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न साधन और न संसाधन, संकट में मरीजों का जीवन

Wed, 21 Apr 2021 12:44 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Apr 2021 12:44 AM IST
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Neither means nor resources, life of patients in crisis
घरों में सैनिटाइज करते नगर निगम कर्मचारी । - फोटो : CITY OFFICE
कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
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जरूरी संसाधनों के अभाव में कोरोना पीड़ित गंभीर मरीजों का जीवन संकट में है। जनपद में मेडिकल आक्सीजन एवं रेडमेसिविर इंजेक्शन की किल्लत है। संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अस्पतालों में बेड कम पड़ने लगे हैं। जेब में पैसा लेकर लोग बेहतर उपचार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। आईसीयू, विशेषज्ञ डॉक्टर, दवाई का अभाव है। एक साल बाद भी हम इस महामारी से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाए हैं।
बेकाबू होते हालात एवं उपचार देने में परेशानी शुरू होने के बाद संक्रमण की गति पर रोक लगाने के लिए पड़ोसी राज्य दिल्ली में एक सप्ताह का लॉकडाउन लगा दिया गया है। अपने जनपद में भी हालात बहुत अच्छे नहीं है। सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए बेड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। कोरोना जांच, उसकी रिपोर्ट से लेकर अस्पताल में भर्ती होकर बेड तक पहुंचना संघर्ष जैसा है। ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों का जीवन संकट में है। सबसे अधिक समस्या रेडमेसिविर इंजेक्शन एवं ऑक्सीजन की उपलब्धता की है।
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एक सप्ताह में 766 संक्रमित, अस्पताल में 689 बेड
पिछले एक सप्ताह में 766 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं। 19 अप्रैल को 168, 18 अप्रैल को 159 और 17 अप्रैल को 165 लोग संक्रमित हुए थे। 16 अप्रैल को 93, 15 अप्रैल को 87, 14 अप्रैल को 54 एवं 13 अप्रैल को 40 संक्रमण की चपेट में आए थे। एक सप्ताह का संक्रमित होने का दैनिक औसत 109.42 लोग प्रति दिन है। जबकि सोमवार तक जनपद में सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में बेडों की संख्या 689 थी। कुछ सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों (एल-1) में व्यवस्थाएं की जा रही थीं, जिनमें बेडों की संख्या 367 है। दोनों को जोड़ने पर बेडों की कुल संख्या 1056 हो रही है। लेकिन जिस रफ्तार से मरीज सामने आ रहे हैं, उस अनुपात में यह संख्या पर्याप्त नहीं है।
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पिछले साल तो स्थिति आज से भी बदतर थी
वर्ष 2020 में स्थिति ज्यादा बदतर थी। राज्य सरकार के किसी भी अस्पताल में वेंटिलेटर एवं आईसीयू की सुविधा नहीं थी। लॉकडाउन के समय में संसाधनों का विकास हुआ था। पं. दीनदयाल कोविड अस्पताल में आईसीयू एवं 44 वेंटिलेटर कोरोना काल की ही देन है।
जेएन मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में भी 26 वेंटिलेटर हैं। इसके अतिरिक्त अतरौली के 100 बेड अस्पताल में 3 वेंटिलेटर हैं। लेकिन दीनदयाल एवं 100 बेड अस्पताल में आज भी विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों का अभाव है। कोरोना काल में ही पं. दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय में आरटीपीसीआर लैब की स्थापना एवं जांच शुरू हुई थी।
स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के 140 पद रिक्त
- सीएमओ सहित डॉक्टरों के 214 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 74 कार्य कर रहे हैं और 140 पद खाली है।
- सीएमओ के अंतर्गत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 309 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 153 कार्यरत हैं और 156 रिक्त हैं। हकीकत यह है कि संविदा कर्मियों के भरोसे स्वास्थ्य विभाग की गाड़ी जैसे-तैसे चल रही है।
- वर्तमान में हमारे पास सरकारी एवं प्राइवेट मिलाकर 956 बेड हैं। छेरत, मंगलायतन, खैर व चंडौस में एल-1 अस्पताल शुरू हो रहा है। संविदा पर डॉक्टरों एवं फार्मासिस्टों की तैनाती के लिए आज इंटरव्यू हुआ है। हमारे पास जितने संसाधन है, उससे ज्यादा मरीज आ रहे हैं। स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। जिला अस्पताल में 8 और अतरौली 100 बेड में 3 वेंटिलेटर हैं। उन्हें पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में लाकर आईसीयू की क्षमता बढ़ाएंगे। - डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ
19 अप्रैल 2021 तक की स्थिति...
कोविड अस्पताल में बेड एवं भर्ती की स्थिति
अस्पताल का नाम बेड सक्रिय मरीज
जेएन मेडिकल कॉलेज 100 36
दीनदयाल अस्पताल 362 260
100 बेड अतरौली 130 108
रूसा हॉस्पिटल 15 15
वरुण अस्पताल 12 12
मिथराज अस्पताल 30 24
एसजेडी अस्पताल 40 08
नोट... इनके अतिरिक्त छेरत में 135, मंगलायतन में 100, खैर सीएचसी में 22, चंडौस सीएचसी में 25, जीवन ज्योति में 45, नारायणी में 40 बेड का अस्पताल शुरू किया जा रहा है। इसमें जीवन ज्योति व नारायणी प्राइवेट अस्पताल हैं।

गंभीर मरीज ...
- ऑक्सीजन पर मरीज ... जेएन मेडिकल कॉलेज में 3, पं. दीनदयाल अस्तपाल में 70
- वेंटिलेटर पर मरीज... एनआईवी 4 एवं एचएफएनसी 16
- पेसेंट रिकवरी रेट - 94.45 प्रतिशत
एक नजर
- अब तक संक्रमित मरीज... 12739
- स्वस्थ मरीजों की संख्या - 12033
- सरकारी आंकड़ों में मृत्यु - 58
- सक्रिय मरीज - 648
- अब तक जांच - 726959
नोट- प्रतिदिन कुछ मरीज ठीक भी हो रहे हैं।
- महामारी के मौजूदा समय में उपचार के लिए लोग तड़प रहे हैं। बेहद दुख है कि सभी मरीजों की सेवा नहीं कर पा रहा हूं। अस्पताल की क्षमता सीमित है। ऑक्सीजन, रेडमेसिविर एवं फेवीफ्लू आदि दवा की आपूर्ति पर्याप्त नहीं होने के कारण मरीजों के उपचार में परेशानी आ रही है। - सुमित सराफ, डायरेक्टर, शेखर सराफ मेमोरियल हॉस्पिटल रूसा
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