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अलीगढ़ जेल को राहत: 1202 क्षमता वाली में थे 4200 बंदी, साल भर में ही आगरा-इटावा शिफ्ट कर दिए 650
Mon, 01 Jul 2024 05:05 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Mon, 01 Jul 2024 05:05 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बंदियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। पिछले एक वर्ष में बड़ी संख्या में कैदियों को आगरा व इटावा केंद्रीय कारागार शिफ्ट किया गया है। हाथरस जेल बनने के बाद भी यहां और राहत मिलेगी।
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अलीगढ़ जेल
- फोटो : स्वयं
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विस्तार
क्षमता से तीन गुना अधिक बंदियों का बोझ झेल रहे अलीगढ़ जिला कारागार को अब कुछ राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला कारागार से पिछले एक वर्ष में 650 कैदियों को आगरा-इटावा के केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित किया गया है। सात वर्ष से कम सजा वाले लगभग 250 बंदियों को इस दौरान जमानत-मुचलकों पर रिहा किया गया है। इसलिए एक वर्ष पहले जो बंदी संख्या 4200 थी, वह बीती 26 जून को 2630 पर पहुंच गई। इसमें 1570 की कमी हुई है।
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अंग्रेजों के समय में बने जिला कारागार की क्षमता 1202 बंदियों की है। अपराध बढ़ने के साथ यहां बंदियों की संख्या बढ़ने लगी। एक दशक पहले तक केंद्रीय कारागार के ओवरलोड होने के कारण वहां सजायाफ्ता को लेना बंद कर दिया गया था। इसके चलते इस कारागार का बोझ बढ़ता गया। दो हजार से बढ़ते बढ़ते बंदियों की संख्या 4200 तक पहुंच गई। कोरोना काल में ही सुप्रीम कोर्ट से आदेश जारी हुआ कि सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में बंदियों को जेल न भेजा जाए। कम सजा के मुकदमों में बंदियों को जमानतों, मुचलकों या जुर्माने पर रिहा करने के निर्देश दिए। इस आदेश के बाद जेल में अचानक से रिहाई शुरू हुई।
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एक वर्ष में 650 सजायाफ्ता कैदी आगरा व इटावा केंद्रीय कारागार शिफ्ट किए गए। इसके बावजूद जेल में क्षमता से दो गुना से ज्यादा बंदी मौजूद हैं। कारागार प्रशासन का मानना है कि आने वाले वर्षों में हाथरस कारागार का निर्माण होने के बाद इसमें और राहत मिलेगी। यहां से हाथरस के बंदी वहां शिफ्ट कर दिए जाएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बंदियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। पिछले एक वर्ष में बड़ी संख्या में कैदियों को आगरा व इटावा केंद्रीय कारागार शिफ्ट किया गया है। हाथरस जेल बनने के बाद भी यहां और राहत मिलेगी। -बृजेंद्र यादव, वरिष्ठ अधीक्षक कारागार