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UP: प्रदेश के इकलौते वाल्मीकि विधायक सुरेंद्र दिलेर बने मंत्री, भाजपा ने एक तीर से साधे कई निशाने

Mon, 11 May 2026 10:19 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 11 May 2026 10:19 AM IST
सार

अब तक यही माना गया कि पहली बार विधायक होने व युवा होने के नाते उन्हें मंत्री मंडल में शामिल नहीं किया जाएगा, मगर भाजपा संगठन व सरकार ने मंत्री मंडल विस्तार में इस चर्चा पर रविवार को विराम लगा दिया। जाटलैंड के इसी युवा व पहली बार के विधायक सुरेंद्र दिलेर को मंत्री मंडल में शामिल कर लिया गया।

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Khair MLA Surendra Diler became a minister
राज्य मंत्री बनने के बाद लखनऊ में मां रजनी दिलेर के साथ सुरेंद्र दिलेर - फोटो : स्वयं

विस्तार

अलीगढ़-हाथरस की सियासत में दिलेर परिवार किसी पहचान का मोहताज नहीं। जनसंघ के जमाने से संघ-भाजपा में सक्रिय स्व. किशनलाल दिलेर की तीसरी पीढ़ी के युवा सुरेंद्र दिलेर सियासी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। जिन्हें रविवार को प्रदेश मंत्री मंडल में शामिल किया गया है। परिवार की पार्टी के प्रति निष्ठा और प्रदेश के इकलौते वाल्मीकि विधायक होने के नाते खैर से विधायक सुरेंद्र दिलेर को यह जिम्मा दिया गया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा संगठन और सरकार ने दिलेर की ताजपोशी कर एक तीर से कई निशाने साधे हैं।

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जिले की खैर सीट बेशक एससी आरक्षित है, मगर पश्चिमी यूपी के जाटलैंड का हिस्सा है। किसान आंदोलन के बाद 2022 में जब भाजपा प्रदेश में दूसरी बार निर्वाचित हुई तो खैर से दूसरी बार निर्वाचित हुए विधायक अनूप प्रधान प्रदेश के इकलौते वाल्मीकि विधायक थे। जाटलैंड के जाटों को खुश करने और प्रदेश के इकलौते वाल्मीकि विधायक होने के नाते अनूप को राज्य मंत्री बनाया गया था। इसके बाद 2024 में जब अनूप हाथरस से सांसद निर्वाचित हुए तो मंत्री मंडल से त्यागपत्र दे दिया। उनके स्थान पर उपचुनाव में वाल्मीकि समाज से ही सुरेंद्र दिलेर खैर से भाजपा के विधायक निर्वाचित हुए। 
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मगर अब तक यही माना गया कि पहली बार विधायक होने व युवा होने के नाते उन्हें मंत्री मंडल में शामिल नहीं किया जाएगा, मगर भाजपा संगठन व सरकार ने मंत्री मंडल विस्तार में इस चर्चा पर रविवार को विराम लगा दिया। जाटलैंड के इसी युवा व पहली बार के विधायक सुरेंद्र दिलेर को मंत्री मंडल में शामिल कर लिया गया। इससे एक तरफ जहां प्रदेश भर के वाल्मीकि समाज में बेहद खुशी है। वहीं खैर के जाट वोटर भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं और खुलकर कह रहे हैं कि हमारे विधायक को मंत्री बनाया गया है।

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पार्टी में हमने व हमारे परिवार ने हमेशा सेवक बनकर काम किया है। आगे भी करते रहेंगे। अब जो जिम्मेदारी दी है, उसका श्रेय पार्टी-परिवार, पीएम नरेंद्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ को जाता है। इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाऊंगा। जैसे अब तक सेवक बनकर काम करते रहें हैं। उसी अनुसार आगे करते रहेंगे।- सुरेंद्र दिलेर, राज्यमंत्री

Khair MLA Surendra Diler became a minister
सुरेंद्र दिलेर के मंत्री बनने पर खैर में मिठाई बांटते पदाधिकारी - फोटो : स्वयं

