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39 ट्रैक्टर और दो ट्रॉलियों के ही व्यावसायिक परमिट, सड़कों पर दौड़ रहे अनगिनत
सार
परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार कृषि कार्यों के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को व्यावसायिक उपयोग में नहीं लाया जा सकता है। परिवहन कार्यालय के कुछ कर्मचारी ओवरलोड ट्रैक्टर - ट्रॉलियों के चालकों को रोककर उनके लाइसेंस चेक करें तो ज्यादातर के पास ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं निकलेगा। -केस- दो 10 जुलाई को गांधीपार्क क्षेत्र में अलीनगर के पास सीमेंट लेकर जा रहे ट्रोला ट्रैक्टर की चपेट में आकर स्कूटी सवार की मौत हो गई।
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फरीदउद्दीन ।
- फोटो : CITY OFFICE
विस्तार
ट्रैक्टर - ट्रॉली को किसानों का साथी माना जाता है, लेकिन इन दिनों इनका उपयोग कृषि कार्यों में कम और माल वाहक में ज्यादा किया जा रहा है। भले ही संभागीय परिवहन कार्यालय से जिले में केवल 39 ट्रैक्टर और दो ट्रॉलियों को ही व्यावसायिक परमिट जारी है। सड़कों पर रोज दौड़ते सैकड़ों ट्रैक्टर - ट्रॉलियों ने पुलिस और परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को कठघरे में ला दिया है। एक ओर जहां शासन को इनसे राजस्व की हानि हो रही है, वहीं दूसरी तरफ दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। बावजूद इसके परिवहन विभाग स्तर से ऐसे वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार कृषि कार्यों के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को व्यावसायिक उपयोग में नहीं लाया जा सकता है। अवैध रूप से संचालित हो रहीं यह ट्रैक्टर - ट्रॉलियां हादसों का सबब बनी हुई हैं। इन वाहनों की फिटनेस तक नहीं होती है।
कृषि कार्य में पंजीकृत ट्रैक्टर - ट्रॉली होते हैं टैक्स फ्री
व्यावसायिक प्रयोग के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर से भार क्षमता के अनुरूप करीब 10 प्रतिशत टैक्स वसूला जाता है। इसके विपरीत कृषि कार्य में पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियां टैक्स फ्री होते हैं। टोल प्लाजा पर भी इनसे टैक्स नहीं लिया जाता है। जिले में 12 हजार से अधिक ट्रैक्टर - ट्रॉली कृषि कार्य के नाम पर पंजीकृत हैं। वहीं व्यावसायिक पंजीकृत ट्रैक्टर - ट्रालियों की संख्या 41 है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का अधिकांश उपयोग नदी से बालू, रेत, सीमेंट, खाद, खल, खाद्यान्न आदि को इधर से उधर लाने ले जाने में अनाधिकृत रूप से उपयोग हो रहा है। परिवहन कार्यालय के कुछ कर्मचारी ओवरलोड ट्रैक्टर - ट्रॉलियों के चालकों को रोककर उनके लाइसेंस चेक करें तो ज्यादातर के पास ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं निकलेगा। उन्हें ट्रैफिक नियमों का भी ज्ञान नहीं होता है। ऐसे में हादसे न हों कैसे संभव है ?
केस - एक
21 अगस्त को क्वार्सी क्षेत्र के एटा चुंगी रोड पर तेज रफ्तार ईंटों से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली ने बाइक सवार को टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार युवक की मौत हो गई। चालक ट्रैक्टर को छोड़कर फरार हो गया। पुलिस जांच में पता चला कि ट्रैक्टर को बिना व्यावसायिक परमिट एवं बिना बीमा के ही संचालित किया जा रहा था।
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केस- दो
10 जुलाई को गांधीपार्क क्षेत्र में अलीनगर के पास सीमेंट लेकर जा रहे ट्रोला ट्रैक्टर की चपेट में आकर स्कूटी सवार की मौत हो गई। ट्रोला का उपयोग व्यावसायिक किया जा रहा था, जबकि उसका कोई परमिट ही नहीं था। ऐसे में पीड़ित परिवार को कोर्ट में क्लेम लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
जिले में अनाधिकृत रूप से संचालित हो रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया जाता है। जिनसे जुर्माना वसूलने के साथ ही उन्हें सीज करने तक की कार्रवाई की जाती है।
- फरीदउ्दीन, आरटीओ प्रवर्तन
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कृषि कार्य में पंजीकृत ट्रैक्टर - ट्रॉली होते हैं टैक्स फ्री
व्यावसायिक प्रयोग के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर से भार क्षमता के अनुरूप करीब 10 प्रतिशत टैक्स वसूला जाता है। इसके विपरीत कृषि कार्य में पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियां टैक्स फ्री होते हैं। टोल प्लाजा पर भी इनसे टैक्स नहीं लिया जाता है। जिले में 12 हजार से अधिक ट्रैक्टर - ट्रॉली कृषि कार्य के नाम पर पंजीकृत हैं। वहीं व्यावसायिक पंजीकृत ट्रैक्टर - ट्रालियों की संख्या 41 है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का अधिकांश उपयोग नदी से बालू, रेत, सीमेंट, खाद, खल, खाद्यान्न आदि को इधर से उधर लाने ले जाने में अनाधिकृत रूप से उपयोग हो रहा है। परिवहन कार्यालय के कुछ कर्मचारी ओवरलोड ट्रैक्टर - ट्रॉलियों के चालकों को रोककर उनके लाइसेंस चेक करें तो ज्यादातर के पास ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं निकलेगा। उन्हें ट्रैफिक नियमों का भी ज्ञान नहीं होता है। ऐसे में हादसे न हों कैसे संभव है ?
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केस - एक
21 अगस्त को क्वार्सी क्षेत्र के एटा चुंगी रोड पर तेज रफ्तार ईंटों से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली ने बाइक सवार को टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार युवक की मौत हो गई। चालक ट्रैक्टर को छोड़कर फरार हो गया। पुलिस जांच में पता चला कि ट्रैक्टर को बिना व्यावसायिक परमिट एवं बिना बीमा के ही संचालित किया जा रहा था।
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केस- दो
10 जुलाई को गांधीपार्क क्षेत्र में अलीनगर के पास सीमेंट लेकर जा रहे ट्रोला ट्रैक्टर की चपेट में आकर स्कूटी सवार की मौत हो गई। ट्रोला का उपयोग व्यावसायिक किया जा रहा था, जबकि उसका कोई परमिट ही नहीं था। ऐसे में पीड़ित परिवार को कोर्ट में क्लेम लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
जिले में अनाधिकृत रूप से संचालित हो रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया जाता है। जिनसे जुर्माना वसूलने के साथ ही उन्हें सीज करने तक की कार्रवाई की जाती है।
- फरीदउ्दीन, आरटीओ प्रवर्तन