World Radio Day: खामोश तरंगों का गूंजता इतिहास, जब सरहद पार चीन और दक्षिण एशिया तक सुनाई देती थी आवाज
आज 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस पर यह खामोशी उस गौरवशाली इतिहास की याद दिलाती है जब अलीगढ़ की आवाज सरहदों के पार गूंजती थी। अब यह केंद्र केवल एफएम विविध भारती के स्थानीय संचालन तक ही सीमित है।
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अलीगढ़ शहर की फिजाओं में आज भी वे ऊंचे टावर खामोश खड़े हैं, मानो अपने स्वर्णिम अतीत की कहानी कह रहे हों। एक समय था जब इन्हीं टावरों से उठती तरंगें चीन और दक्षिण एशिया तक भारत की आवाज पहुंचाती थीं।
ऑल इंडिया रेडियो का अलीगढ़ ट्रांसमिशन सेंटर न केवल तकनीकी दृष्टि से अहम था बल्कि यह भारत की कूटनीतिक और सांस्कृतिक पहुंच का भी सशक्त माध्यम रहा। 2021 में अंतरराष्ट्रीय प्रसारण बंद होने के साथ वह दौर थम गया और अब यह केंद्र महज एक रिले स्टेशन बनकर रह गया। आज 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस पर यह खामोशी उस गौरवशाली इतिहास की याद दिलाती है जब अलीगढ़ की आवाज सरहदों के पार गूंजती थी। अब यह केंद्र केवल एफएम विविध भारती के स्थानीय संचालन तक ही सीमित है। पुरानी मशीनें और वो ऐतिहासिक टावर आज भी उस दौर की गवाही दे रहे हैं।
उस दौर में यह केंद्र एशिया के अहम ट्रांसमिशन प्वाइंट्स में शुमार था जहां से प्रसारित कार्यक्रम भारत की नीतियों, संगीत और संस्कृति को सीमाओं के पार पहुंचाते थे। शॉर्टवेव की उन तरंगों पर देश की सॉफ्ट पावर भी सवार रहती थी। आज भले ही प्रसारण सिमट गया हो लेकिन टावरों की ऊंचाई और परिसर की खामोशी अब भी उस समय की गवाही देती है जब अलीगढ़ विश्व रेडियो मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र था।
यादों में खो गया रेडियो मार्केट
प्रत्येक महीने के आखिरी रविवार को प्रधानमंत्री का मन की बात कार्यक्रम प्रसारित होता है। इससे भी रेडियो के सुनने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। एफएम के आने से रेडियो की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। - विपिन कुमार, ब्रॉडकास्ट मैनेजर, अलीगढ़ रिले केंद्र
रेडियो के प्रति अलीगढ़ की दीवानगी का आलम यह था कि यहां रेडियो मार्केट नाम से एक पूरा बाजार है। जिसे मामू भांजा के नाम से जानते हैं। यह बाजार कभी रेडियो शौकीनों और मरम्मत करने वालों की भीड़ से गुलजार रहता था। आज डिजिटल क्रांति और स्मार्टफोन के दौर में वह बाजार केवल यादों में सिमट कर रह गया है। पुराने लोग आज भी उस बाजार की रौनक को याद कर भावुक हो जाते हैं। मैंने सन 1970 में मास्टर साउंड के नाम से रेडियो का काम शुरू किया। मेरे नाम के साथ ही मास्टर जुड़ गया। - मास्टर ओम प्रकाश, इलेक्ट्रोनिक्स कारोबारी