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सरकारी अस्पताल ‘बीमार’, बरामदे में बच्चों का इलाज
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तेज धूप उमस भरी गर्मी के कारण उल्टी, दस्त, बुखार से परेशान बच्चों का मलखान सिंह जिला अस्पताल के बच्
- फोटो : CITY OFFICE
मलखान सिंह जिला अस्पताल और पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय डॉक्टरों व स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। 300 बेड का दीनदयाल चिकित्सालय सिर्फ 18 डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है, यहां पर 71 पद चिकित्सकों के हैं। डॉक्टरों की कमी के चलते सिर्फ 127 बेड पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
चिकित्सालय का 34 बेड का आईसीयू चार डॉक्टरों के हवाले है। वहीं, मलखान सिंह जिला अस्पताल में 240 बेड हैं। यहां पर सिर्फ 37 चिकित्सक ही तैनात हैं। बच्चा वार्ड भरने के कारण बरामदे में इलाज किया जा रहा है।
जिला अस्पताल : स्टाफ नर्स न होने से आठ नंबर वार्ड पर लटका ताला
मलखान सिंह जिला अस्पताल 240 बेड का है। प्रतिदिन 1500 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। करीब 200 बेड पर मरीज भर्ती हैं। 19 नर्स के जिम्मे नौ वार्ड हैं। इनमें से दो ऑपरेशन थिएटर में तैनात हैं। इसके अलावा, अस्पताल में 60 में से 37 डॉक्टर उपलब्ध हैं।
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चार इमरजेंसी, दो सर्जरी, एक मेडिसिन, दो थर्मोलॉजिस्ट, दो एनेस्थेटिक्स, एक पीडियाट्रिक, एक ऑर्थोपेडिक सर्जन, एक ईएनटी सर्जन, एक के पास ईएमओ का प्रभार है। पीडियाट्रिक चिकित्सक बी लाल इसी महीने रिटायर्ड हो रहे हैं। अस्पताल में हड्डी विशेषज्ञ नहीं है। 26 बेड का आठ नंबर वार्ड स्टाफ नर्स न होने की वजह से बंद है। बच्चा वार्ड में 30 बेड हैं।
इन 30 बेड पर 48 बच्चों का इलाज चल रहा है। दस बच्चों का इलाज बाहर बरामदे में हो रहा है। अस्पताल में कुल 32 स्टाफ नर्स थीं, जिनमें से 16 को सीएमओ दफ्तर से संबद्ध कर दिया गया है। अभी हाल ही में तीन नर्स को अस्पताल में भेजा गया तो पांच नंबर आइसोलेशन वार्ड शुरू हो पाया है।
दीनदयाल चिकित्सालय : बेड भरे होने पर नए मरीज नहीं होते भर्ती
- कोरोना काल में दीनदयाल चिकित्सालय को 300 बेड का अस्पताल घोषित किया गया था, लेकिन मानव संसाधन 100 बेड के सापेक्ष भी नहीं है। 127 बेड पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। बेड भरे होने पर नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। 34 बेड के आईसीयू में 12 एनेस्थेटिक चिकित्सक और 12 मेडिकल ऑफिसर होने चाहिए।
वर्तमान में चार मेडिकल ऑफिसर और एक एनेस्थैटिक चिकित्सक है। इस कारण सिर्फ 10 बेड पर ही मरीजों को भर्ती किया जाता है। चिकित्सालय में 300 स्टाफ नर्स में से 48 की तैनाती है, जबकि 71 चिकित्सकों के सापेक्ष 18 चिकित्सक काम कर रहे हैं। इन्हीं पर भर्ती मरीजों व प्रतिदिन की करीब दो हजार मरीजों की ओपीडी और इमरजेंसी का जिम्मा है।
चिकित्सालय में चेस्ट फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, स्किन, सर्जन, ईएनटी सर्जन, अधीक्षक और एनेस्थेटिक, 24 फार्मासिस्ट और छह चीफ फार्मासिस्ट की दरकार है। आउटसोर्स पर 72 कर्मचारी काम कर रहे हैं।
48 वेंटिलेटर फांक रहे धूल
- कोरोना काल में दीनदयाल चिकित्सालय को 48 वेंटिलेटर दिए गए थे। इनको चलाने के लिए ईसीजी टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय आदि की जरूरत पड़ती है। स्टाफ की कमी के चलते वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। लाखों रुपयों की मशीनें किसी काम में नहीं आ रही हैं।
- मानव संसाधन की अस्पताल में काफी कमी है। इसके बावजूद सुबह ओपीडी से वार्ड तक हर स्टाफ मेहनत कर रहा है। उच्चाधिकारियों से स्टाफ की कई बार मांग कर चुके हैं। - डॉ. सुधीर वर्मा, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल।
