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बीए तक नहीं पढ़ी थी अंग्रेजी, फिर लिख दी अंग्रेजी में किताब

Fri, 02 Apr 2021 01:02 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Apr 2021 01:02 AM IST
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man who not read english from graduation wrote a book in english
अबूजर खान शोध छात्र अरबी भाषा विभाग अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय - फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा, अलीगढ़।
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जिस व्यक्ति ने स्नातक स्तर तक कभी अंग्रेजी न पढ़ी हो, वही व्यक्ति सात आठ वर्षों के अपने अध्ययन के बाद अंग्रेजी में एक किताब लिख देता है और वह पसंद भी की जा रही है। इस काम को किया है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अरबी भाषा विभाग में शोध छात्र अबूजर खान ने। उनके द्वारा अंग्रेजी में लिखी गई एक सेल्फ हेल्प बुक 'कंट्रोल योर माइंड अनलॉक योर डेस्टिनी' ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर धूम मचा रही है। उनकी इस सफलता पर उनके सुपरवाइजर प्रोफेसर समी अख्तर सहित पूरे विभाग ने खुशी जताई है।
अबूजर खान मूल रूप से हरदोई के कस्बा रौदमई के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मदरसे में हुई। 2013 में उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बीए में प्रवेश लिया था। अंग्रेजी की कोई मजबूत पृष्ठभूमि न होने के बाद भी अंग्रेजी में किताब लिखने की शुरुआत की और सफलता हासिल की।
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अबूजर खान कहते हैं कि स्वयं को प्रेरित करने के लिए किताबों को लिखने की परंपरा आधुनिक पश्चिमी जगत में मिलती है। इनको सेल्फ हेल्प बुक्स कहते हैं। किताब लिखने के बाद उन्होंने अपने प्रकाशक की सहायता से इसको ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर सूचीबद्ध किया। जहां पाठकों ने इसको बहुत सराहा। अबूजर खान कहते हैं कि इस किताब में मानसिक शक्तियों को पहचान कर उनका सकारात्मक रूप से उपयोग करके अपने लक्ष्य को हासिल करने के कुछ सिद्धांत बताए गए हैं।
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मिस्र के बड़े साहित्यकार पर शोध कर रहे हैं अबूजर
अबूजर खान मिस्र के बहुत बड़े साहित्य आलोचक डॉ. मोहम्मद मंदूद पर शोध कार्य भी कर रहे हैं। मोहम्मद मंदूद ने अरेबिक शायरी की तनकीद (आलोचना) की एक नई शैली विकसित की, जिसको वहां के साहित्य में खूब प्रशंसा मिली। इसी पर अबूजर खान शोध कर रहे हैं। जिसमें उन्होंने अब तक यह पाया है कि भारतीय उपमहाद्वीप में शायरी की जो शैली पाई जाती है उसकी भी जड़ें कहीं न कहीं फारसी की ओर ही जाती हुई दिखाई देती हैं।
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