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11 घंटे तनाव के साये में रहा पुराना शहर

Tue, 08 Aug 2017 01:58 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Tue, 08 Aug 2017 01:58 AM IST
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Old town in the shade of tension for 11 hours
शवों को ले जाते समय शमशाद मार्केट पर एंबुलेंस के आगे विरोध-प्रदर्शन करते लोग। फोटोः मनोज अलीगढ़ी। - फोटो : अमर उजाला
रेलवे रोड पर सोमवार सुबह हुए दोहरे हत्याकांड के बाद एक तरफ जहां शहर में सांप्रदायिक तनाव सरीखा माहौल बन गया। वहीं रेलवे रोड से लेकर मालगोदाम, शमशाद मार्केट चौराहा और नुमाइश मैदान स्थित कब्रिस्तान पर जमकर हंगामे हुए। यहां पीएम मोदी और सीएम योगी विरोधी नारेबाजी हुई। 
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इसे लेकर पुलिस प्रशासनिक अमले के भी हाथ पांव फूले रहे। कई बार पुलिस को सख्ती, तो कभी मनाने-समझाने की मुद्रा अपनानी पड़ी। जैसे-जैसे 11 घंटे तक चले इस एपीसोड को मैनेज कर नमाज-ए-जनाजा के बाद शवों को दफनाया गया। इसके बाद पुलिस ने रात करीब 9 बजे राहत की सांस ली। वहीं इस बीच सोशल मीडिया पर भी इस हत्याकांड को लेकर तरह-तरह की बातें प्रचारित होती रहीं। जिसके बाद शाम को एएमयू छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष अपनी टीम के साथ मृतक परिवार के समर्थन में आ गए। काफी देकर तक नुमाइश मैदान पर हंगामा हुआ। 
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गिरफ्तारी के लिए पथराव
जिला अस्पताल से जैसे ही शवों को मोर्चरी ले जाया जा रहा था। तभी परिवार की महिलाओं व कुछ युवकों ने मांग उठा दी कि जाम लगाओ। अगर शव चले गए तो गिरफ्तारी नहीं होगी। इस पर 60-70 लोगों की भीड़ एकत्रित होकर मालगोदाम पर आ गई, जहां दिल्ली से आ रही कासगंज डिपो की बस पर पथराव कर दिया और उसमें आग लगाने की कोशिश करते हुए जाम लगा दिया। पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया और शवों को मोर्चरी भिजवाया। मालगोदाम पर दुकानें बंद हो गईं। यहां ऐलान किया गया कि जब तक गिरफ्तारी नहीं होगी, मिट्टी नहीं ले जाने देंगे।
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मौत की खबर पर मची भगदड़
सुबह रेलवे रोड पर गोलीकांड के बाद जब दोनों को जिला अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया तो रेलवे रोड पर एकाएक भगदड़ जैसे हालात बन गए। पुलिस अफसरों ने दुकानदारों से बाजार बंद न करने का अनुरोध किया। मगर माहौल इतना तनावपूर्ण था कि इक्का-दुक्का दुकानें ही खुलीं। इसी बीच मौके पर पहले मेयर शकुंतला भारती पहुंचीं। फिर पूर्व विधायक जमीरउल्लाह आ गए। उनके जाते ही शहर विधायक संजीव राजा आए। बाद में सपा नेता जिला अस्पताल पहुंचे। यहां परिवार की महिलाओं ने आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर सामने लाने की मांग रखी और कहा कि खून का बदला खून से लेंगे। 


शाहजमाल जाने की जिद पर शाम को हंगामा
शाम करीब 6 बजे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने से पहले वहां पूर्व विधायक जफर आलम, एसपी सिटी, एडीएम सिटी आदि अधिकारी व तमाम भीड़ मौजूद थी। प्रशासन की मंशा थी कि अगर शवों को शाहजमाल कब्रिस्तान ले जाया गया तो वहां मृतक परिवार के समर्थन में अच्छी खासी भीड़ एकत्रित हो जाएगी। रास्ते में घर भी पड़ता है। हो सकता है कि कानून व्यवस्था बिगड़ जाए। इस पर प्रशासन ने शवों को नुमाइश मैदान ले जाने की बात रखी। इस पर मोर्चरी पर हंगामा शुरू हुआ। मगर जैसे ही एंबुलेंस में शव रखे, तो किसी ने खबर दे दी कि रसलगंज चौराहे पर एंबुलेंस रोकी जा सकती है। वहां भीड़ मौजूद है। इस पर पुलिस ने एंबुलेंस को शमशाद मार्केट से बरौला की ओर मोड़ने का इशारा चालक को दिया। इस पर भीड़ व एएमयू छात्रों ने एंबुलेंस को शमशाद मार्केट पर रोककर जाम लगा दिया और शव खींचने की कोशिश करते हुए हंगामा किया। परिजन एंबुलेंस के आगे लेट गए। करीब एक घंटे हंगामे के बाद पुलिस ने लाठियां फटकाकर एंबुलेंस को निकाला और कहा कि नुमाइश मैदान ही जाएंगे। तब शव नुमाइश पहुंचे। अब वहां 50-50 लाख मुआवजे की मांग उठ गई। वहां कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौ. बिजेंद्र सिंह, एसएम कयाम, सलीम मुख्तार, एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन पहुंच गए और मुआवजा व शवों को शाहजमाल ले जाने की मांग रख दी। यहां भी जमकर हंगामा और पीएम व सीएम विरोधी नारेबाजी हुई। बाद में एडीएम सिटी व एसपी सिटी द्वारा मुआवजा व नौकरी के आश्वासन पर हंगामा शांत हुआ। रात 9 बजे शव दफनाए गए।
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