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गांवों में बनाए जाएंगे कोविड केयर सेंटर, हेल्थ सेंटर और हॉस्पिटल
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कोरोना काल में ऑक्सीजन गैस को लेकर मची किल्लत के बीच राहत की खबर दो ओर से जिले के लिए आई है। एक तो जिले में अब कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। इसके चलते अब ऑक्सीजन गैस की किल्लत कुछ कम हो गई है। वहीं, जिला प्रशासन ने लखनऊ की एक संस्था को दीनदयाल अस्पताल और जिला अस्पताल में ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट लगाने का ठेका दिया है। इस संस्था को छह से आठ हफ्ते का समय प्लांट की स्थापना के लिए दिया गया है।
जिला प्रशासन की ओर से दीनदयाल और मलखान सिंह जिला अस्पताल में पीएम केयर फंड से ऑक्सीजन प्लांट लगाने की मंजूरी दे दी गई है। एक प्लांट पर करीब 72 लाख रुपये की लागत आर रही है। दोनों प्लांट को स्थापित कर चालू करने में करीब डेढ़ माह का समय लगने की प्रशासन के अधिकारी बात कह रहे हैं। तब तक जिले को बाहर से मिलने वाली ऑक्सीजन गैस और राधा गैस प्लांट, कासिमपुर से मिलने वाली सप्लाई के भरोसे ही रहना होगा।
जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि प्रशासन की ओर से पूरी प्रक्रिया कर ली गई है। लखनऊ की एक कंपनी का भी चयन कर लिया है। उसे काम सौंप दिया गया है। एक जनरेटर से 570 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। एक ऑक्सीजन जनरेटर की स्थापना पर करीब 72 लाख की धनराशि खर्च होगी। इससे सभी सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत खत्म हो जाएगी। कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक मारामारी आक्सीजन को लेकर ही सामने आई है। इसको व कोरोना की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए इस समस्या का समाधान किया जा रहा है।
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जिला प्रशासन की ओर से दीनदयाल और मलखान सिंह जिला अस्पताल में पीएम केयर फंड से ऑक्सीजन प्लांट लगाने की मंजूरी दे दी गई है। एक प्लांट पर करीब 72 लाख रुपये की लागत आर रही है। दोनों प्लांट को स्थापित कर चालू करने में करीब डेढ़ माह का समय लगने की प्रशासन के अधिकारी बात कह रहे हैं। तब तक जिले को बाहर से मिलने वाली ऑक्सीजन गैस और राधा गैस प्लांट, कासिमपुर से मिलने वाली सप्लाई के भरोसे ही रहना होगा।
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जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने बताया कि प्रशासन की ओर से पूरी प्रक्रिया कर ली गई है। लखनऊ की एक कंपनी का भी चयन कर लिया है। उसे काम सौंप दिया गया है। एक जनरेटर से 570 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। एक ऑक्सीजन जनरेटर की स्थापना पर करीब 72 लाख की धनराशि खर्च होगी। इससे सभी सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत खत्म हो जाएगी। कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक मारामारी आक्सीजन को लेकर ही सामने आई है। इसको व कोरोना की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए इस समस्या का समाधान किया जा रहा है।
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