फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Left government job, made village children officers

Guru Purnima: खुद सरकारी नौकरी छोड़ी, गांव के बच्चों को बना दिया अधिकारी

Sun, 21 Jul 2024 04:40 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 21 Jul 2024 04:40 PM IST
सार

गोंडा ब्लॉक के गांव मजूपुर के निवासी स्वामी रामशरण ने लेखपाल की नौकरी छोड़ दी। टप्पल क्षेत्र के गांव उसरह रसूलपुर आकर पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने लगे। उनके पढ़ाए तमाम छात्र आज एक से बढ़कर एक बड़े पद पर अधिकारी हैं।
 

विज्ञापन
Left government job, made village children officers
गुरु स्वामी राम सरन भैया के साथ छाता लेकर चलते गेल इंडिया के डायरेक्टर शेर सिंह - फोटो : स्वयं

विस्तार

गुरु त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति होते हैं। 93 वर्षीय स्वामी रामशरण भैया ऐसा ही एक उदाहरण हैं। उन्होंने गांव के बच्चों को शिक्षित करने के लिए लेखपाल की नौकरी छोड़ दी। उनके पढ़ाए तमाम छात्र आज डॉक्टर, इंजीनियर और आला अधिकारी हैं।

विज्ञापन


स्वामी रामशरण मूलरूप से गोंडा ब्लॉक के गांव मजूपुर के निवासी हैं। उनका जन्म वर्ष 1931 में हुआ था। आजादी के समय क्रांतिकारियों के संपर्क में भी रहे। देश आजाद हुआ तो लेखपाल बन गए, पर नौकरी में मन नहीं लगा। वर्ष 1960 में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी। टप्पल क्षेत्र के गांव उसरह रसूलपुर आकर पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने लगे। इस बीच उन्होंने अपने घर से भी किनारा कर लिया।
विज्ञापन


इसके कुछ वर्ष बाद 1972 में टप्पल क्षेत्र के ही गांव जलालपुर आ गए। यहां पर उन्होंने एक बरगद का पौधा लगाया और समय गुजरने के साथ ही इसकी छांव में बच्चों को पढ़ाते रहे। आज यह वट वृक्ष 52 वर्ष का हो चुका है। करीब डेढ़ सौ बच्चे रोजाना यहां पढ़ते हैं। उनके खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए कुछ बच्चे अपने घर से एक दो-रोटी अधिक लाते हैं। उन्होंने टप्पल क्षेत्र के गांव दमुआका, प्रेमपुर, इतवारपुर आदि गांवों में स्वच्छता की अलख भी जगाई।
विज्ञापन
विज्ञापन


गेल के डायरेक्टर बोले.. बदल दी जिंदगी
स्वामी रामशरण के शिष्य और गेल इंडिया के डायरेक्टर शेर सिंह बताते हैं कि तकरीबन 40 वर्ष पूर्व गुरुजी ने उन्हें भी पांचवीं तक पढ़ाया है। वह बच्चों से बहुत स्नेह करते थे। वह कहते थे कि तुम लोगों के लिए ही हमने घर परिवार और अपनी सरकारी नौकरी तक छोड़ दी। यदि पढ़ाई नहीं करोगे तो मेरी सारी तपस्या बर्बाद हो जाएगी। शेर सिंह कहते हैं कि उन्होंने हजारों बच्चों को पढ़ाया है, जो उच्च पदों पर तैनात हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed