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AMU: निर्माण को मजबूत करेगी नैनो-सिलिका तकनीक, एएमयू वैज्ञानिकों को मिला पेटेंट, नई तकनीक से ये होंगे फायदे
Fri, 17 Apr 2026 01:40 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Fri, 17 Apr 2026 01:40 PM IST
सार
यह तकनीक सीमेंट आधारित मिश्रण में नैनो-सिलिका के स्थिर वितरण के लिए एक सरल, किफायती और विस्तार योग्य विधि प्रदान करती है। बताते हैं कि इस तकनीक को बाजार में उतारने की तैयारी है।
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एएमयू
- फोटो : संवाद
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विस्तार
एएमयू के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों को “ए नॉवेल नैनो सिलिका डिस्पर्स्ड सॉल्यूशन एंड ए प्रोसेस फॉर द प्रिपरेशन देअर ऑफ” तकनीक के लिए भारतीय पेटेंट मिला है। नैनो-सिलिका को व्हाइट कार्बन ब्लैक भी कहा जाता है, जो परमाणु स्तर पर सीमेंट की सामग्री के गुणों को बेहतर बनाने में मदद करता है।
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डॉ. साद शमीम अंसारी, डॉ. सैयद मोहम्मद इब्राहिम और प्रो. सैयद दानिश हसन ने यह तकनीक विकसित की है। यह तकनीक सीमेंट आधारित मिश्रण में नैनो-सिलिका के स्थिर वितरण के लिए एक सरल, किफायती और विस्तार योग्य विधि प्रदान करती है। बताते हैं कि इस तकनीक को बाजार में उतारने की तैयारी है।
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डॉ. साद शमीम अंसारी के अनुसार, नैनो-सिलिका तकनीक सिलिकॉन डाइऑक्साइड (एसआईओ-टू) के अति-सूक्ष्म कणों (1-100 एनएम) का उपयोग करने वाली एक नैनो-इंजीनियरिंग तकनीक है। यह अकार्बनिक पदार्थ अपनी उच्च सक्रियता के कारण सामग्री की मजबूती, टिकाऊपन और रासायनिक प्रतिरोध को बढ़ाता है। इसका मुख्य उपयोग कंक्रीट, रबर, कोटिंग्स और बायोमेडिकल क्षेत्रों में प्रदर्शन सुधारने के लिए किया जाता है।
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क्या है नैनो-सिलिका तकनीक की विशेषताएं
- निर्माण : यह सीमेंट में हाइड्रेशन प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे कंक्रीट अधिक घना, मजबूत और अभेद्य बनता है।
- सामग्री सुधार : यह प्लास्टिक, पेंट और रबर की यांत्रिक शक्ति, कठोरता और घिसाव प्रतिरोध को ज्यादा बढ़ाता है।
- उत्पादन : इसे सोल-जेल, वाष्प-चरण प्रतिक्रिया या चावल के छिलके जैसे कृषि उप-उत्पादों से बनाया जाता है।
- अन्य उपयोग : तेल कुओं की सीमेंटिंग, कोटिंग्स (कोटिंग्स की कठोरता बढ़ाना) और इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेजिंग में भी इसका उपयोग किया जाता है।