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खनन: मशीनों से खोखली की जा रही गंगा-यमुना की कोख

Mon, 25 Jun 2018 02:13 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Mon, 25 Jun 2018 02:13 AM IST
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Mining: Ganga-Yamuna kohk being hollow from machines
अतरौली के सांकरा में मशीनों से किया जा रहा बालू का खनन। - फोटो : अमर उजाला
खनन को लेकर प्रदेश सरकार बेहद गंभीर रुख अपनाए हुए है। हाल ही में कई जिलों में अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है पर अपने जिले में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से गंगा और यमुना की कोख में खनन किया जा रहा है।
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खास बात है कि सोना उगल रही इस बालू के लिए दिनदहाड़े सुप्रीम कोर्ट और मुख्यमंत्री के आदेश ताक पर रखकर पोकलैंड और लिफ्टर जैसी मशीनों से खनन किया जा रहा है। इस वजह से गंगा में सांकरा क्षेत्र में हुए 30-30 फीट गहरे गड्ढे लगातार मौत का भी कारण बन रहे हैं। अधिकारी रटा-रटाया जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं कि हमारी सीमा में सब कुछ नियम-कानूनों को ध्यान में रखकर हो रहा है। इस पड़ताल में लोगों ने खनन के पीछे राजनीतिक संरक्षण की बात भी कही।
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छापे से पहले जाती है खनन माफिया को खबर
अतरौली के गांव सांकरा में पोकलेंड और लिफ्टर मशीनों से हो रहे बालू खनन के कारण गंगा की धारा बदलने से कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे हैं। मगर पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग चुप्पी साधे बैठे हैं। आलम यह है कि अधिकारी छापा मारने की औपचारिकता करने जाते हैं तो खनन वालों को पहले ही पता होता है और मशीनें कुछ देर के लिए हटा दी जाती हैं। इससे अवैध खनन अधिकारियों को कुछ नहीं मिलता और कोई कार्रवाई नहीं होती। हालांकि गांव सांकरा में बालू खनन का पट्टा जिला प्रशासन ने उठाया है और एक ही पट्टा है। ऐसे में यह सब क्या किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण में हो रहा है, इस सवाल पर लोग चुप्पी साध जा रहे हैं। खनन के कारोबार से जिले के एक कद्दावर नेता का नाम भी चर्चाओं में है।
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शिकायतकर्ता अब अदालत जाने की तैयारी में, मिल रही धमकी
इस मुद्दे पर लगातार वीडियो व फुटेज के साथ मुख्यमंत्री तक को शिकायत कर चुके गांव सांकरा के सुशील कुमार कहते हैं कि अब वह अदालत जाने की तैयारी में हैं। इसे लेकर एक जनहित याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा है कि मशीनों से खनन की मैंने शिकायत की। प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की तो मुख्यमंत्री से भी शिकायत की। गंगा की धारा बदलने से कई गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। शिकायत करने पर मुझे झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जा रही हैं।

प्रतापगढ़ के एक भैया जी का दबाव
सूत्रों की मानें तो टप्पल क्षेत्र के कुछ लोग प्रतापगढ़ के एक रसूखदार भैया जी तक पहुंच गये थे। जिस पर उन्होंने जिले के अधिकारियों से सिफ ारिश की थी। चूंकि जिले के वरिष्ठ अधिकारी उनके इलाके से ही आये हैं। जिसके चलते उनकी बात को नजरअंदाज करना भी मुनासिब नहीं हो पा रहा था। बड़े अधिकारी के दबाव में सभी छोटे अधिकारी भी चुप थे। लेकिन अब शासन तक शिकायत के बाद मामला गंभीर हुआ तो कार्रवाई भी हुई।

