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मौत को चकमा देकर निकल आई जिंदगी

Thu, 24 Aug 2017 02:17 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Thu, 24 Aug 2017 02:17 AM IST
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Life came out by dodging death
कैफियात एक्सप्रेस के हादसे को बयां करते यूनुस व उनका बेटा नादिर। - फोटो : अमर उजाला
इकराम वारिस 
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‘मैं महफूज हूं। आपसे गुफ्तगू कर रहा हूं। यह सब मुमकिन हो सका है, तो सिर्फ दुआओं से’। अपनों से मिलकर वह भावुक हो रहे थे। यह उस शख्स के बोल हैं, जो कैफियात एक्सप्रेस में सवार था। यही ट्रेन रात में औरैया जिले के अछल्दा-पाता रेलवे स्टेशन के बीच डंफर से टकरा गई और दुर्घटनाग्रस्त हो गई। 

शहर के देहलीगेट निवासी यूनुस अहमद (61) के चेहरे पर खौफ को आसानी से पढ़ा जा सकता था। हादसे के बारे जब बोलना शुरू किया तो उनके लहजों में थरथराहट सी आ गई। बकौल यूनुस, ‘अपने बेटे नादिर (28) के साथ कैफियात में लखनऊ से अलीगढ़ के लिए सवार हुआ।
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बी-1 बोगी में उनकी सीट 23 व 24 थी। वह लखनऊ में रिश्तेदार के यहां से लौट रहे थे। रात तकरीबन पौने तीन बजे अचानक धड़-धड़ की तेज आवाज आने लगी। बोगी में सामान गिरने लगे। एक पल लगा कि ट्रेन पटरी से उतरकर खेत-खलिहान में चली गई है। सबकी आंखों की नींद उड़ चुकी थी।
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यकायक सब गेट की तरफ भागे। मैं भी भागा तो देखा। चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा। मोबाइल की रोशनी में नीचे उतरकर देखा तो आगे के डिब्बे पटरी से उतरे हैं। उजाले और राहत-बचाव दल का इंतजार सब के सब मुसाफिर करने लगे। उजाला होते ही आला अफसर भी पहुंचने लगे।

प्रशासन ने एंबुलेंस से भिजवाया। एंबुलेंस से औरैया जिले के हॉस्पिटल पहुंचा। फिर, बस से इटावा, आगरा और दोपहर तीन बजे अपने घर पहुंच गया। उन्हें और बेटे को देखकर घर वालों ने बलाइयां लीं। घर पहुंचते ही अल्लाह का शुक्रिया अदा किया’। नादिर से जब रेल हादसे के बारे में पूछा गया तो वह बोलना कुछ और चाहते थे। मगर, जुबां से कुछ और निकल रहा था। उधर, घायलों में अनुपम, रॉकी, सतीश कुमार, सिराज अहमद सहित दस अन्य लोग शामिल हैं। 

सिटी स्कूल के छात्र से नहीं हो पा रहा संपर्क 
 कैफियात एक्सप्रेस से आ रहे सिटी स्कूल के छात्र से संपर्क नहीं होने के कारण उसके साथी एवं एएमयू प्रॉक्टोरियल टीम की चिंता बढ़ गई है। मोबाइल पर छात्र से संपर्क नहीं हो पा रहा है। एएमयू प्रॉक्टोरियल टीम के आग्रह पर छात्र का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाने की बात कही जा रही है। ताकि छात्र के बारे में जानकारी प्राप्त हो सके।
दुर्घटना की सूचना के बाद सुबह एएमयू प्रॉक्टोरियल टीम के सदस्य रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। दरअसल अभी एएमयू में नए सत्र का शुभारंभ हुआ है और छात्र-छात्राओं के आने का सिलसिला जारी है। आजमगढ़ एवं उसके आसपास के क्षेत्र के बहुत से छात्र एएमयू में पढ़ते है। एएमयू प्रॉक्टर प्रो. एम मोहसिन खान ने बताया कि फिरोज नामक छात्र ने बताया कि सिटी स्कूल में पढ़ने वाला उसका साथी कैफियात एक्सप्रेस से अलीगढ़ आ रहा था। सुबह दुर्घटना की सूचना के बाद छात्र ने प्रॉक्टोरियल टीम को जानकारी दी। उसके मोबाइल नंबर पर संपर्क नहीं हो पा रहा है। प्रॉक्टर ने बताया कि एसएसपी से बात की गई है। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी दूसरे छात्र या शिक्षक के दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन में होने की सूचना उनके पास नहीं है। 


अलीगढ़ से वापस हो गई दुर्घटना राहत ट्रेन 
कैफियात एक्सप्रेस हादसे में घायल मुसाफिरों की मदद करने, उन्हें प्राथमिक उपचार देने के लिए रेलवे अधिकारियों ने दिल्ली से सेल्फ प्रोप्रेल्ड पर्यवेक्षक यान बुलाया था। इसमें मेडिकल सेवाएं देने की सारी व्यवस्थाएं थीं। सुबह छह बजे से ग्यारह बजे तक ये यान अलीगढ़ स्टेशन के सात नंबर ट्रैक पर खड़ा रहा। इसको आगे जाने का रास्ता नहीं मिला तो वापस दिल्ली रवाना कर दिया गया। पहले इसको तीन नंबर प्लेटफार्म से दुर्घटनास्थल पाता रेलवे स्टेशन भेजने की तैयारी थी। सुबह छह बजे ये यान अलीगढ़ आ गया था। दिल्ली से इसको चार बजे सुबह रवाना किया गया था। लेकिन इस बीच जीएम स्पेशल ट्रेन पाता स्टेशन के लिए रवाना हुई तो इसको सात नंबर पर खड़ा कर दिया गया। उसके बाद इसको चलाने का नंबर ही नहीं आया। बाद में ये ट्रेन वापस दिल्ली भेज दी गई।  
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