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लंदन की नौकरी छोड़ पाली हाउस में उगाए उम्मीद के फूल

Sat, 24 Mar 2018 02:06 AM IST
आशीष निगम न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
आशीष निगम न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़ Updated Sat, 24 Mar 2018 02:06 AM IST
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London's job leaves the hope of growing flowers in the Pali House
खैर के घरबरा गांव में बना पॉली हाउस - फोटो : अमर उजाला
कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करने और एचसीएल कंपनी में लंदन तक जॉब करने के बाद जब सुकून नहीं मिला तो खेती की ओर रुख किया और दो साल में एक पॉली हाउस बना कर नई पहल की। 
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ये कहानी है पूर्व विधायक प्रमोद गौड़ के बेटे प्रभाकर गौड़ की। उन्होंने खैर के घरबरा गांव में अपनी पैतृक जमीन पर 58 लाख रुपये की लागत से पॉली हाउस बना कर उसमें जरबेरा के सजावटी फूलों की खेती शुरू कर दी है। ये प्रोजेक्ट उनके भाई ब्लाक प्रमुख खैर दिवाकर गौड़ की पत्नी सौम्या गौड़ के नाम से है। प्रभाकर की तरह ही अन्य उच्च शिक्षित युवा भी इस ओर मुड़ रहे हैं।
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जानकारों की राय में इस किस्म की खेती में एक साल में कम से कम 6 से 7 लाख और अधिकतम 16 से 20 लाख रुपये तक की आय हो सकती है। 4000 वर्गमीटर के पॉलीहाउस में रोजाना दो से ढाई हजार जरबेरा का फूल होता है, जिसकी सीजन में 9 रुपये प्रति फूल के हिसाब से बिक्री होती है। इस खेती में अर्नामेंटल फूल जरबेरा, ग्लेडूलाई, गुलाब, खीरा, शिमला मिर्च, ऑफ सीजन की महंगी सब्जियां, औषधि उगा कर किसान नई इबारत लिख रहे हैं। प्रभाकर कहते हैं कि पहला प्रयोग सफल रहा तो वह इसे और आगे बढ़ाएंगे।
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पॉली हाउस क्या है..?
पॉली हाउस खेत पर ही एक ढांचानुमा रचना होती है, जो तापमान को नियंत्रित कर उगाई जाने वाली फसल के अनुकूल माहौल बना देता है। इसके लिए खेत की जमीन पर जगह-जगह कंक्रीट की नींव पर एक स्टील के फ्रेम का ढांचा खड़ा किया जाता है। जिसे पॉलीशीट से कवर कर उस पर एक हवादार नेट अलग से लगाया जाता है। इसमें ट्यूबवेल की मदद से टपक सिंचाई होती है। इसके बाद विशेषज्ञों की राय पर फसल उगाई जाती है। 

27 और 28 को होगी संगोष्ठी 
आगामी 27 और 28 मार्च को पॉलीहाउस निर्माण और टपक सिंचाई प्रबंधन पर मंडलीय गोष्ठी नकवी पार्क में सुबह दस बजे से होगी। जिसमें किसानों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का अनुरोध किया गया है। नवागत मंडलायुक्त अजयदीप सिंह यहां किसानों को संबोधित करेंगे। 

दो और पॉली हाउस बन रहे हैं.. पांच का आवेदन है
गोंडा ब्लाक के गांव कैथवारी में सतीश कुमार तोमर सब्जियों के लिए पॉली हाउस बना रहे हैं। इसी गांव में अनीता सिंह भी 4000 वर्गमीटर का पॉली हाउस बना कर नये तरीके से खेती करेंगी। इसके साथ ही जिले में पांच और आवेदन हैं, जिस पर काम होना है। जिले में सबसे पहले दो पॉली हाउस हार्टीकल्चर बोर्ड ने स्थापित कराए थे। 

आवेदन
कम से कम 500 वर्गमीटर से लेकर अधिकतम 4000 वर्गमीटर में पॉली हाउस बने तो सरकारी सब्सिडी मिलती है
एक जिले से एक वित्तीय वर्ष में कई आवेदन हो सकते हैं इसकी संख्या निर्धारित नहीं है, शासन स्तर पर सब्सिडी का फैसला होता है
अर्नामेंटल फूल, सब्जियां, औषधि उगाने के लिए पॉली हाउस एक बेहतर विकल्प बनते जा रहे हैं, तेजी से बढ़ रहा है इसका चलन
सब्सिडी वाले पॉली हाउस को कम से कम 10 से 12 साल तक चलाना अनिवार्य, पहले के दो तीन साल तक फसल भी तय होती है
जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में इसके लिए आवेदन किया जाता है, शासन से मंजूर होने के बाद सब्सिडी मिलती है।

अलीगढ़ में इन लोगों ने बनाए पॉली हाउस
सौम्या गौड़ ने खैर के घरबरा में 4000 वर्गमीटर में पॉली हाउस बनाया, जहां जरबेरा फूल हो रहा है। कुल 58 लाख रुपये लागत पर सरकार 29.04 लाख रुपये की सब्सिडी देगी।
तान्या सिंह ने गोंडा ब्लाक के गिंडोरा गांव में 4000 वर्गमीटर में पॉली हाउस बनाया, यहां लिलियम फूल पैदा हो रहा है। 50.80 लाख की लागत पर 24.04 लाख रुपये सब्सिडी मिलेगी।
सुरजन सिंह ने जट्टारी में 2000 वर्गमीटर का पॉली हाउस 20.60 लाख रुपये से बनाया है, उन्हें 10.30 लाख रुपये सब्सिडी मिलेगी। उन्होंने कई तरह की शिमला मिर्च उगाई है।
ऋषिपाल सिंह ने अतरौली के गांव कल्यानपुर में 4000 वर्गमीटर का पॉली हाउस बनाया। 58 लाख रुपये की लागत पर उन्हें 29 लाख रुपये मिलेंगे। उन्होंने खीरे का उत्पादन शुरू किया है।

सुनील मक्कड़ ने याकूदपुर धनीपुर ब्लाक में 4000 वर्गमीटर में जरबेरा फूल उगाया है। 50.68 लाख की लागत पर उन्हें 23.34 लाख रुपये की सब्सिडी मिलनी है।  

 
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