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Aligarh News: दिल्ली से एएमयू पहुंचा कुचु-पुचु
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हाथों में तख्तियां... उन पर चुटीले नारे... और जुबां पर छात्रसंघ चुनाव की मांग। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में मंगलवार को आंदोलन का अंदाज बदला नजर आया। दिल्ली में चर्चित हुआ ‘कुचु-पुचु यूनियन दे दो ना’ नारा एएमयू की सड़कों पर भी गूंजा।
जेनजी के हाथों में ऐसी ही कई तख्तियां थीं, जिनमें किसी पर ‘वीसी जी यूनियन जल्दी लाओ, चाय ठंडी हो रही है’, तो किसी पर ‘एक कचौड़ी दो समोसा, इस वीसी का क्या भरोसा’ लिखा था।
डक पॉन्ड पर छात्राओं ने ‘नौ दिन हो गए, कुछ तो शर्म करो’ और ‘स्टूडेंट यूनियन का नारा है, जो हक है वो हमारा है’ जैसे नारे लिखी तख्तियां उठाईं। नारों और तख्तियों के इस अंदाज के बीच छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग लगातार मुखर रही।
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आंदोलनकारियों ने बाब-ए-सैयद मार्ग पर बाइक खड़ी कर रास्ता रोक दिया। परिसर में चुनाव की बहाली के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया और कक्षाओं का बहिष्कार किया।
नौवें दिन भी जारी रही भूख हड़ताल :
छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए लेकर डक पॉन्ड पर भूख हड़ताल कर रहे निलंबित छात्र यासिर फहद का आंदोलन मंगलवार को नौवें दिन भी जारी रहा। लगातार उपवास के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई। उन्हें पेट में दर्द की शिकायत हुई और वह भावुक भी नजर आए। आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब तक छात्रसंघ चुनाव की बहाली के संबंध में ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पूर्व अध्यक्ष ने भी जताया समर्थन
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डॉ. अब्दुल हफीज गांधी ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एएमयू एक्ट और लिंगदोह समिति की सिफारिशों में छात्रसंघ चुनाव की व्यवस्था का उल्लेख है। उनके अनुसार, पिछले आठ वर्षों से छात्रों को छात्रसंघ चुनाव से दूर रखा गया है।
उन्होंने कहा कि छात्रसंघ विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। चुनाव होने से छात्रों की समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने और प्रशासन व विद्यार्थियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने का अवसर मिलता है।
प्रॉक्टर की तस्वीर पर पोती कालिख
धरनास्थल पर लगे पोस्टर में प्रॉक्टर की तस्वीर पर छात्रों ने कालिख पोत दी। धरने पर बैठे विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रॉक्टर की ओर से दबाव बनाकर धरना खत्म कराने का प्रयास किया जा रहा है। छात्रों ने कहा कि वे अपनी मांग प्रशासन के सामने शांतिपूर्ण तरीके से रख रहे हैं।
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जेनजी के हाथों में ऐसी ही कई तख्तियां थीं, जिनमें किसी पर ‘वीसी जी यूनियन जल्दी लाओ, चाय ठंडी हो रही है’, तो किसी पर ‘एक कचौड़ी दो समोसा, इस वीसी का क्या भरोसा’ लिखा था।
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डक पॉन्ड पर छात्राओं ने ‘नौ दिन हो गए, कुछ तो शर्म करो’ और ‘स्टूडेंट यूनियन का नारा है, जो हक है वो हमारा है’ जैसे नारे लिखी तख्तियां उठाईं। नारों और तख्तियों के इस अंदाज के बीच छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग लगातार मुखर रही।
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आंदोलनकारियों ने बाब-ए-सैयद मार्ग पर बाइक खड़ी कर रास्ता रोक दिया। परिसर में चुनाव की बहाली के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया और कक्षाओं का बहिष्कार किया।
नौवें दिन भी जारी रही भूख हड़ताल :
छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए लेकर डक पॉन्ड पर भूख हड़ताल कर रहे निलंबित छात्र यासिर फहद का आंदोलन मंगलवार को नौवें दिन भी जारी रहा। लगातार उपवास के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई। उन्हें पेट में दर्द की शिकायत हुई और वह भावुक भी नजर आए। आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब तक छात्रसंघ चुनाव की बहाली के संबंध में ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पूर्व अध्यक्ष ने भी जताया समर्थन
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डॉ. अब्दुल हफीज गांधी ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एएमयू एक्ट और लिंगदोह समिति की सिफारिशों में छात्रसंघ चुनाव की व्यवस्था का उल्लेख है। उनके अनुसार, पिछले आठ वर्षों से छात्रों को छात्रसंघ चुनाव से दूर रखा गया है।
उन्होंने कहा कि छात्रसंघ विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। चुनाव होने से छात्रों की समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने और प्रशासन व विद्यार्थियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने का अवसर मिलता है।
प्रॉक्टर की तस्वीर पर पोती कालिख
धरनास्थल पर लगे पोस्टर में प्रॉक्टर की तस्वीर पर छात्रों ने कालिख पोत दी। धरने पर बैठे विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रॉक्टर की ओर से दबाव बनाकर धरना खत्म कराने का प्रयास किया जा रहा है। छात्रों ने कहा कि वे अपनी मांग प्रशासन के सामने शांतिपूर्ण तरीके से रख रहे हैं।