- मरीजों के हिसाब से पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इसी स्टाफ के सहारे व्यवस्थाएं बेहतर बना रहे हैं। प्रयास रहता है कि मरीजों को किसी प्रकार की समस्या न होने पाए। -डॉ. अनुपम भास्कर, सीएमएस दीनदयाल अस्पताल।
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चिकित्सालय का 34 बेड का आईसीयू चार डॉक्टरों के हवाले है। वहीं, मलखान सिंह जिला अस्पताल में 240 बेड हैं। यहां पर सिर्फ 37 चिकित्सक ही तैनात हैं। बच्चा वार्ड भरने के कारण बरामदे में इलाज किया जा रहा है।
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जिला अस्पताल : स्टाफ नर्स न होने से आठ नंबर वार्ड पर लटका ताला
मलखान सिंह जिला अस्पताल 240 बेड का है। प्रतिदिन 1500 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। करीब 200 बेड पर मरीज भर्ती हैं। 19 नर्स के जिम्मे नौ वार्ड हैं। इनमें से दो ऑपरेशन थिएटर में तैनात हैं। इसके अलावा, अस्पताल में 60 में से 37 डॉक्टर उपलब्ध हैं।
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चार इमरजेंसी, दो सर्जरी, एक मेडिसिन, दो थर्मोलॉजिस्ट, दो एनेस्थेटिक्स, एक पीडियाट्रिक, एक ऑर्थोपेडिक सर्जन, एक ईएनटी सर्जन, एक के पास ईएमओ का प्रभार है। पीडियाट्रिक चिकित्सक बी लाल इसी महीने रिटायर्ड हो रहे हैं। अस्पताल में हड्डी विशेषज्ञ नहीं है। 26 बेड का आठ नंबर वार्ड स्टाफ नर्स न होने की वजह से बंद है। बच्चा वार्ड में 30 बेड हैं।
इन 30 बेड पर 48 बच्चों का इलाज चल रहा है। दस बच्चों का इलाज बाहर बरामदे में हो रहा है। अस्पताल में कुल 32 स्टाफ नर्स थीं, जिनमें से 16 को सीएमओ दफ्तर से संबद्ध कर दिया गया है। अभी हाल ही में तीन नर्स को अस्पताल में भेजा गया तो पांच नंबर आइसोलेशन वार्ड शुरू हो पाया है।
दीनदयाल चिकित्सालय : बेड भरे होने पर नए मरीज नहीं होते भर्ती
- कोरोना काल में दीनदयाल चिकित्सालय को 300 बेड का अस्पताल घोषित किया गया था, लेकिन मानव संसाधन 100 बेड के सापेक्ष भी नहीं है। 127 बेड पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। बेड भरे होने पर नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। 34 बेड के आईसीयू में 12 एनेस्थेटिक चिकित्सक और 12 मेडिकल ऑफिसर होने चाहिए।
वर्तमान में चार मेडिकल ऑफिसर और एक एनेस्थैटिक चिकित्सक है। इस कारण सिर्फ 10 बेड पर ही मरीजों को भर्ती किया जाता है। चिकित्सालय में 300 स्टाफ नर्स में से 48 की तैनाती है, जबकि 71 चिकित्सकों के सापेक्ष 18 चिकित्सक काम कर रहे हैं। इन्हीं पर भर्ती मरीजों व प्रतिदिन की करीब दो हजार मरीजों की ओपीडी और इमरजेंसी का जिम्मा है।
चिकित्सालय में चेस्ट फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, स्किन, सर्जन, ईएनटी सर्जन, अधीक्षक और एनेस्थेटिक, 24 फार्मासिस्ट और छह चीफ फार्मासिस्ट की दरकार है। आउटसोर्स पर 72 कर्मचारी काम कर रहे हैं।
48 वेंटिलेटर फांक रहे धूल
- कोरोना काल में दीनदयाल चिकित्सालय को 48 वेंटिलेटर दिए गए थे। इनको चलाने के लिए ईसीजी टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय आदि की जरूरत पड़ती है। स्टाफ की कमी के चलते वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। लाखों रुपयों की मशीनें किसी काम में नहीं आ रही हैं।
- मानव संसाधन की अस्पताल में काफी कमी है। इसके बावजूद सुबह ओपीडी से वार्ड तक हर स्टाफ मेहनत कर रहा है। उच्चाधिकारियों से स्टाफ की कई बार मांग कर चुके हैं। - डॉ. सुधीर वर्मा, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल।
- मरीजों के हिसाब से पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इसी स्टाफ के सहारे व्यवस्थाएं बेहतर बना रहे हैं। प्रयास रहता है कि मरीजों को किसी प्रकार की समस्या न होने पाए। -डॉ. अनुपम भास्कर, सीएमएस दीनदयाल अस्पताल।