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अलीगढ़ से रोज निकलता है 450 किलोग्राम से अधिक कोरोना से जुड़ा कचरा
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मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी के गेट के पास बने कूड़ा घर में पड़ी पीपीई किट।
- फोटो : CITY OFFICE
कौशल कुमार ओझा
अलीगढ़ में रोज करीब 450 किलोग्राम कोरोना से जुड़ा कचरा निकलता है। इससे से करीब 400 किलोग्राम से अधिक का निस्तारण मथुरा स्थित राया प्लांट में होता है। लापरवाही के कारण कुछ कचरा शहर में रह जाता है और नगर निगम के सामान्य कचरे के साथ मिल जाता है। इससे संक्रमण फैलने के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का कहना है कि कोरोना से जुड़े कचरे को दूसरे कचरों से अलग करना समय की जरूरत है। अलीगढ़ में रोज करीब 450 किलोग्राम से अधिक कोरोना से जुड़ा कचरा निकलता है। ये कचरा कोरोना वायरस को समर्पित हरदुआगंज स्थित एल-1 हॉस्पिटल, अतरौली स्थित एल-1 हॉस्पिटल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय स्थित एल-2 हॉस्पिटल, जेएन मेडिकल कॉलेज, खैरेश्वर मार्ग स्थित जीवन ज्योति एल-1 अटैच्ड हॉस्पिटल, छेरत स्थित क्वारंटीन सेंटर और कुछ मथुरा रोड स्थित ए टू जेड प्लांट से निकलता है। इसके अतिरिक्त शहर में स्थित पैथ लैब एवं एसआरएल से भी कोरोना से संबंधित कचरा निकलता है।
मथुरा जनपद के राया स्थित बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल एजेंसी की गाड़ी आती है और कोरोना से जुड़े कचरे को निस्तारण के लिए ले जाती है। इस कचरे में मॉस्क, ग्लब्स, पीपीई किट, इंजेक्शन, दवा, लैब जांच में इस्तेमाल किए गए सामान, ऑपरेशन से जुड़े मानव शरीर से निकले अंग व ऑपरेशन से संबंधित कपड़े, कॉटन आदि शामिल होते हैं।
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औसतन अलीगढ़ से रोज 400 किलोग्राम कचरा मथुरा जाता है, लेकिन हॉस्पिटल एवं व्यक्तिगत स्तर पर की गई लापरवाही के कारण अनुमानित तौर पर 50 किलोग्राम से अधिक कचरा या तो नगर निगम के कचरा में चला जाता है या इधर-उधर फेंक दिया जाता है। इससे सड़क पर कूड़ा चुनने वाले बच्चे को सर्वाधिक खतरा है। जानकारों का कहना है कि यह स्थिति बेहद खतरनाक है और इससे संक्रमण फैलने के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
अलीगढ़ मंडल के चार जिलों (अलीगढ़, हाथरस, एटा और कासगंज) से रोज करीब 450 किलोग्राम कोरोना से जुड़ा कचरा निकलता है। मथुरा के राया स्थित बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल एजेंसी की गाड़ी आकर रोज कचरे को उठाकर ले जाती है। इसमें करीब 400 किलोग्राम कचरा सिर्फ अलीगढ़ का होता है। शासन स्तर से रोज इसकी निगरानी की जाती है। यह कार्य मार्च-अप्रैल 2020 से चल रहा है।
- रामगोपाल, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
संक्रमित मरीजों का घर से कचरा उठाना नई चुनौती
