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सवा साल में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सिर्फ नौ नमूने भेजे गए
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पिछले सवा साल में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सिर्फ नौ सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। उसमें से पांच की रिपोर्ट आ गई जबकि चार की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुनिया में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस स्ट्रेन का पता कैसे चल पाएगा।
देश में डेल्टा प्लस के कई केस सामने आने के बाद खतरा बढ़ गया है। शासन ने आरटीपीसीआर जांच के नमूने की जीनोम सीक्वेंसिंग के निर्देश दिए हैं। पहले भी स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए थे कि पांच से दस प्रतिशत संक्रमितों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे जाएं। यह बात कोरोना काल की शुरूआत के समय की है। उसके बाद पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय स्थित लैब से 5 लोगों के नमूने दिल्ली एवं 4 लोगों के नमूने लखनऊ भेजे गए थे। दिल्ली से पांच लोगों की तो रिपोर्ट आ गई, लेकिन लखनऊ भेजे गए नमूने की रिपोर्ट आज तक नहीं मिली है। उस समय स्वास्थ्य विभाग द्वारा यही बताया गया था कि विदेश से आए शाहजमाल के युवक में यूके स्ट्रेन (अल्फा वैरिएंट) पाया गया है। उस युवक का यात्रा विवरण निकालकर करीब एक हजार लोगों का नमूना जांच के लिए लिया गया था।
संक्रमित लोगों में से पांच से दस प्रतिशत लोगों का नमूना जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने का निर्देश आया था। शुरू में कुछ नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। उसमें से कुछ की रिपोर्ट आई थी। जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे जाने वाले नमूनों में 10 से 15 प्रतिशत बच्चों के होने चाहिए। अब नमूने भिजवाए जाएंगे। नमूने भेजने की जिम्मेदारी लैब की है।
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- डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ
माइनस 80 डिग्री के तापमान में रखे गए हैं नमूने
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के वायरोलॉजिस्ट डॉ. सुमित वार्ष्णेय ने बताया कि आरटीपीसीआर जांच में संक्रमित मरीजों के नमूने सुरक्षित रखे जाते हैं। नमूनों को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है, जो एक साल तक सुरक्षित रहते हैं। दूसरी लहर के दौरान संक्रमित मरीजों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए जा रहे हैं। अभी बड़ी लैब के नमूने जा रहे हैं। अभी यहां की लैब का नंबर नहीं आया है।
जेएनएमसी से जांच के लिए गए थे 20 नमूने
दूसरी लहर में एएमयू के कई शिक्षाविदें की मौत के बाद सीएसआईआर के इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी, नई दिल्ली में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए 20 नमूने भेजे गए थे, उसमें 90 प्रतिशत में बी.1.617.2 वैरिएंट था, जिसे डबल म्यूटेशन वैरिएंट कहा जाता है।
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देश में डेल्टा प्लस के कई केस सामने आने के बाद खतरा बढ़ गया है। शासन ने आरटीपीसीआर जांच के नमूने की जीनोम सीक्वेंसिंग के निर्देश दिए हैं। पहले भी स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए थे कि पांच से दस प्रतिशत संक्रमितों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे जाएं। यह बात कोरोना काल की शुरूआत के समय की है। उसके बाद पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय स्थित लैब से 5 लोगों के नमूने दिल्ली एवं 4 लोगों के नमूने लखनऊ भेजे गए थे। दिल्ली से पांच लोगों की तो रिपोर्ट आ गई, लेकिन लखनऊ भेजे गए नमूने की रिपोर्ट आज तक नहीं मिली है। उस समय स्वास्थ्य विभाग द्वारा यही बताया गया था कि विदेश से आए शाहजमाल के युवक में यूके स्ट्रेन (अल्फा वैरिएंट) पाया गया है। उस युवक का यात्रा विवरण निकालकर करीब एक हजार लोगों का नमूना जांच के लिए लिया गया था।
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संक्रमित लोगों में से पांच से दस प्रतिशत लोगों का नमूना जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने का निर्देश आया था। शुरू में कुछ नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। उसमें से कुछ की रिपोर्ट आई थी। जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे जाने वाले नमूनों में 10 से 15 प्रतिशत बच्चों के होने चाहिए। अब नमूने भिजवाए जाएंगे। नमूने भेजने की जिम्मेदारी लैब की है।
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- डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ
माइनस 80 डिग्री के तापमान में रखे गए हैं नमूने
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के वायरोलॉजिस्ट डॉ. सुमित वार्ष्णेय ने बताया कि आरटीपीसीआर जांच में संक्रमित मरीजों के नमूने सुरक्षित रखे जाते हैं। नमूनों को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है, जो एक साल तक सुरक्षित रहते हैं। दूसरी लहर के दौरान संक्रमित मरीजों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए जा रहे हैं। अभी बड़ी लैब के नमूने जा रहे हैं। अभी यहां की लैब का नंबर नहीं आया है।
जेएनएमसी से जांच के लिए गए थे 20 नमूने
दूसरी लहर में एएमयू के कई शिक्षाविदें की मौत के बाद सीएसआईआर के इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी, नई दिल्ली में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए 20 नमूने भेजे गए थे, उसमें 90 प्रतिशत में बी.1.617.2 वैरिएंट था, जिसे डबल म्यूटेशन वैरिएंट कहा जाता है।