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इतिहास में पद्मावती का कोई जिक्र नहीं: प्रो. इरफान हबीब

Sun, 29 Jan 2017 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
अमर उजाला ब्यूूराे Updated Sun, 29 Jan 2017 01:49 AM IST
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No mention in the history of Padmavati Prof. Irfan Habib
Irfan Habib - फोटो : Amar Ujala
प्रसिद्ध फिल्मकार संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर उठे विवाद और उसके बाद संजय लीला भंसाली के साथ हुई मारपीट के बाद फिल्मों में इतिहास के चित्रण और उसकी तथ्यपरकता के संबंध में  प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब के साथ अमर उजाला ने खास बातचीत की। जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह धारावाहिक या फिल्म निर्माता एक डिस्क्लेमर (शुरू में ही की गई घोषणा की हमारी कहानी का किसी जीवत या मृत व्यक्त से कोई लेना देना नहीं है) की आड़ में इतिहास के साथ मन मर्जी छेड़खानी करते हैं। 
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अमर उजाला- पद्मावती कौन थी? इतिहास में इनका क्या स्थान है?

इरफान हबीब- भक्तिकाल के कवि मलिक मोहम्मद जायसी की एक रचना ‘पद्मावत’ का एक किरदार है पद्मावती। इसका वास्तविक इतिहास से कोई लेना देना नहीं है। पद्मावत ग्रंथ को जायसी ने अकबर के समय करीब 1550 के आसपास लिखा था। इस कहानी में अलाउद्दीन खिलजी का जिक्र आया है, लेकिन अलाउद्दीन खिलजी का काल 1296 से 1316 के बीच का रहा। 
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अमर उजाला- पद्मावती किरदार की कहानी क्या है?

इरफान हबीब- कहानी है कि मेवाड़ के राजा रतन सिंह को लंका की राजकुमारी पद्मावती से प्रेम हो जाता है और वह शादी करके उसे मेवाड़ ले आते हैं। एक युद्ध में अलाउद्दीन खिलजी रतन सिंह को बंदी बना कर दिल्ली ले जाता है। पद्मावती अपनी चतुराई से धोखा देकर रतन सिंह को कैद से निकाल ले आती हैं। बाद में एक युद्ध में रतन सिंह की मौत हो जाती है। इस बीच अलाउद्दीन पद्मावती को चाहने लगता है और उसे हासिल करने की ख्वाहिश करता है। रतन सिंह की मौत के बाद वह पद्मावती को हासिल करने जाता है, लेकिन उससे पहले ही वह स्वयं को सती कर लेती हैं। 
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अमर उजाला- ताजा विवाद क्यों है?

इरफान हबीब- जो विवाद उठा रहे हैं वह यह बात तो जायसी से ही पूछ लें (हंसते हुए) खैर दर्शाया गया है कि अलाउद्दीन ने रतन सिंह को मार दिया। फिर वह पद्मावती को हासिल करने जा रहा होता है। इन्हीं सब बातों को लेकर विवाद है। 


अमर उजाला- पहले भी इतिहास का संदर्भ आने पर ऐसे विवाद हुए हैं। ऐसा क्यों?

इरफान हबीब- किस्से कहानी हर देश में होते हैं, लेकिन उसे इतिहास से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इंग्लैंड में भी राबिन हुड की कथा है, लेकिन उसे इतिहास का हिस्सा कभी नहीं माना गया। लेकिन यहां पर कहानियां भी इतिहास से जोड़कर देख ली जाती हैं।  
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