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अलीगढ़ : सिर्फ पांच ई बसें चल रहीं, दस खा रहीं हैं धूल
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मुख्यमंत्री ने चार जनवरी को अलीगढ़ महानगर में जनता को सुगम और बेहतर सफर कराने के लिए इलेक्ट्रिक बस की सौगात दी थी। डेढ़ महीने में 15 में से अभी तक सिर्फ पांच ई-बस चल पाई हैं। वह भी धीमी गति से, जबकि बाकी 10 ई-बसें रोडवेज वर्कशॉप के अंदर खड़ी धूल खा रही हैं। प्रभारी नगर आयुक्त ने बृहस्पतिवार को अपने औचक निरीक्षण में नाराजगी जताते हुए सभी इलेक्ट्रिक बस चलाने और सोमवार तक हर हाल में छह चार्जिंग प्वाइंट चालू कराने की चेतावनी दी थी। जबकि बस के खड़े रहने से तकरीबन 15 ड्राइवरों की तनख्वाह नहीं बन पाती है।
बता दें कि दो रूटों (बौनेर से खेरेश्वर व महरावल से हरदुआगंज) पर पांच इलेक्ट्रिक बस दौड़ रही हैं। जिनको दस ड्राइवर चलाते हैं। यह पांच बसें अभी तक सिर्फ एक अस्थायी चार्जिंग प्वाइंट से चार्ज होती हैं। स्थायी चार्जिंग प्वाइंट छह नहीं, बल्कि पांच लगने हैं। इससे पहले बस स्टेशन का फर्श तैयार होगा। दीवारों के ऊपर टीनशेड लगना बाकी है। तभी चार्जिंग प्वाइंट स्थापित हो सकेंगे। कुल मिलाकर सभी बसों के आवागमन के लिए बस स्टेशन परिसर का फर्श समतल और मजबूत होना चाहिए। साथ ही धूल, गंदगी और बारिश से बचने के लिए टीन शेड भी जरूरी है। यह काम हो, तभी जाकर चार्जिंग प्वाइंट लग सकेंगे। ऐेसे में धरातल पर उतरी ई-बस सेवा अभी धीमी चाल से ही चलती रहेगी।
शहर के स्टॉपेज पर होनी चाहिए टाइमिंग की व्यवस्था
- शहरवासी पूर्ण तरीके से ई-बस सेवा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। क्योंकि दो रूटों पर कुल पांच ई बस चलती हैं। महरावल से हरदुआगंज रूट पर दो और खेरेश्वर से बौनेर रूट पर तीन ई बस चलती हैं। इन बसों को इस प्रकार चलाया जाता है कि बसों की बैटरी खत्म न हो और बस सवारियों को सफर कराती रहें। ऐसे में सुबह निकलने का समय तो फिक्स है, लेकिन कोई व्यक्ति बस को पकड़ना चाहता है तो शहर के स्टॉपेज पर कोई स्टैंडर्ड टाइमिंग व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि इनकी समयसारिणी अगर सार्वजनिक हो जाए तो निश्चित ही ई-बस में अधिक से अधिक लोग चलेंगे।
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ई-बस संचालन से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि सोमवार तक सभी चार्जिंग प्वाइंट चालू करा दिए जाएंगे। जब सभी चार्जिंग प्वाइंट चालू होंगे। तभी सभी बस सड़कों पर दौड़ पाएंगी। चार्जिंग प्वाइंट बन पाएंगे या नहीं। यह तो सोमवार को ही पता चलेगा।
- मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम
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बता दें कि दो रूटों (बौनेर से खेरेश्वर व महरावल से हरदुआगंज) पर पांच इलेक्ट्रिक बस दौड़ रही हैं। जिनको दस ड्राइवर चलाते हैं। यह पांच बसें अभी तक सिर्फ एक अस्थायी चार्जिंग प्वाइंट से चार्ज होती हैं। स्थायी चार्जिंग प्वाइंट छह नहीं, बल्कि पांच लगने हैं। इससे पहले बस स्टेशन का फर्श तैयार होगा। दीवारों के ऊपर टीनशेड लगना बाकी है। तभी चार्जिंग प्वाइंट स्थापित हो सकेंगे। कुल मिलाकर सभी बसों के आवागमन के लिए बस स्टेशन परिसर का फर्श समतल और मजबूत होना चाहिए। साथ ही धूल, गंदगी और बारिश से बचने के लिए टीन शेड भी जरूरी है। यह काम हो, तभी जाकर चार्जिंग प्वाइंट लग सकेंगे। ऐेसे में धरातल पर उतरी ई-बस सेवा अभी धीमी चाल से ही चलती रहेगी।
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शहर के स्टॉपेज पर होनी चाहिए टाइमिंग की व्यवस्था
- शहरवासी पूर्ण तरीके से ई-बस सेवा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। क्योंकि दो रूटों पर कुल पांच ई बस चलती हैं। महरावल से हरदुआगंज रूट पर दो और खेरेश्वर से बौनेर रूट पर तीन ई बस चलती हैं। इन बसों को इस प्रकार चलाया जाता है कि बसों की बैटरी खत्म न हो और बस सवारियों को सफर कराती रहें। ऐसे में सुबह निकलने का समय तो फिक्स है, लेकिन कोई व्यक्ति बस को पकड़ना चाहता है तो शहर के स्टॉपेज पर कोई स्टैंडर्ड टाइमिंग व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि इनकी समयसारिणी अगर सार्वजनिक हो जाए तो निश्चित ही ई-बस में अधिक से अधिक लोग चलेंगे।
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ई-बस संचालन से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि सोमवार तक सभी चार्जिंग प्वाइंट चालू करा दिए जाएंगे। जब सभी चार्जिंग प्वाइंट चालू होंगे। तभी सभी बस सड़कों पर दौड़ पाएंगी। चार्जिंग प्वाइंट बन पाएंगे या नहीं। यह तो सोमवार को ही पता चलेगा।
- मो. परवेज खान, क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम