजपा
-2002 व 2007 में महेंद्र सिंह - बसपा
-2012 में जमीरउल्लाह - सपा
-2017 में अनिल पाराशर - भाजपा

मोहम्मद बिलाल ।  कोल बसपा प्रत्याशी

मोहम्मद बिलाल । कोल बसपा प्रत्याशी- फोटो : CITY OFFICE

अनिल पाराशर। कोल भाजपा प्रत्याशी

अनिल पाराशर। कोल भाजपा प्रत्याशी- फोटो : CITY OFFICE

अज्जू इश्हाक । कोल सपा प्रत्याशी

अज्जू इश्हाक । कोल सपा प्रत्याशी- फोटो : CITY OFFICE

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