प्रदेश सरकार द्वारा लक्षणरहित मरीजों को शर्तों के साथ होम आइसोलेशन की अनुमति दी गई है। इससे कुछ नए तरह की समस्याएं खड़ी होने की आशंका है। इनका कचरा उठाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि होम आइसोलेशन के कचरे के प्रबंधन से संबंधित कोई गाइड लाइन अभी तक नहीं है। संभव है कि एक-दो दिन में इस पर विचार किया जाए और कोई रास्ता निकाला जाए। सहायक नगर आयुक्त राजबहादुर सिंह का कहना है कि बैठक में इस मुद्दे को रखकर विचार किया जाएगा और कोई रास्ता निकाला जाएगा। वर्तमान समय में निगम के पास ऐसा कोई सेंटर नहीं है, जहां कोरोना से संबंधित कचरे का निस्तारण किया जा सके। शुरू में पुराने शहर में जब बहुत सारे कोरोना के केस सामने आए थे तो कंटेनमेंट जोन के होम क्वारंटीन लोगों के कूड़े को उठाने के लिए अलग से इंतजाम किया गया था। उस कूड़े को निगम द्वारा जगह देखकर डंप कर दिया जाता था। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि कुछ शर्तों के साथ होम आइसोलेशन की अनुमति दी जाएगी। उसमें कूड़ा निस्तारण का भी ध्यान रखा जाएगा। इस बिंदु पर विचार कर जल्द समाधान निकाल लेंगे।
लापरवाही भी कम नहीं
अतरौली स्थित एल-1 हॉस्पिटल 18 जुलाई से बंद है। उस समय का कोरोना से संबंधित कचरा आज तक नहीं उठा है। उस पर मक्खियां भनभना रही हैं। जानवरों के माध्यम से कचरा एक से दूसरी जगह तक पहुंचने का भी खतरा है। अधीक्षक डॉ. कुलदीप का कहना है कि 18 जुलाई से कचरा उठाने गाड़ी नहीं आई है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में भी कचरा के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कचरा खुले में रख दिया जाता है। मास्क, ग्लब्स व अन्य उपयोग किए गए सामान इधर-उधर पड़े हुए हैं। रामबाग कॉलोनी के गेट पर पीपीई किट पड़ी दिखाई दे रही है। अन्य जगहों पर भी ऐसे नजारे देखने को मिल जाएंगे। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी का कहना है कि मैं स्वयं चिकित्सालयों से बात कर इस मामले को देखूंगा। अगर खुले में कोरोना से संबंधित कचरा मिलता है तो खतरे को न्योता देना है।
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अलीगढ़ में रोज करीब 450 किलोग्राम कोरोना से जुड़ा कचरा निकलता है। इससे से करीब 400 किलोग्राम से अधिक का निस्तारण मथुरा स्थित राया प्लांट में होता है। लापरवाही के कारण कुछ कचरा शहर में रह जाता है और नगर निगम के सामान्य कचरे के साथ मिल जाता है। इससे संक्रमण फैलने के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का कहना है कि कोरोना से जुड़े कचरे को दूसरे कचरों से अलग करना समय की जरूरत है। अलीगढ़ में रोज करीब 450 किलोग्राम से अधिक कोरोना से जुड़ा कचरा निकलता है। ये कचरा कोरोना वायरस को समर्पित हरदुआगंज स्थित एल-1 हॉस्पिटल, अतरौली स्थित एल-1 हॉस्पिटल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय स्थित एल-2 हॉस्पिटल, जेएन मेडिकल कॉलेज, खैरेश्वर मार्ग स्थित जीवन ज्योति एल-1 अटैच्ड हॉस्पिटल, छेरत स्थित क्वारंटीन सेंटर और कुछ मथुरा रोड स्थित ए टू जेड प्लांट से निकलता है। इसके अतिरिक्त शहर में स्थित पैथ लैब एवं एसआरएल से भी कोरोना से संबंधित कचरा निकलता है।
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मथुरा जनपद के राया स्थित बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल एजेंसी की गाड़ी आती है और कोरोना से जुड़े कचरे को निस्तारण के लिए ले जाती है। इस कचरे में मॉस्क, ग्लब्स, पीपीई किट, इंजेक्शन, दवा, लैब जांच में इस्तेमाल किए गए सामान, ऑपरेशन से जुड़े मानव शरीर से निकले अंग व ऑपरेशन से संबंधित कपड़े, कॉटन आदि शामिल होते हैं।
