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अलीगढ़ : एकतरफा प्यार में दो बहनों की हत्या के दोषी को उम्रकैद की सजा

Fri, 13 May 2022 01:00 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 01:00 AM IST
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Man sentenced to life imprisonment for killing two sisters in One-sided love
पेशी के बाद सूरज को जेल ले जाती पुलिस । - फोटो : CITY OFFICE
एकतरफा प्यार में दो सगी बहनों पर चाकुओं से हमला और इलाज के दौरान दोनों की मौत के दोषी युवक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वर्ष 2014 में विष्णुपुरी इलाके में दिनदहाड़े हुई इस बहुचर्चित घटना में बृहस्पतिवार को एडीजे-12 सिद्धार्थ सिंह की अदालत ने फैसला सुनाया है। साजिश के आरोपी उसके पिता को बरी कर दिया है। खास बात यह है कि न्यायालय में दोनों बहनों का मृत्यु पूर्व बयान सजा का मजबूत आधार बना है, जबकि दोषी पक्ष द्वारा दर्ज कराए गए ऑनर किलिंग के मुकदमे और उससे संबंधित दलील को न्यायालय ने खारिज कर दिया।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी प्रमेंद्र कुमार जैन व वादी पक्ष के अधिवक्ता प्रवीण गुप्ता के अनुसार, घटना 25 दिसंबर 2014 की दोपहर 2 बजे की है। गांव भरतुआ निवासी प्रवेश कौशिक ने थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया था कि उसकी 23 वर्षीय बेटी शिखा उर्फ सरिता (गांव के बेसिक स्कूल में शिक्षा प्रेरक) और 20 वर्षीय रेनू (टीआर कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा) गांव से शिक्षा प्रेरक संबंधी काम से अलीगढ़ आई थीं, जब वे वरुण हॉस्पिटल के बगल से छर्रा अड्डा की ओर जा रही थीं, तभी उनके गांव के सूरज वाल्मीकि ने उन पर चाकुओं से हमला कर दिया और खुद की गर्दन रेत ली। इस दौरान गांव के दो व्यक्तियों ने जब यह घटना देखी तो प्रवेश कौशिक को सूचना दी।
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31 जनवरी 2015 को सरिता की दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मौत हो गई, जबकि 23 अक्तूबर 2015 को रेनू की भी मौत हो गई। पुलिस ने सरिता की मौत व पोस्टमार्टम के आधार पर मुकदमे में सूरज व उसके पिता मोहर सिंह के खिलाफ हत्या, हमला व साजिश की धाराओं में चार्जशीट दायर कर दी।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान कुल 19 गवाह पेश किए गए। साथ ही, सरिता के पुलिस को दिए गए धारा 161 के बयान और रेनू द्वारा न्यायालय को दिए गए 164 के बयान को मृत्यु पूर्व बयान माना गया, जिसमें यह साबित हुआ कि सूरज, सरिता पर एकतरफा प्यार में शादी का दबाव बनाता था। उसने यह प्रस्ताव मानने से इंकार कर दिया था। इसी रंजिश में उसने अपने पिता के इशारे व साजिश के तहत दोनों पर हमला किया और बाद में गुस्से में खुद को भी गर्दन पर चाकू मार चोट पहुंचाई। अदालत ने इसी आधार पर आरोपी सूरज को बुधवार को दोषी करार दिया और बृहस्पतिवार को सजा सुनाई। न्यायालय ने सूरज को उम्रकैद व 30 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है, जबकि साजिश के आरोपी उसके पिता को बरी कर दिया है।
दोषी की मां ने कराया था ऑनरकिलिंग का मुकदमा
जांच के दौरान पुलिस ने पाया था कि आरोपी ने दिनदहाड़े जब इस वारदात को अंजाम दिया, तब लोगों के पकड़े जाने और पिटाई के भय से उसने खुद की गर्दन पर चाकू से वार कर लिया था। इसके बाद लोगों ने उसे छुआ तक नहीं। बाद में जब इलाज के बाद उसकी तबीयत ठीक हो गई तो दोषी सूरज के बयान को आधार बनाकर सूरज की मां शीला देवी ने न्यायालय के आदेश पर ऑनर किलिंग का मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें कहा गया कि सरिता व सूरज में दोस्ती थी। इस दोस्ती व मेल-मिलाप के सरिता के परिजन खिलाफ थे। गुस्से में उन्होंने देख लेने की चेतावनी दी थी। इसी क्रम में सरिता के पिता, चाचा आदि नामजदों ने दोनों बेटियों और सूरज पर हमला किया। जिससे दोनों बहनों की मौत हो गई। 2016 में न्यायालय के आदेश पर दर्ज मुकदमे में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी। बाद में सत्र परीक्षण के दौरान इस मुकदमे को अदालत ने खारिज कर दिया।
- न्यायालय ने परिस्थितियों, मृत्यु पूर्व बयान, पुलिस के साक्ष्य आदि के आधार पर इस घटना में सूरज को दोनों बहनों की हत्या में सजा सुनाई है। हालांकि, हमारे स्तर से इस जघन्य अपराध में मृत्युदंड की मांग की गई थी। अदालत ने उम्रकैद से दंडित किया है। सूरज पक्ष की ओर से दिए गए ऑनर किलिंग के आरोप व मुकदमे को स्वीकार नहीं किया है।

- प्रमेंद्र कुमार जैन, एडीजीसी
न्यायालय की टिप्पणी
‘‘यदि वादी मुकदमा को ऑनर किलिंग (सम्मान रक्षा हेतु हत्या) करनी होती तो मृतका के परिवारीजन गांव या उसके पास ही किसी सुनसान स्थान पर करते, न कि शहर में आकर दिनदहाड़े दोपहर के 12 बजे इस प्रकार का कृत्य करते। इसके अतिरिक्त यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दोषी सूरज को एक मात्र चोट गर्दन के सामने आई है। यदि सूरज को मारना होता तो उसे भी चाकू से अनगिनत प्रहार कर मार सकते थे। परंतु उसके शरीर पर मात्र एक चोट आई है। अत: अभियोजन साक्ष्य से साबित हुआ है कि यह सूरज द्वारा एकतरफा प्यार में की गई घटना और खुद की गर्दन काटना है। यह ऑनर किलिंग (सम्मान रक्षा हेतु हत्या) स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है’’
दोनों बहनों के आईं ये चोटें : शिखा उर्फ सरिता को कंधा, पीठ, गर्दन, कूल्हा, जांघ, गला सिर पर गंभीर चोट। इसी तरह रेनू के हाथ व कंधा पर गंभीर चोटें आईं।
घटनाक्रम एक नजर में--
- 25 दिसंबर 2014 की दोपहर 12 बजे किया गया था हमला।
- 24 जनवरी 2015 तक दोनों का वरुण अस्पताल में इलाज चला।
- 31 जनवरी 2015 को दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में सरिता की मौत हो गई।
- 23 अक्तूबर 2015 को सेप्टिक से जख्मी रेनू की भी मौत हो गई।
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