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नवरात्र : दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की हुई पूजा
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गांधी पार्क बस अड्डे चौराहे स्थित चमुण्डा माता के मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु
- फोटो : CITY OFFICE
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चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की। कई श्रद्धालुओं ने अपने घर पर ही पूजा-अर्चना की। गली मोहल्लों में बने मंदिरों और प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालु पहुंचे। वहीं महिलाओं ने आज (वृहस्पतिवार) गणगौर के व्रत के लिए तैयारियां कीं। महिलाएं सौभाग्यवती रहने के लिए आज व्रत रखेंगी और गणगौर की पूजा करेंगी।
शहर के हाथरस अड्डे स्थित पथवारी मंदिर, मैलरोज बाईपास स्थित कामख्या मंदिर, पुराने बस स्टेंड स्थित चामुंडा मंदिर, रामघाट रोड के एडीए मार्केट स्थित वैष्णो देवी मंदिर, महेंद्र नगर स्थित महाकाली मंदिर, नौरंगाबाद स्थित नवदुर्गा मंदिर, सासनीगेट स्थित काली मंदिर तथा अन्य मंदिरों में सुबह से ही पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंचे। कई श्रद्धालु मास्क लगाकर पहुंचे तो कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने मास्क नहीं लगा रखे थे। वहीं शाम को इन मंदिरों में दर्शन करने के लिए श्रद्धालु भी पहुंचे। इसके अलावा महिलाओं ने आज के गणगौर व्रत के लिए बुधवार को तैयारियां कीं।
श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि गणगौर पूजा और गणगौरी व्रत का महत्व शास्त्रों में मिलता है। इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां व्रत रखती हैं। कहावत है कि इस दिन पार्वती ने भगवान शंकर से सौभाग्यवती रहने का वरदान प्राप्त किया था। पार्वती ने अन्य स्त्रियों को भी सौभाग्यवती रहने का वरदान दिया था। पूजन के समय रेणुका (मिट्टीकी) गौर बनाकर उस पर महावर और सिंदूर चढ़ाने का विशेष रिवाज है। चंदन, अक्षत, धूपबत्ती, दीप, नैवेद्य से पूजन करके भोग लगाया जाता है। विवाहित स्त्रियां को गणगौर पर चढ़ने के बाद सिंदूर को अपनी मांग में लगाना चाहिए। इसी पूजा के लिए बुधवार को तैयारियां की गईं।
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शहर के हाथरस अड्डे स्थित पथवारी मंदिर, मैलरोज बाईपास स्थित कामख्या मंदिर, पुराने बस स्टेंड स्थित चामुंडा मंदिर, रामघाट रोड के एडीए मार्केट स्थित वैष्णो देवी मंदिर, महेंद्र नगर स्थित महाकाली मंदिर, नौरंगाबाद स्थित नवदुर्गा मंदिर, सासनीगेट स्थित काली मंदिर तथा अन्य मंदिरों में सुबह से ही पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंचे। कई श्रद्धालु मास्क लगाकर पहुंचे तो कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने मास्क नहीं लगा रखे थे। वहीं शाम को इन मंदिरों में दर्शन करने के लिए श्रद्धालु भी पहुंचे। इसके अलावा महिलाओं ने आज के गणगौर व्रत के लिए बुधवार को तैयारियां कीं।
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श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि गणगौर पूजा और गणगौरी व्रत का महत्व शास्त्रों में मिलता है। इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां व्रत रखती हैं। कहावत है कि इस दिन पार्वती ने भगवान शंकर से सौभाग्यवती रहने का वरदान प्राप्त किया था। पार्वती ने अन्य स्त्रियों को भी सौभाग्यवती रहने का वरदान दिया था। पूजन के समय रेणुका (मिट्टीकी) गौर बनाकर उस पर महावर और सिंदूर चढ़ाने का विशेष रिवाज है। चंदन, अक्षत, धूपबत्ती, दीप, नैवेद्य से पूजन करके भोग लगाया जाता है। विवाहित स्त्रियां को गणगौर पर चढ़ने के बाद सिंदूर को अपनी मांग में लगाना चाहिए। इसी पूजा के लिए बुधवार को तैयारियां की गईं।
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