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Holi 2023: बाजारों में निकली मस्तानों की टोली, जमकर खूब खेली होली, तिरपाल से ढ़की गई शीशे वाली मस्जिद

Tue, 07 Mar 2023 07:21 PM IST
चमन शर्मा रिंकू शर्मा
रिंकू शर्मा Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 07 Mar 2023 07:21 PM IST
सार

बाजार में होली होने से पहले ही एतिहातन मस्जिदों को ढ़क दिया जाता है। अब्दुल करीम चौराहा स्थित शीशे वाली मस्जिद को होली से पहले ही तिरपाल व कपड़े से ढ़क दिया गया था। जिससे होली का रंग-गुलाल मस्जिद पर न पड़े।

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Mastan group came out in the markets played Holi fiercely
ऊपर कोर्ट के बाजार में होली खेलते हुए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलीगढ़ के बाजारों में होली खेली गई। जिसमें जमकर अबीर-गुलाल उड़ा। सौ साल से भी अधिक पुरानी परंपरा को निभाते हुए व्यापारियों ने जमकर टेसू के फूलों की होली खेली। दोपहर 12 बजे शुरू हुई ये होली शाम तक चली।

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विभिन्न जगहों पर बाजार में ठंडाई घुटी। होली के दौरान चौराहे, गलियों में जाम भी छलका। खास बात यह रही कि छुटपुट घटनाओं के बीच बाजार की होली शांतिपूर्वक रही। होली खेलने के लिए व्यापारी भाइयों ने एक दिन पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। सोमवार से बड़े-बड़े ड्रमों में अपनी दुकानों के बाहर टेसू के फूल भिगो दिये थे। होली खेलने के लिए हर बार की तरह इस बार भी नगर निगम ने पानी उपलब्ध कराया। सभी व्यापारियों ने बाजार बंद कर टेसू के फूलों से होली खेली। धूल वाले दिन सभी बाजार बंद रहते हैं।
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होली में मुस्लिम समाज के लोगों ने फूलों से किया स्वागत
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इसलिए व्यापारी एक दिन पहले ही होली खेलते हैं। बाजार से निकलने वालों पर हुरियारों ने खूब अबीर-गुलाल उड़ाया। कोई भी उनसे बच नहीं पाया। व्यापारी नेता प्रदीप गंगा ने बताया कि बाजार में होली खेलने की परंपरा करीब सौ सालों से भी ज्यादा पुरानी है। सभी व्यापारी भाई इसका पालन करते हैं। ट्रांसपोर्टर श्रीकिशन गुप्ता ने बताया कि बाजार की होली का अपना अलग ही आनंद है। हर जगह अबीर गुलाल उड़ता है और टेसू के फूलों से होली खेली जाती है। बाजारों में होली खेलने को लेकर शहर में जगह-जगह ड्रम रखे गए थे। जिसमें नगर निगम में पानी उपलब्ध कराया।

इन बाजारों में हुई होली
शहर के रेलवे रोड, अब्दुल करीम चौराहा, कनवरीगंज, छिपैटी, महावीरगंज, देहली गेट, बारहद्वारी, पड़ाव दुबे, मामू भांजा, मानिक चौक, हाथरस अड्डा, सराफा बाजार, सब्जी मंडी बाजार, खैर रोड, गूलर रोड आदि बाजारों में जमकर होली खेली गई।  


अब्दुल करीम चौराहे व्यापारियों की होली के दौरान मस्जिद को ढक दिया गया

तिरपाल से ढ़की गई शीशे वाली मस्जिद
बाजार में होली होने से पहले ही एतिहातन मस्जिदों को ढ़क दिया जाता है। अब्दुल करीम चौराहा स्थित शीशे वाली मस्जिद को होली से पहले ही तिरपाल व कपड़े से ढ़क दिया गया था। जिससे होली का रंग-गुलाल मस्जिद पर न पड़े। वहीं अगर कोई शरारती तत्व अगर मस्जिद की ओर रंग गुलाल फेंकता भी है तो वह तिरपाल और कपड़े तक ही सीमित रह जाए। बाजार का सबसे बड़ा कार्यक्रम होली का इसी अब्दुल करीम चौराहे पर होता है। हर साल व्यापारी इस चौराहे पर डीजे लगाते हैं। नाच गाना करते हैं और जमकर होली भी खेलते हैं।

खूब फटे कपड़े, फिर फेंके बिजली के तारों पर
बाजार की होली के दौरान युवकों ने एक दूसरे के फाड़ने की बहस छिड़ गई। फिर क्या था आपस में युवाओं ने अपने मित्रों के कपड़े फाड़ना शुरू कर दिया। बाद में उन कपड़ों को तारों पर लटका दिया। हालांकि इससे कोई विद्युत हादसा नहीं हुआ।

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