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मथुरा में मिले मामा-भांजे, पढ़ाई से डरकर भागे थे
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दोनों बच्चों को परिजनों के हवाले करती अतरौली पुलिस
- फोटो : ATHROLI
कस्बे के पाली मार्ग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ने के लिए घर से निकलने के बाद लापता किशोरवय मामा-भांजे मथुरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर सात पर जीआरपी के हत्थे चढ़ गए। टीटीई व जीआरपी ने दोनों को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया। दोनों ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के डर की वजह से वह घर छोड़कर भागे थे और मुंबई जाना चाहते थे। चाइल्ड हेल्प लाइन ने मथुरा पहुंचे भानपाड़ा चौकी इंचार्ज रविंद्र सिंह व सिपाही रघुराज सिंह की मौजूदगी में दोनों को परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया।
थाना पालीमुकीमपुर के गांव नगला बाटुल निवासी किसान धीरेश यादव अपनी पत्नी ममता देवी व बच्चों के साथ अतरौली के मोहल्ला भानपाड़ा में किराए के मकान में रहते हैं। उनके दो बेटे दिव्यांशु कक्षा 9 व यश यादव कक्षा 6 में अतरौली के सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ते हैं। ममता देवी का भाई माधव यादव पुत्र देवेंद्र यादव भी उनके पास रहकर इसी स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ता है। शनिवार सुबह तीनों बच्चे स्कूल गए थे। स्कूल के निकट माधव व यश ने दिव्यांशु को स्कूल भेज दिया और खुद नगाइचपाड़ा नहर पुल पर कचौड़ी खाकर स्कूल आने की बात कह चले गए। इसके बाद वह स्कूल नहीं पहुंचे। इस बात पर परिजनों के होश उड़ गए। तभी से परिजन बच्चों को खोज रहे थे।
चार दिन पहले ही गांव से आया था माधव
बहन ममता के पास रहकर पढ़ाई करने वाला माधव यादव मूल रूप से एटा के गांव खंगारपुर का रहने वाला है। चार दिन पहले ही वह अपने गांव से आया था। परिवार वालों ने उसे करीब 600 रुपये भी दिए थे। यहां आकर रुपये उसने बहन को न देकर अपने पास ही रख लिए। इन्हीं रुपयों से उसने मुंबई जाने का प्लान बनाया। कचौड़ी खाने के बहाने दोनों छर्रा रोड पर पहुंचे। वहां से कासगंज की बस में बैठ गए। कासगंज से मथुरा की ट्रेन में। यहां बिना टिकट टीटीई ने दोनों को पकड़ लिया। कोतवाल राजीव सिरोही ने बताया कि दोनों बच्चों को परिवार की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।
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थाना पालीमुकीमपुर के गांव नगला बाटुल निवासी किसान धीरेश यादव अपनी पत्नी ममता देवी व बच्चों के साथ अतरौली के मोहल्ला भानपाड़ा में किराए के मकान में रहते हैं। उनके दो बेटे दिव्यांशु कक्षा 9 व यश यादव कक्षा 6 में अतरौली के सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ते हैं। ममता देवी का भाई माधव यादव पुत्र देवेंद्र यादव भी उनके पास रहकर इसी स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ता है। शनिवार सुबह तीनों बच्चे स्कूल गए थे। स्कूल के निकट माधव व यश ने दिव्यांशु को स्कूल भेज दिया और खुद नगाइचपाड़ा नहर पुल पर कचौड़ी खाकर स्कूल आने की बात कह चले गए। इसके बाद वह स्कूल नहीं पहुंचे। इस बात पर परिजनों के होश उड़ गए। तभी से परिजन बच्चों को खोज रहे थे।
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चार दिन पहले ही गांव से आया था माधव
बहन ममता के पास रहकर पढ़ाई करने वाला माधव यादव मूल रूप से एटा के गांव खंगारपुर का रहने वाला है। चार दिन पहले ही वह अपने गांव से आया था। परिवार वालों ने उसे करीब 600 रुपये भी दिए थे। यहां आकर रुपये उसने बहन को न देकर अपने पास ही रख लिए। इन्हीं रुपयों से उसने मुंबई जाने का प्लान बनाया। कचौड़ी खाने के बहाने दोनों छर्रा रोड पर पहुंचे। वहां से कासगंज की बस में बैठ गए। कासगंज से मथुरा की ट्रेन में। यहां बिना टिकट टीटीई ने दोनों को पकड़ लिया। कोतवाल राजीव सिरोही ने बताया कि दोनों बच्चों को परिवार की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।
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