world lung cancer day: डरा रहा कैंसर, जेएन मेडिकल कॉलेज में हर साल बढ़ रहे मरीज, ये हैं बचाव के उपाय
जेएन मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपी विभाग अध्यक्ष प्रो. अकरम खान ने बताया कि दुनियाभर में सबसे ज्यादा फेफड़े का कैंसर होता है, यदि भारत की बात करें तो यहां पर सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर के मरीज सामने आते हैं। मगर पिछले दो साल में यहां भी फेफड़े के कैंसर के मरीज बढ़े हैं।
विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में हर साल कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। साल 2023 में यह आंकड़ा 4245 तक पहुंच गया था, जबकि 2022 में यह संख्या 3167 थी। इसी तरह फेफड़े के कैंसर के मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, जो कि पिछले साल 351 थी। इनमें से 279 पुरुष और 72 महिलाएं हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक, फेफड़ों का कैंसर होने का मुख्य कारण धूम्रपान और वायु प्रदूषण है।
आज विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस है। जेएन मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अकरम खान ने बताया कि दुनियाभर में सबसे ज्यादा फेफड़े का कैंसर होता है, यदि भारत की बात करें तो यहां पर सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर के मरीज सामने आते हैं। मगर पिछले दो साल में यहां भी फेफड़े के कैंसर के मरीज बढ़े हैं। इसकी मुख्य वजह धूम्रपान और वायु प्रदूषण है। उन्होंने कहा कि कैंसर के चार स्टेज (चरण) होते हैं। लोग एडवांस्ड स्टेज यानी जिसे अंतिम चरण कहते हैं, तब यहां पर इलाज कराने आते हैं, उस स्थिति में सर्जरी की संभावनाएं बेहद कम होती हैं। यदि कैंसर के शुरुआती लक्षण वाले मरीज अपनी जांच कराएं तो उनके ठीक होने की संभावना काफी होती है।
ये है फेफड़ा कैंसर की स्थिति
वर्ष पुरुष महिला
2022 207 43
2023 279 72
नोट : साल 2024 में कैंसर मरीजों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।
ये हैं कैंसर के प्रमुख कारण
सिगरेट, बीड़ी, पान मसाला, तंबाकू, गुटका और शराब के सेवन से मुंह, गला, फेफड़ा, पेट, मूत्राशय और गुर्दे का कैंसर होता है। इसी तरह धुएं से पका भोजन, अधिक नमकयुक्त रखा हुआ खाना खाने, तले हुए खाद्य पदार्थ से बड़ी आंतों का कैंसर होता है।
महिला व पुरुष में होने वाला कैंसर
महिला : फेफड़ा, बच्चेदानी का मुंह, स्तन, मुंह, गला, गर्भाशय
पुरुष : मुंह, गला, फेफड़ा, भोजन नली, पेट, प्रोस्टेट ग्लैंड
ये हैं बचाव के उपाय
- प्रो. अकरम खान ने बताया कि कैंसर से बचाव के लिए सिगरेट, बीड़ी, पान मसाला, तंबाकू, गुटका, शराब का सेवन न करें। हरी सब्जी, फल, अनाज, दाल, पौष्टिक भोजन खाएं। शरीर में किसी भी अंग या हिस्से में गांठ होने पर तुरंत जांच कराएं।
- कैंसर विशेषज्ञ डॉ रचित माथुर का कहना है कि आमतौर पर लोगों की लापरवाही की वजह से उन्हें इस बीमारी का सामना करना पड़ता है और यदि शुरुआती चरण में लोग सजग हो जाएं तो उनको बचाया जा सकता है। सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी का कहना है कि दैनिक जीवन में संयमित खानपान, दिनचर्या में अनुशासन आदि जरूरी है। किसी भी तरह की बीमारी की वजह यही होती है।