Aligarh News: सेंट्रल बैंक ब्रांच में ऐसे फर्जीवाड़ा कर रहे थे प्रबंधक और बैंक मित्र, कर रहे थे फर्जी एफडी
शुक्रवार को दिन भर चली जांच में सामने आया है कि बैंक प्रबंधक अमरजीत की तैनाती करीब दो वर्ष पहले हुई है। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से ग्राहकों के साथ फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। ग्राहकों पर पहले भरोसा जमाया जाता है।
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अलीगढ़ में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की नौरंगाबाद शाखा के बैंक मित्र के बैंक प्रबंधक की मिलीभगत से जो कारनामे सामने आ रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। किसी ग्राहक ने खाते में रुपये जमा कराने या ट्रांसफर करने को दिए तो वे हुए नहीं और फर्जी रसीद ग्राहक को दे दी गईं। इसी तरह किसी ग्राहक ने अगर एफडी करने को रुपये दिए तो उसे फर्जी एफडी की रसीद दे दी गई। मगर एफडी नहीं हुई। शुक्रवार को दिन भर चली जांच और सामने आए ग्राहकों ने यह सच सामने लाया। अब बैंक प्रबंधन इस मामले में जांच की बात कह रहा है।
ऐसे हुआ बैंक में फर्जीवाड़ा
शुक्रवार को दिन भर चली जांच में सामने आया है कि बैंक प्रबंधक अमरजीत की तैनाती करीब दो वर्ष पहले हुई है। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से ग्राहकों के साथ फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। ग्राहकों पर पहले भरोसा जमाया जाता है। फिर उनके रुपयों का लेनदेन अपने हाथ में लेकर किया जाता है। जैसे बड़े खातेधारकों को नॉन सीटीएस यानि ग्राहक को बैंक से मिलने वाली प्रिंट चेकबुक के बजाय मैन्युअल चेकबुक दे दी गई।
फिर जब कभी वह लेनदेन के लिए आया तो वह अपना चेक भरकर दे गया और उस चेक पर फर्जीवाड़ा किया। उसे फर्जी रसीद थमा दी गई। इसी तरह एफडीआर करने के नाम पर फर्जी रसीद थमा दी गईं और उस रुपये का प्रयोग अपने लिए किया गया। किसी ने आरटीजीएस करने को कहा तो उसको दिखाने को आरटीजीएस कर दिया और रकम का अपने लिए प्रयोग किया। इस तरह का खेल एक वर्ष से अधिक समय से चल रहा है। ग्राहक को फर्जी स्टेटमैंट दिया जा रहा है। अधिकांश ग्राहकों को तो मोबाइल पर संदेश ही नहीं जा रहे।
युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने अकेले मढ़ा डेढ़ करोड़ का आरोप
इस मामले में खुद बैंक मित्र सौरभ द्वारा छोड़े गए पत्र में आरोपी युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह व सुमित माथुर पक्ष की ओर से क्वार्सी थाने में तहरीर दी गई है। इस तहरीर के अनुसार उनकी फर्म निर्माण एजेंसी का काम करती है। उसके आधा दर्जन खाते इस बैंक में हैं और यह सबसे बड़े खाता धारक हैं। इसमें दो लिमिट खाते हैं। बैंक में मौजूद रहने वाले सौरभ गुप्ता ने उन पर विश्वास जमा लिया और उन्हें उनके खातों की नॉन सीटीएस चेकबुक दे दीं।
सीसीटीएस चेकबुक अपने पास रख लीं। वे उन चेक बुक को भरोसे में आरटीजीएस आदि किए गए। मगर वह रुपये किसी अन्य खाते में गए और हमको फर्जी रसीद दे थीं। इसके अलावा फर्जी स्टेटमैंट दिए गए हैं। साथ में हमारे पास मैसेज आने के बजाय खुद सौरभ के भाई व भाभी के मोबाइल पर मैसेज जाते थे। इस पूरे मामले में उनकी फर्म के सभी खातों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये गायब हैं। बाकी जांच की जा रही है। इसी मामले में मुकदमे के लिए तहरीर दी गई है। मुकेश सिंह का आरोप है कि रुपये वापसी का दबाव न बनाया जा सके। इससे बचने के लिए मुझ पर व सुमित पर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस मामले में जांच की बात कह रही है।
ग्राहकों के बोल
मेरे द्वारा पांच लाख रुपये की एफडी कराई गई थी। मगर आज अखबारों में खबर पढऩे के बाद उजागर हुआ है कि वह एफडी टूटी हुई है। रुपये खाते में नहीं हैं। मेरे द्वारा जीवन भर की पूंजी इस मामले में चली गई है। सौरभ को ही पूरा रुपया दिया गया था। -कुमकुम नौरंगाबाद
25 लाख रुपये की दो एफडी कराई गई थीं। मगर आज पता चला है कि उन एफडी के बदले जो कागज दिए गए थे, वे फर्जी हैं। व्यापारिक पूंजी को जमा किया गया था। सौरभ ने ही पूरा रुपया लिया था। -एसपी सारस्वत, संजय गांधी कालोनी
दो लाख रुपये की एफडी कराई गई थी। सौरभ को रुपया दिया गया था। अब पता चला है कि उसके बदले दिए गए कागज फर्जी हैं। पूरा रुपया डूब गया है। -मुरारी लाल, कुंदन नगर