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जेएन मेडिकल कॉलेज में खामियां, मान्यता रद करने की चेतावनी
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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के जवाहरलाल नेहरु (जेएन) मेडिकल कॉलेज में तमाम कमियां मिली हैं। इन खामियों को तीन महीने के अंदर दूर न करने पर मान्यता रद करने की चेतावनी जारी कर दी है। चिकित्सा आयोग की इस रिपोर्ट के बाद मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों में खलबली मची हुई हैं और बताई गई खामियों को दूर करने में विभागों के अध्यक्ष जुट गए हैं ।
एएमयू प्रशासन ने सितंबर 2021 में जेएन मेडिकल कॉलेज में शैक्षिक सत्र 2022-23 के लिए एमबीबीएस सीटों की संख्या 150 से बढ़ाकर 200 करने के लिए एनएमसी में आवेदन किया था। उनके आवेदन पर अंतिम निर्णय लेने से पूर्व एनएमसी की टीम 8 जुलाई 2022 को मेडिकल कॉलेज में आई थी। इस टीम ने निरीक्षण के बाद जो रिपोर्ट दी, वह काफी चौंकाने वाली है।
जिसमें तमाम कमियाों का जिक्र किया गया है। इन कमियों के आधार पर चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) की समिति ने 50 सीटें न बढ़ाने की संस्तुति भी कर दी है। साथ में यह भी कहा है कि अगर इन कमियों को तीन महीने में दूर नहीं किया गया तो एमबीबीएस की सीटें कम करने के साथ-साथ कॉलेज की मान्यता रद भी की जा सकती है।
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एमएआरबी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में 16 फीसदी फैकल्टी की कमी है। सीनियर रेजिडेंट्स 46.2 फीसदी हैं। एनाटॉमी में 5 ट्यूटर, फिजियोलॉजी में 4 ट्यूटर, बायो-केमिस्ट्री 2 ट्यूटर और कम्युनिटी मेडिसिन में 4 ट्यूटर तथा सामान्य चिकित्सा में 3 एसोसिएट प्रोफेसरों की कमी है।
6 सहायक प्रोफेसर और 3 सीनियर रेजिडेंट, बाल रोग विभाग में 1 एसोसिएट प्रोफेसर, 4 असिस्टेंट प्रोफेसर और 1 ट्यूटर, जनरल सर्जरी में 6 असिस्टेंट प्रोफेसर, 4 सीनियर रेजिडेंट, ऑर्थोपेडिक्स में 2 एसोसिएट प्रोफेसर, 3 असिस्टेंट प्रोफेसर, ईएनटी में 1 एसोसिएट प्रोफेसर, 1 सीनियर रेजिडेंट्स, ओफ्थाल्मोलो में सीनियर रेजिडेंट ओबीजी में 3 सीनियर रेजिडेंट्स, रेडियो-डायग्नोसिस में 2 सीनियर रेजिडेंट्स की कमी है। एनएमसी की रिपोर्ट के बाद एएमयू के अधिकारियों में बेचैनी बढ़ गई है।
ये भी हैं कमियां
-75 फीसदी बेड, जांच मशीन की कमी, जांच रिपोर्ट देने में देरी, हर आईसीयू में 15 बेड होने चाहिए, लेकिन कॉलेज में केवल 10 बेड। ब्लड बैंक का पंजीकरण मार्च 2022 में निरस्त हो चुका है फिर भी ब्लड बैंक चालू है। हाजिरी का रखरखाव नहीं है। चिकित्सा अधीक्षक में प्रशासनिक अनुभव और योग्यता नहीं, मेडिकल कॉलेज के डीन के पास पंजीकृत स्नातकोत्तर योग्यता भी नहीं हैं।
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एएमयू प्रशासन ने सितंबर 2021 में जेएन मेडिकल कॉलेज में शैक्षिक सत्र 2022-23 के लिए एमबीबीएस सीटों की संख्या 150 से बढ़ाकर 200 करने के लिए एनएमसी में आवेदन किया था। उनके आवेदन पर अंतिम निर्णय लेने से पूर्व एनएमसी की टीम 8 जुलाई 2022 को मेडिकल कॉलेज में आई थी। इस टीम ने निरीक्षण के बाद जो रिपोर्ट दी, वह काफी चौंकाने वाली है।
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जिसमें तमाम कमियाों का जिक्र किया गया है। इन कमियों के आधार पर चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) की समिति ने 50 सीटें न बढ़ाने की संस्तुति भी कर दी है। साथ में यह भी कहा है कि अगर इन कमियों को तीन महीने में दूर नहीं किया गया तो एमबीबीएस की सीटें कम करने के साथ-साथ कॉलेज की मान्यता रद भी की जा सकती है।
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एमएआरबी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में 16 फीसदी फैकल्टी की कमी है। सीनियर रेजिडेंट्स 46.2 फीसदी हैं। एनाटॉमी में 5 ट्यूटर, फिजियोलॉजी में 4 ट्यूटर, बायो-केमिस्ट्री 2 ट्यूटर और कम्युनिटी मेडिसिन में 4 ट्यूटर तथा सामान्य चिकित्सा में 3 एसोसिएट प्रोफेसरों की कमी है।
6 सहायक प्रोफेसर और 3 सीनियर रेजिडेंट, बाल रोग विभाग में 1 एसोसिएट प्रोफेसर, 4 असिस्टेंट प्रोफेसर और 1 ट्यूटर, जनरल सर्जरी में 6 असिस्टेंट प्रोफेसर, 4 सीनियर रेजिडेंट, ऑर्थोपेडिक्स में 2 एसोसिएट प्रोफेसर, 3 असिस्टेंट प्रोफेसर, ईएनटी में 1 एसोसिएट प्रोफेसर, 1 सीनियर रेजिडेंट्स, ओफ्थाल्मोलो में सीनियर रेजिडेंट ओबीजी में 3 सीनियर रेजिडेंट्स, रेडियो-डायग्नोसिस में 2 सीनियर रेजिडेंट्स की कमी है। एनएमसी की रिपोर्ट के बाद एएमयू के अधिकारियों में बेचैनी बढ़ गई है।
ये भी हैं कमियां
-75 फीसदी बेड, जांच मशीन की कमी, जांच रिपोर्ट देने में देरी, हर आईसीयू में 15 बेड होने चाहिए, लेकिन कॉलेज में केवल 10 बेड। ब्लड बैंक का पंजीकरण मार्च 2022 में निरस्त हो चुका है फिर भी ब्लड बैंक चालू है। हाजिरी का रखरखाव नहीं है। चिकित्सा अधीक्षक में प्रशासनिक अनुभव और योग्यता नहीं, मेडिकल कॉलेज के डीन के पास पंजीकृत स्नातकोत्तर योग्यता भी नहीं हैं।