कई लोगों की जा चुकी है जान
मशीनों से खनन के कारण कई जगह गहरी खाइयां हो गई हैं। कहीं पानी घुटनों तक है तो कहीं थोड़ा आगे पैर रखने पर लोग गहरे गड्ढे में चले जाते हैं। जो तैरना जानते हैं वह तो किसी तरह खुद को बचा लेते हैं। बाकी मौत के मुंह में समा जाते हैं। एक महीने में सांकरा में गंगा में डूबने से बुलंदशहर के सात साल के बच्चे, खड़ौआ व नगला करन सिंह के दो युवक, संभल की महिला व उसके दो बच्चों सहित आठ लोगों की मौत हो गई है। इसके बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी है।

इन गांवों में बढ़ा है बाढ़ का खतरा
हर साल गंगा में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आती है। सांकरा के अलावा गांव सीकरी, किरतोली, गहतोली गंग, हामिदपुर, रुस्तमपुर, गोपालपुर, डालीपुर आदि गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। इन गांव के लोगों को पलायन तक करना पड़ता है। जबरदस्त खनन से बन रही गहरी खाइयों के कारण गंगा की धारा का रुख बदल सकता है। ग्रामीणों को डर है कि यदि गंगा की धारा इन गांवों की ओर मुड़ गई तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

अधिकारी भी बचते हैं माफिया पर कार्रवाई करने से
 टप्पल में यमुना किनारे स्थित लालपुर, घरबरा में खनन माफि या किसानों की भूमि पर पट्टे करा बालू का खनन करने में लगे हुए थे। उनके हाथ इतने बड़े थे कि तहसील से लेकर जिला स्तरीय अधिकारी भी हाथ डालने से बच रहे थे। परंतु शासन तक पहुंची शिकायत के बाद हरकत में आये प्रशासन ने कार्रवाई की तो फि लहाल एक सप्ताह से अवैध खनन बंद पड़ा है।
  ग्राम लालपुर रयैतपुर व घरबरा में खनन के छह पट्टे थे। गांव के कुछ किसानों ने अपनी भूमि को समतल करने के उद्देश्य से खनन विभाग से भूमि में एकत्रित बालू को हटाने और बेचने की अनुमति मांगी थी। अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि वे अपने खेतों से बालू को हटा सकते हैं। लेकिन इस कार्य में किसी भी मशीन का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित था। यह अनुमति लेने का खेल केवल कागजों भर में था। इसके पीछे जिले के आधा दर्जन सत्ताधारी राजनीतिक संरक्षण प्राप्त खनन माफिया लगे थे। कुछ दिन पूर्व शिकायत शासन तक पहुंची तो प्रशासन हरकत में आया। अपर जिलाधिकारी वित्त उदय सिंह टीम सहित मौके पर पहुंचे। उन्हें तय अनुमति से बहुत अधिक मात्रा में खनन मिला। एक रसूखदार के भट्टे पर बहुत मात्रा में बालू का स्टॉक मिला। उनके द्वारा दो पट्टाधारक किसानों पर लालपुर में 1 करोड़ 97 लाख तथा घरबरा में 1 करोड़ 38 लाख की पेनाल्टी भी लगाई गई है। इसके बाद से अब कागजों में खनन बंद करा दिया है। इसी वजह से यहां राजनीतिक दबाव न झेल पाए एसडीएम कुछ दिन के लिए बीमारी अवकाश पर चले गए। इसके चलते यहां नए एसडीएम की तैनाती कर दी गई है।


जिस स्थान पर खनन का पट्टा और भंडारण की अनुमति दी गई थी। उसी स्थान से बालू खनन कर भंडारण किया जा रहा है। गंगा से बालू नियमानुसार निकाली जा रही है। फिर भी यदि ठेकेदार नियम तोड़ रहे होंगे तो जांच कर कार्रवाई होगी। जनता को परेशानी नहीं होने देंगे। रहा सवाल पोकलैंड व लिफ्टर मशीनों का तो यह संभल में चल रही हैं। -ललित कुमार, एसडीएम अतरौली


 
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