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औसतन अलीगढ़ से रोज 400 किलोग्राम कचरा मथुरा जाता है, लेकिन हॉस्पिटल एवं व्यक्तिगत स्तर पर की गई लापरवाही के कारण अनुमानित तौर पर 50 किलोग्राम से अधिक कचरा या तो नगर निगम के कचरा में चला जाता है या इधर-उधर फेंक दिया जाता है। इससे सड़क पर कूड़ा चुनने वाले बच्चे को सर्वाधिक खतरा है। जानकारों का कहना है कि यह स्थिति बेहद खतरनाक है और इससे संक्रमण फैलने के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
अलीगढ़ मंडल के चार जिलों (अलीगढ़, हाथरस, एटा और कासगंज) से रोज करीब 450 किलोग्राम कोरोना से जुड़ा कचरा निकलता है। मथुरा के राया स्थित बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल एजेंसी की गाड़ी आकर रोज कचरे को उठाकर ले जाती है। इसमें करीब 400 किलोग्राम कचरा सिर्फ अलीगढ़ का होता है। शासन स्तर से रोज इसकी निगरानी की जाती है। यह कार्य मार्च-अप्रैल 2020 से चल रहा है।
- रामगोपाल, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
संक्रमित मरीजों का घर से कचरा उठाना नई चुनौती
प्रदेश सरकार द्वारा लक्षणरहित मरीजों को शर्तों के साथ होम आइसोलेशन की अनुमति दी गई है। इससे कुछ नए तरह की समस्याएं खड़ी होने की आशंका है। इनका कचरा उठाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि होम आइसोलेशन के कचरे के प्रबंधन से संबंधित कोई गाइड लाइन अभी तक नहीं है। संभव है कि एक-दो दिन में इस पर विचार किया जाए और कोई रास्ता निकाला जाए। सहायक नगर आयुक्त राजबहादुर सिंह का कहना है कि बैठक में इस मुद्दे को रखकर विचार किया जाएगा और कोई रास्ता निकाला जाएगा। वर्तमान समय में निगम के पास ऐसा कोई सेंटर नहीं है, जहां कोरोना से संबंधित कचरे का निस्तारण किया जा सके। शुरू में पुराने शहर में जब बहुत सारे कोरोना के केस सामने आए थे तो कंटेनमेंट जोन के होम क्वारंटीन लोगों के कूड़े को उठाने के लिए अलग से इंतजाम किया गया था। उस कूड़े को निगम द्वारा जगह देखकर डंप कर दिया जाता था। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि कुछ शर्तों के साथ होम आइसोलेशन की अनुमति दी जाएगी। उसमें कूड़ा निस्तारण का भी ध्यान रखा जाएगा। इस बिंदु पर विचार कर जल्द समाधान निकाल लेंगे।
लापरवाही भी कम नहीं
अतरौली स्थित एल-1 हॉस्पिटल 18 जुलाई से बंद है। उस समय का कोरोना से संबंधित कचरा आज तक नहीं उठा है। उस पर मक्खियां भनभना रही हैं। जानवरों के माध्यम से कचरा एक से दूसरी जगह तक पहुंचने का भी खतरा है। अधीक्षक डॉ. कुलदीप का कहना है कि 18 जुलाई से कचरा उठाने गाड़ी नहीं आई है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में भी कचरा के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कचरा खुले में रख दिया जाता है। मास्क, ग्लब्स व अन्य उपयोग किए गए सामान इधर-उधर पड़े हुए हैं। रामबाग कॉलोनी के गेट पर पीपीई किट पड़ी दिखाई दे रही है। अन्य जगहों पर भी ऐसे नजारे देखने को मिल जाएंगे। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी का कहना है कि मैं स्वयं चिकित्सालयों से बात कर इस मामले को देखूंगा। अगर खुले में कोरोना से संबंधित कचरा मिलता है तो खतरे को न्योता देना है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय बाहर पड़ी पीपीई किट।- फोटो : CITY OFFICE