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नगर निगम बोर्ड बैठक में पार्षद पति ने सिर दीवार में दे मारा

Sat, 04 Jun 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 04 Jun 2016 01:48 AM IST
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Municipal board meeting Councillor husband hit his head in the wall
नगर निगम जवाहर भवन में नगर निगम बोर्ड के अधिवेशन में पानी व सफाई की समस्या को लेकर पहुचे पार्षद को बाहर निकालते उपनगर आयुक्त। - फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
नगर निगम बोर्ड की बैठक में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। ढाई वर्ष से वार्ड में कोई भी निर्माण का टेंडर नहीं होने के विरोध में एक पार्षद के पति ने अपना सिर ही दीवार में दे मारा। फर्जी हस्ताक्षर करके पार्षदों का मानदेय निकालने के विरोध में पार्षदों के दो पक्ष आमने सामने आ गए और एक बार को ऐसा लगा कि मारपीट भी हो सकती है। इस बीच कुछ अमर्यादित शब्दों का प्रयोग भी किया गया। जलकर में ब्याज का मुद्दा भी उठा और वर्कशॉप के वाहनों के ईंधन का मुद्दा उठा।  बैठक की शुरुआत में हो रहे हंगामे और कुछ बाहरी लोगों के सदन में प्रवेश कर जाने पर मेयर शकुंतला भारती भड़क उठीं और उन्होंने हंगामा कर रहे लोगों को जमकर फटकारा। सदन की गरिमा की दुहाई दी और जनहित का वास्ता दिया। इसके बाद बैठक पूरे दिन चली।
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शुक्रवार को बैठक जब शुरु हुई तो पार्षद शबाना असलम के पति असलम नूर सदन में आ गए और अपने वार्ड में ढाई साल में एक भी टेंडर नहीं होने की बात कही। हो रहे हंगामे को देखते हुए मेयर ने उन्हें बाहर रहने के लिए कहा। इसी क्रम में जब मामला तूल पकड़ा तो असलम नूर ने उत्तेजना में अपना सिर वहीं दीवार में मार लिया। हालांकि सिर मारने का वेग इतना तेज नहीं था जिससे कोई गंभीर क्षति पहुंचती। किसी तरह मामले को शांत किया गया। मुख्य अभियंता ने बताया कि इनके वार्ड में 30 लाख रुपये के चार कामों का डेंटर हो चुका है। मेयर ने इनके वार्ड की फाइल अपने कार्यालय में तलब की है। अभी कार्यवाही आगे बढ़ी ही थी कि पार्षद संजय शर्मा ने फर्जी हस्ताक्षर करके पार्षदों का मानदेय निकालने का मुद्दा उठा दिया। इस पर पार्षदों के दो गुटों में नोकझोंक शुरू हो गई। आरोप प्रत्यारोप लगने लगे। महापौर ने हस्तक्षेप कर मामला शांत किया और कहा कि जो एजेंडे में सवाल और प्रस्ताव हैं उन पर चर्चा होगी।  बैठक में नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा, उप नगर आयुक्त मो. मसूद अहमद, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा, पार्षद शहजाद अल्वी, अफजाल हमीद, ठा. पुष्पेंद्र सिंह जादौन, योगेश सिंघल, राजीव उपाध्याय, दिनेश जादौन, चंद्र प्रकाश चंदू आदि मौजूद थे।
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इतने तेल में तो ट्रैक्टर आगरा जाकर लौट आएगा
बैठक में सबसे तकनीकी मुद्दा वरिष्ठ पार्षद कुलदीप पांडे ने उठाया। कुलदीप पांडे ने के सवाल के बाद जो जवाब मिला उसके मुताबिक नगर निगम वर्कशॉप में 65 वाहन हैं। इनकी एक वर्ष में कुल ईंधन की खपत 42 हजार 845 लीटर है। इस पर 2 करोड़ 32 लाख 12 हजार रुपये खर्च होते हैं। प्रति दिन एक गाड़ी पर इस प्रकार 1152 रुपये का खर्चा होता है। इस तरह एक वाहन को करीब 22 लीटर ईंधन है। इतने ईंधन में ट्रैक्टर आगरा जाकर लौट आएगा। इसी तरह 50 लाख72 हजार 578 रुपये वाहनों के रखरखाव में प्रति वर्ष खर्चा दिखाया गया है। एक वाहन पर एक वर्ष में यह रकम 72 हजार रुपये बैठती है। यह रकम भी बहुत ज्यादा है।
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जलकर पर ब्याज का आधार क्या
पार्षद मो. हामिद ने जलकर पर ब्याज का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जलकल विभाग उपभोक्ताओं को डिमांड नोटिस भेज रहा है। इसमें ब्याज लगाई जा रही है। इसका आधार क्या है। क्योंकि उन इलाकों में भी बिल और ब्याज लगा दी गई है जहां पर पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है। इसी मुद्दे को पार्षद डॉ. दिनेश शर्मा, कुलदीप पांडे और रिजवान मिंटो ने और स्पष्ट किया।
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