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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   One rank-one pension has become a headache

वन रैंक-वन पेंशन बन गई है सिरदर्द

Thu, 03 Nov 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला,अलीगढ़
अमर उजाला,अलीगढ़ Updated Thu, 03 Nov 2016 01:48 AM IST
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वन रैंक वन पेंशन पर घिरी मोदी सरकार के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भी गुस्सा है। अलीगढ़ के तकरीबन 11 हजार सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को नई संशोधित पेंशन का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। ये पेंशन भुगतान बहुत बड़ा सिरदर्द बन गया है।
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कुछ को पेंशन कम मिल रही है तो किसी एक को ज्यादा भी मिल गई है। वन रैंक वन पेंशन का पूरा पारदर्शी फंडा भी सैन्य कर्मियों को नहीं समझ आ रहा है, क्योंकि इसका सरल और हिंदी प्रारूप उपलब्ध नहीं है। बैंकों से भी इन कर्मियों को पूरी जानकारी नहीं मिल रही है।
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जिला सैनिक कल्याण बोर्ड में तैनात वरिष्ठ पेंशन बाबू शहाबुद्दीन ने बताया कि हकीकत में वन रैंक-वन पेंशन को लेकर हुई कार्यवाही बहुत उलझ गई है। तीनों सेनाओं में अलग-अलग तैनात रहे एक सामान पोस्ट वाले सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को एक सामान पेंशन देने की मांग हो रही है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने जो पेंशन आर्डर टेबिल बैंकों को दी है, उससे सही भुगतान नहीं हो पा रहे हैं। क्योंकि बैंक हरेक सेवानिवृत्त सैन्य कर्मी का पेंशन पेमेंट आर्डर पीपीओ मिलने पर ही भुगतान करता है।
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इसलिए लाखों सैन्य कर्मियों के सामने ये बहुत बड़ी समस्या है कि उन्हें उनके हक का पूरा पैसा नहीं मिल रहा है। कुछ को पेंशन कम तो कुछेक को ज्यादा मिल रही है। खुद मुझे कुछ पेंशन ज्यादा मिली तो मैंने इसकी शिकायत की जिसके बाद से पेंशन बंद हो गई है।

जिले में तकरीबन 11 हजार पेंशनर्स हैं जिसमें सैनिक कल्याण बोर्ड में नौ हजार की जानकारी है। इसमें तकरीबन 900 सैन्य कर्मियोें की विधवाएं भी शामिल हैं। जिनमें से 80 फीसदी को कई महीने की पेंशन नहीं मिली है। इसके साथ ही दो हजार ऐसे हैं, जिनकी आधिकारिक तौर पर जानकारी नहीं है।


सैनिक कल्याण श्रम सहकारी समिति के सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि वन रैंक वन पेंशन के नाम पर सैन्य कर्मियों के साथ मजाक हो रहा है। दिल्ली में हुआ धरना प्रदर्शन अब पूरे देश में होंगे। इसके बाद ही केंद्र सरकार इस पर सही फैसला कर पाएगी। ये सैन्य कर्मियों के साथ बहुत बड़ा धोखा है।
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