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Aligarh News: इलाज नहीं, घायलों को मिल रहा रेफरल लेटर
Thu, 15 Oct 2026 03:06 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Thu, 15 Oct 2026 03:06 AM IST
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सड़क किनारे लगा ट्रामा सेंटर का बोर्ड
- फोटो : samvad
दिल्ली-कानपुर हाईवे पर जसरथपुर गांव स्थित ट्रामा सेंटर रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। पं. दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय अलीगढ़ से संबद्ध ट्रामा सेंटर में चिकित्सकों के साथ ही मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यही वजह है कि हादसे के बाद यहां लाए जा रहे मरीजों को प्राथमिक उपचार ही मिल पा रहा है।
अलीगढ़, सिकंदराराऊ, एटा, कासगंज, छर्रा, गंगीरी, विजयगढ़ रोड पर होने वाले हादसों के घायलों को जसरथपुर ट्रामा सेंटर ही लाया जाता है। यहां पर समुचित इलाज का इंतजाम न होने के कारण जिला अस्पताल अथवा जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं। अकराबाद थाना पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल सड़क हादसों में 100 से अधिक लोगों की मौतें हुई हैं। 175 लोग घायल भी हुए हैं।
जसरथपुर ट्रामा सेंटर का शिलान्यास 15 दिसंबर 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। पांच जून 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन किया। जीटी रोड पर हादसों में घायलों को तत्काल समुचित इलाज के लिए इसकी स्थापना हुई। प्रतिदिन 50-60 मरीजों की ओपीडी होती है।
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ट्रामा सेंटर में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और सर्जिकल गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) का सेटअप है, लेकिन इसके संचालन के लिए स्टाफ नहीं है। एक्सरे मशीन भी नहीं है। जनरेटर, इन्वर्टर और सौर ऊर्जा की व्यवस्था नहीं है। बिजली गुल होते ही ट्रामा सेंटर अंधेरे में डूब जाता है। पेयजल की भी सुविधा नहीं है।
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चिकित्सकों सहित 47 की तैनाती, मौके पर पांच कर्मी
ग्रामीणों का कहना है कि ट्रामा सेंटर में चिकित्सकों सहित 47 कर्मचारियों के स्टाफ की तैनाती है, लेकिन दो चिकित्सक और एक लैब टेक्नीशियन सहित पांच कर्मचारी ही यहां रहते हैं। गांव भिलावटी निवासी गुड्डी देवी ने बताया कि छोटी-मोटी समस्या पर ट्रामा सेंटर में दवा मिल जाती है, लेकिन गंभीर बीमारी पर जांच अथवा उपचार नहीं मिल पाता। रोहिना सिंहपुर गांव निवासी दीपक पाठक ने कहा कि सर्दी-जुकाम की दवाएं तो मिल जाती हैं, लेकिन गंभीर बीमारी अथवा सड़क हादसे के गंभीर घायलों के उपचार की व्यवस्था नहीं है। यह ट्रामा सेंटर रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
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अलीगढ़, सिकंदराराऊ, एटा, कासगंज, छर्रा, गंगीरी, विजयगढ़ रोड पर होने वाले हादसों के घायलों को जसरथपुर ट्रामा सेंटर ही लाया जाता है। यहां पर समुचित इलाज का इंतजाम न होने के कारण जिला अस्पताल अथवा जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं। अकराबाद थाना पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल सड़क हादसों में 100 से अधिक लोगों की मौतें हुई हैं। 175 लोग घायल भी हुए हैं।
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जसरथपुर ट्रामा सेंटर का शिलान्यास 15 दिसंबर 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। पांच जून 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन किया। जीटी रोड पर हादसों में घायलों को तत्काल समुचित इलाज के लिए इसकी स्थापना हुई। प्रतिदिन 50-60 मरीजों की ओपीडी होती है।
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ट्रामा सेंटर में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और सर्जिकल गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) का सेटअप है, लेकिन इसके संचालन के लिए स्टाफ नहीं है। एक्सरे मशीन भी नहीं है। जनरेटर, इन्वर्टर और सौर ऊर्जा की व्यवस्था नहीं है। बिजली गुल होते ही ट्रामा सेंटर अंधेरे में डूब जाता है। पेयजल की भी सुविधा नहीं है।
चिकित्सकों सहित 47 की तैनाती, मौके पर पांच कर्मी
ग्रामीणों का कहना है कि ट्रामा सेंटर में चिकित्सकों सहित 47 कर्मचारियों के स्टाफ की तैनाती है, लेकिन दो चिकित्सक और एक लैब टेक्नीशियन सहित पांच कर्मचारी ही यहां रहते हैं। गांव भिलावटी निवासी गुड्डी देवी ने बताया कि छोटी-मोटी समस्या पर ट्रामा सेंटर में दवा मिल जाती है, लेकिन गंभीर बीमारी पर जांच अथवा उपचार नहीं मिल पाता। रोहिना सिंहपुर गांव निवासी दीपक पाठक ने कहा कि सर्दी-जुकाम की दवाएं तो मिल जाती हैं, लेकिन गंभीर बीमारी अथवा सड़क हादसे के गंभीर घायलों के उपचार की व्यवस्था नहीं है। यह ट्रामा सेंटर रेफर सेंटर बनकर रह गया है।