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मातृ भाषा दिल के करीब होती है : प्रोफेसर मस्तान

Tue, 23 Feb 2021 02:29 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2021 02:29 AM IST
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mother tongue is always near our heart say professior mastan
एएमयू में मातृ भाषा दिवस पर कार्यक्रम को संबोधित करते कला संकाय के पूर्व डीन प्रो. शेख मस्तान। - फोटो : CITY OFFICE
मातृभाषा में विचारों और भावनाओं को व्यक्त करना आसान होता है। हम कई भाषाएं सीख सकते हैं। कई भाषाएं बोल सकते हैं, लेकिन मातृभाषा दिल के करीब होती है। ये बातें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आर्ट फैकल्टी के पूर्व डीन प्रो. शेख मस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
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प्रो. शेख मस्तान वर्तमान में आंध्रप्रदेश में राजभाषा आयोग के सदस्य हैं। उन्होंने सोमवार को एएमयू के आधुनिक भाषा विभाग में आयोजित कार्यक्रम में संबोधित किया था। मलयालम खंड के प्रो. ए नजुम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हमें याद दिलाता है कि मातृभाषा का एक विशेष दर्जा और महत्व है। मराठी खंड के डॉ. ताहिर एच पठान ने कहा कि मातृभाषा हमें अपनी विशिष्ट संस्कृति से जोड़ती है। बंगाली सेक्शन की डॉ. आमना खातुन, तमिल सेक्शन की डा. तमिल सैलून और मलयालम सेक्शन के मिस्टर रफाल बाबू ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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विभागाध्यक्ष प्रो. मुश्ताक अहमद जरगर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि भारत एक बहुभाषी, बहु सांस्कृतिक और बहुधार्मिक देश है। हर क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग मौसम और बोलियां हैं। डॉ. सबाहउद्दीन अहमद बताया कि भाषा को सबसे बड़ा मानव आविष्कार क्यों कहा गया है। भाषा विज्ञान विभाग में मातृभाषा दिवस पर एक ऑनलाइन कविता प्रतियोगिता ‘क्रिएटिविटी इन मदर टंग’ का आयोजन किया गया।
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विमेंस कॉलेज में कविता पाठ का आयोजन
एएमयू के विमेंस कॉलेज में मातृभाषा दिवस के अवसर पर भाषण व कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। छात्राओं ने मातृभाषा की आवश्यकता और महत्व विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। स्वरचित कविताओं का पाठ किया।
गीता गुप्ता को प्रथम, राशि को द्वितीय व अल्पना को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। गर्विशा, फरहाना, जैनब सुल्ताना, हादिया जबी को सांत्वना पुरस्कार मिला।
प्रो. रेशमा बेगम ने निर्देशन, डॉ. शगुफ्ता नियाज ने संचालन किया। डॉ. नाजिश बेगम ने आभार जताया।
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