मरीज लाओ, कमीशन पाओ: मेडिकल तक फैला अस्पतालों के एजेंटों का नेटवर्क, अस्पताल पर मुकदमा, जांच शुरू
जेएन मेडिकल काॅलेज पहुंचने वाले और वहां भर्ती मरीजों को बरगलाकर निजी अस्पताल में ले जाने और तीमारदारों से इलाज के नाम पर ठगी करने का आरोप लगाते हुए थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अलीगढ़ के ताला नगरी में नर्सिंग होम और एंबुलेंस चालकों के बीच कमीशनबाजी का बड़ा नेटवर्क चल रहा है। बीस से तीस फीसदी तक कमीशन दिया जा रहा है। यह खेल केवल अलीगढ़ में ही नहीं बल्कि यहां से आगरा और दिल्ली तक मरीजों को मोटे कमीशन के लालच में बरगलाकर ले जाया जा रहा है।
मेडिकल कालेज तक एजेंटों का नेटवर्क फैला है। लेकिन सब कुछ जानकर भी जिम्मेदार बेखबर हैं। हालांकि अलीगढ़ में एक बड़ी संख्या ऐसे अस्पताल और नर्सिंग होम की भी है जहां अच्छा इलाज मिलने के चलते बिनी किसी प्रचार के मरीजों की भीड़ रहती है। दो-दो दिन बाद नंबर आ रहा है। लेकिन वहीं जहां मरीजों की संख्या कम है और खर्चे भी नहीं निकल पा रहे हैं वहां कमीशन के जरिए मरीजों को जुटाया जा रहा है।
इन लोगों के एजेंट सरकारी अस्पतालों के इर्द गिर्द दिख जाते हैं। वहां से मरीजों को बरगलाकर वहां ले जाते हैं जहां उनका कमीशन तय होता है। इस प्रकार के मामले पहले भी प्रकाश में आ चुके हैं।
मेडिकल काॅलेज से मरीजों को बरगलाकर लाने का आरोप, मुकदमा दर्ज
जेएन मेडिकल काॅलेज पहुंचने वाले और वहां भर्ती मरीजों को बरगलाकर निजी अस्पताल में ले जाने और तीमारदारों से इलाज के नाम पर ठगी करने का आरोप लगाते हुए थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
थाना सिविल लाइंस में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए थाना विजयगढ़ के दिहोली निवासी प्रवीण ने कहा है कि कुछ महीने पहले वह एसके मेमोरियल हाॅस्पिटल में नर्सिंग स्टाफ के पद पर 9000 रुपये महीने पर नियुक्त हुआ था। हाॅस्पिटल के मालिक डाॅ. शाकिर व उनके मैनेजर शाहरुख ने उसे तनख्वाह नहीं दी। जब तनख्वाह मांगी तो कहा कि उन्होंने उसे नर्सिंग स्टाफ के लिए नहीं रखा है। बोले- तुम जेएन मेडिकल काॅलेज में जाकर मरीजों व उनके तीमारदारों को बहला-फुसलाकर अस्पताल लाओ। उनका अस्पताल इसी काम से चल रहा है।
मेडिकल कॉलेज के अंदर भी डाॅक्टरों से उनकी सेटिंग है, जो अंदर की बातें बताते हैं। वे अक्सर ऐसे लोगों को भी वेंटिलेटर के लिए रेफर करा देते हैं, जिन्हें उसकी जरूरत नहीं होती है। अस्पताल के मालिक डाॅ. शारिक ने कहा कि उन्हें उनके हिस्से का 30 प्रतिशत कमीशन देते हैं। इसके बाद मैनेजर शाहरुख व अस्पताल मालिक डाॅ. शारिक ने धमकाते हुए कहा कि अगर यह जानकारी किसी को दी तो जान से मार देंगे।
आरोप है कि रोजाना दोपहर दो-तीन बजे के बीच मैनजर शाहरुख अपनी कार में पार्टनर शान के साथ हाॅस्पिटल मालिक शारिक के कहने पर जेएन मेडिकल कॉलेज जाते हैं। वहां पर मरीज व उनके तीमारदारों को बहला-फुसला कर इलाज कराने के बहाने अपने हाॅस्पिटल ले आते हैं। इलाज के नाम पर मरीजों व तीमारदारों से लाखों रुपये की ठगी करते हैं। ठगे जाने वाले सभी लोग बाहर के होते हैं। बहुत लोगों को ठगा गया है। किसी तरह वह उसके चंगुल से बाहर निकल पाया है। इस संबंध में सीओ सिविल लाइंस अशोक कुमार ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है।
सरकारी अस्पतालों से बिचौलियों के जरिये मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती करने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में जांच की जाएगी।-डॉ नीरज त्यागी, सीएमओ, अलीगढ़
जेएन मेडिकल कॉलेज में अंदर मिलीभगत का आरोप लगाने के मामले में जांच की जाएगी। किसी भी मरीज को अलीगढ़ के निजी अस्पताल के लिए रेफर नहीं किया जाता है।- डॉ वीणा माहेश्वरी, प्राचार्या, जेएन मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़