Aligarh Weather: तैयार रहिए कड़ाके की ठंड के लिए, जनवरी-फरवरी में आएगा ला नीना, बढ़ाएगा ठिठुरन
पिछली बार ला नीना का प्रभाव वर्ष 2021 में देखा गया था। मौजूदा अध्ययन यह संकेत दे रहा है कि इस वर्ष भी ला नीना का असर बढ़ेगा, जिससे आगामी महीनों में शीतलहर और ठिठुरन बढ़ सकती है।
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कड़ाके की ठंड के लिए तैयार रहिए। पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार सर्दी जल्द आई है और देर तक रहेगी। यह सब प्रत्येक चार से पांच वर्ष में एक बार आने वाले मौसम के पैटर्न ला नीना के प्रभाव के चलते है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जनवरी और फरवरी के महीनों में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है।
मौसम के इस पैटर्न का गहन अध्ययन करने में जुटे
ला नीना पैटर्न का अध्ययन कर रहे एएमयू के भूगोल विभाग के वैज्ञानिक प्रोफेसर अतीक अहमद ने बताया कि ला नीना की घटना प्रत्येक चार से पांच वर्ष में आती है। इसके तहत पृथ्वी के पूर्व से पश्चिम की तरफ हवाएं चलती हैं। समुद्र के पानी का ऑसिलेशन (दोलन) होता है। इस प्रक्रिया से एक कूलिंग इफेक्ट पैदा होता है, जिसके कारण मैदानी और उत्तरी क्षेत्रों में सर्दी अधिक होती है।
पिछली बार ला नीना का प्रभाव वर्ष 2021 में देखा गया था। मौजूदा अध्ययन यह संकेत दे रहा है कि इस वर्ष भी ला नीना का असर बढ़ेगा, जिससे आगामी महीनों में शीतलहर और ठिठुरन बढ़ सकती है। प्रोफेसर अतीक अहमद इस पैटर्न का अध्ययन करके सरकार और किसानों को समय पर परामर्श जारी करने में मदद करते हैं, ताकि नुकसान को कम करने के लिए एहतियाती उपाय किए जा सकें। मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर अहमद मुजतबा बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों से मौसम में लगातार बदलाव देखे जा रहे हैं। पिछले पांच साल की बात करें तो ठंड लगातार कम हुई है और इस वर्ष बढ़ रही है।
किसानों पर ला नीना के शीतकालीन प्रभाव
- ला नीना के कारण आने वाली कड़ाके की ठंड (जनवरी और फरवरी में) और पश्चिमी विक्षोभ की बढ़ी हुई गतिविधि रबी की फसलों को प्रभावित कर सकती है।
- पाला पड़ने से रबी की फसलें (जैसे गेहूं, सरसों, चना, मटर, और आलू) खराब हो सकती हैं या उनकी उत्पादकता में भारी कमी आ सकती है।-
- लंबी अवधि की शीतलहर से पौधों का विकास रुक सकता है। किसानों को अपनी फसलों को बचाने के लिए सिंचाई करने, धुआं करने या विशेष कवर का उपयोग करना पड़ सकता है।
- फसलों में फफूंदी और कीट रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है, जिससे फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
21 नवंबर के दिन पिछले पांच वर्षों में तापमान
| वर्ष | अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में) | न्यूनतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में) |
| 2025 | 26 | 12 |
| 2024 | 26 | 12 |
| 2023 | 26 | 15 |
| 2022 | 28 | 12 |
| 2021 | 27 | 14 |