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महंगाई की दौड़ में अब भूसे ने पकड़ी रफ्तार
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महंगाई की मार जहां आम नागरिक पर पड़ी है, वहीं मवेशी भी नहीं बच पाए। मवेशियों का पेट भरने वाले भूसे का दाम 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक जा पहुंचा है। इससे पशुपालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी गोशालाओं में भी गोवंश को पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है। बीते साल यही भूसा 600 रुपये प्रति क्विंटल था। अब इसके दाम दोगुने हो चुके हैं। सर्दियों तक भूसे के दाम 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकते हैं।
सरकारी गोशालाओं के संचालकों के लिए महंगा भूसा खरीदना कठिन हो रहा है, क्योंकि एक गोवंश के लिए केवल 30 रुपये मिलते हैं और एक पशु कम से कम आठ किलो भूसा खाता है। ऐसी दशा में उन्हें भरपेट चारा उपलब्ध कराना कठिन हो रहा है। ओगर नगला राजू के कुलदीप कुमार का कहना है कि भूसा महंगा होने से दूसरे चारे पर निर्भर होना पड़ रहा है।
आठ से दस किलो तक भूसा जरुरी
एक स्वस्थ पशु को एक दिन में आठ से 10 किलो भूसा चाहिए। गभाना के गांव कन्होई निवासी किसान राजेंद्र सिंह बताते हैं कि भूसे पर महंगाई इस वर्ष काफी अधिक है। क्षेत्र में गेहूं का भूसा नहीं मिल रहा है। भूसे पर बढ़ी महंगाई का कारण इस बार गेहूं की कम उपज होना भी है।
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सरकारी गोशालाओं में चारे के लिए पर्याप्त भूसा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बदले हरे चारे की व्यवस्था कराई जा रही है। किसी गोवंश को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा । जिले से दूसरे स्थानों पर भूसा ले जाने पर रोक है। ग्राम पंचायतों के अलावा ग्रामीणों से भी सहयोग लिया जा रहा है। शासन को प्रति गोवंश चारे के लिए धनराशि बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
- डॉ. बीपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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सरकारी गोशालाओं के संचालकों के लिए महंगा भूसा खरीदना कठिन हो रहा है, क्योंकि एक गोवंश के लिए केवल 30 रुपये मिलते हैं और एक पशु कम से कम आठ किलो भूसा खाता है। ऐसी दशा में उन्हें भरपेट चारा उपलब्ध कराना कठिन हो रहा है। ओगर नगला राजू के कुलदीप कुमार का कहना है कि भूसा महंगा होने से दूसरे चारे पर निर्भर होना पड़ रहा है।
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आठ से दस किलो तक भूसा जरुरी
एक स्वस्थ पशु को एक दिन में आठ से 10 किलो भूसा चाहिए। गभाना के गांव कन्होई निवासी किसान राजेंद्र सिंह बताते हैं कि भूसे पर महंगाई इस वर्ष काफी अधिक है। क्षेत्र में गेहूं का भूसा नहीं मिल रहा है। भूसे पर बढ़ी महंगाई का कारण इस बार गेहूं की कम उपज होना भी है।
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सरकारी गोशालाओं में चारे के लिए पर्याप्त भूसा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बदले हरे चारे की व्यवस्था कराई जा रही है। किसी गोवंश को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा । जिले से दूसरे स्थानों पर भूसा ले जाने पर रोक है। ग्राम पंचायतों के अलावा ग्रामीणों से भी सहयोग लिया जा रहा है। शासन को प्रति गोवंश चारे के लिए धनराशि बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
- डॉ. बीपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी