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बदन पर खाकी, हाथ में लाठी, फिर भी परेशान-लाचार

Wed, 20 Jul 2022 01:54 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jul 2022 01:54 AM IST
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Khaki on body, stick in hand, still troubled-helpless
क्वार्सी चौराहे पर रेड लाइट के नीचे राहगीरों को रोककर यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाते हो - फोटो : CITY OFFICE
अभिषेक शर्मा
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सिर्फ एक लाठी के सहारे पुलिस के लिए जान लड़ाए रहने वाले होमगार्डों का हाल दिहाड़ी मजदूरों की तरह है। एक दिन भी छुट्टी ली तो तनख्वाह कट जाती है। लाठी वाले इस बेचारे शख्स कोई प्राविडेंट फंड नहीं इसे लेकर उनके स्तर से समय-समय पर साप्ताहिक या वैकल्पिक अवकाश की आवाज उठाई जाती है। मगर यह आवाज नक्कारखाने में तूती की मानिंद दबकर रह जाती है।
अलीगढ़ पर लगा है होमगार्ड वेतन घोटाले का कलंक
होमगार्ड वेतन घोटाले के कलंक से अपना अलीगढ़ अछूता नहीं रहा है। वर्ष 2019 में नोएडा और लखनऊ में इस घोटाले की जांच जब शुरू हुई तो यहां के तत्कालीन मंडलीय डिवीजनल कमांडेंट आरके चौरसिया निलंबित किए गए। उस दौरान यहां के होमगार्डों की ड्यूटी मस्टरोल की जांच में उजागर हुआ कि ड्यूटी के लिए मस्टरोल की एक ही कॉपी बनती थी, जिसकी मूल प्रति जिला कमांडेंट के यहां जमा हो जाती थी। उसका कोई अन्य रिकार्ड ही नहीं होता था और न ही कहीं उपस्थिति दर्ज होती थी। ड्यूटी करने वाले होमगार्डों की थानों की जीडी में ड्यूटी के पहले दिन एंट्री दर्ज होती थी, उसके बाद कब तक ड्यूटी की और कहां-कहां ड्यूटी की इसका कोई रिकार्ड नहीं होता था। इतना ही नहीं मस्ट रोल पर ड्यूटी लेने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारी का न तो स्पष्ट नाम होता था और न ही स्पष्ट हस्ताक्षर। इसकी एवज में होमगार्ड के वेतन का घोटाला किया जाता था। इसके अलावा मनचाही ड्यूटी के नाम पर धन अलग से वसूला जाता था।
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तब से बदली गई प्रदेश भर में व्यवस्था
इसके बाद से प्रदेश भर में यह व्यवस्था बदली गई है। अब प्रदेश स्तर पर योजना भवन से होमगार्डों की ड्यूटी लगाई जाती है। जिस विभाग को अपने यहां जरूरत होती है, वे होमगार्ड की डिमांड संबंधित विभाग के मुखिया से भिजवाते हैं। योजना भवन से उस डिमांड के अनुसार संबंधित जिले के होमगार्डों को उनके मोबाइल पर मैसेज के जरिये ड्यूटी बताते हैं। जरूरत के अनुसार जब जहां होमगार्डों की ड्यूटी बदल दी जाती है। तीन दिन पहले किसी भी होमगार्ड को अपनी ड्यूटी बदलने की सूचना मिल जाती है। बस ट्रैफिक और डायल-112 पर चूंकि प्रशिक्षित होमगार्ड होते हैं, इसलिए उनकी ड्यूटी नहीं बदलती। बस स्थान बदल जाते हैं।
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महानगर में 200 होमगार्डों की लाठी पर टिका यातायात
अपने जिले में 1400 में से सर्वाधिक 200 होमगार्ड शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में ड्यूटी दे रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद उन्हें चौराहों पर लगाया गया है। मगर वे चौराहों पर ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनों को डंडा दिखाते रह जाते हैं और कोई उनकी न सुनता और न मानता है। उस चौराहे पर लगा रहने वाले एक या दो ट्रैफिक सिपाही मोबाइल से फोटो खींचकर चालान करने में लगे रहते हैं। शहर के 19 चौराहों पर होमगार्ड इस समय ड्यूटी दे रहे हैं।

-होमगार्डों के वेतन और ड्यूटी लगने के मामले में बड़े बदलाव हुए हैं। जिला स्तर से अब इसका कोई वास्ता नहीं है। हां, हम उनकी हाजिरी लगाने, अनुशासन देखने आदि पर काम करते हैं। बाकी उन्हें कब कहां ड्यूटी देनी है, ये सब लखनऊ स्तर से होता है। बाकी उनकी निजी समस्याओं, यहां होमगार्ड की कमी आदि को लेकर लगातार पत्राचार किए जाते रहते हैं। वर्तमान में उनकी वीकली अवकाश व पीएफ की मांग उठ रही है। साथ में होमगार्ड की कमी होने के कारण काम का बोझ भी अधिक है।-श्याम जीत शाही, कमांडेंट होमगार्ड
ये है स्थिति
-2100 होमगार्ड की जिले में जरूरत
-1400 होमगार्ड अभी जिले में तैनात
-21 कंपनी कुल, एक महिला कंपनी
-786 रुपये प्रतिदिन मिलता है वेतन
-3000 रुपये प्रति 3 वर्ष में वर्दी भत्ता
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