दिलेर परिवार की योगी से करीबी भी बड़ी वजह
स्व. किशनलाल दिलेर के सियासी रणनीतिकार रहे योगेश शर्मा बताते हैं कि इस परिवार के साथ दो बातें सबसे ज्यादा चर्चित हैं। एक तो यह कि जनसंघ के जमाने से यह परिवार संघ व भाजपा से जुड़ा है। भले ही परिवार को पार्टी में कभी स्थान मिले या न मिले, मगर पार्टी से कभी दूरी नहीं बनाई। पार्टी के प्रति हमेशा निष्ठावान रहा। दूसरा यह कि परिवार बेहद शिष्ट व सभ्य विचारधारा वाला रहा है। कभी इस परिवार की ओर से ऐसी सियासत नहीं की गई जो किसी कमी या परेशानी का कारण बने। 

इसके अलावा जब स्व. किशनलाल दिलेर सांसद थे और वे दिल्ली में जिस आवास में रहते थे। मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस समय गोरखपुर सांसद होने के कारण उनके पड़ोसी थे और दोनों में अच्छे रिश्ते थे। उन रिश्तों को स्व. किशनलाल दिलेर के बाद उनके पुत्र राजवीर सिंह ने निभाया और अब पौत्र सुरेंद्र दिलेर निभा रहे हैं। जब खैर उपचुनाव में टिकट देने की बात आई तो खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिलेर परिवार में टिकट देने की वकालत की थी। उसी का परिणाम रहा कि खुद मुख्यमंत्री ने खैर में कई सभाएं कीं और सुरेंद्र दिलेर चुनाव जीते।

कड़े मुकाबले में रही 38 हजार की जीत
खैर सीट पर एक तरफ भाजपा से वाल्मीकि समाज से सुरेंद्र दिलेर मैदान में थे, जबकि उनके सामने सपा ने जाट परिवार की अनुसूचित जाति की बहू चारू केन को उतारा था। इसके चलते जाटलैंड में मुकाबला बेहद कड़ा हुआ था। जिले के कई दिग्गज नेताओं को खुद मुख्यमंत्री ने यह जिम्मेदारी दी थी कि वे ऐसे चुनाव लड़ाएंगे, जैसे खुद लड़ रहे हों। हर हाल में खैर सीट वापस जीतनी है और परिणाम वही आया। सुरेंद्र 38 हजार से जीते थे।

पीडीए की काट करने की तैयारी में भाजपा
सुरेंद्र दिलेर को मंत्री मंडल में स्थान देकर पश्चिमी यूपी के वाल्मीकि समाज के साथ-साथ अनुसूचित वर्ग में भी काम करने का जिम्मा दिया जाएगा। आने वाले 2027 के चुनाव में सुरेंद्र दिलेर पर अपनी सीट के साथ-साथ पश्चिमी यूपी की अन्य सीटों पर भी पार्टी संगठन के लिए काम करने की बड़ी जिम्मेदारी आएगी।

दादा किशनलाल दिलेर का सियासी सफर

  • 1967 से 93 तक जिले की एससी आरक्षित कोल सीट से जनसंघ व भाजपा से पांच बार विधायक
  • 1996 से 2004 तक अनुसूचित आरक्षित हाथरस लोकसभा सीट पर चार बार सांसद निर्वाचित हुए
  • जनसंघ व भाजपा में जिला उपाध्यक्ष से प्रदेश उपाध्यक्ष व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य तक चुने गए
  • 2008 में सांसद रहते उनका देहांत हुआ, उनके बाद उनके पुत्र राजवीर दिलेर ने विरासत संभाली थी


पिता राजवीर दिलेर का सियासी सफर 

  • 2000-05 तक जवां ब्लाक से जिला पंचायत सदस्य रहे। पिता के देहांत के बाद हाथरस में सक्रिय
  • 2017 में भाजपा से इगलास आरक्षित सीट पर जनपद में सर्वाधिक मतों से विधायक निर्वाचित हुए
  • 2019 में भाजपा से पिता की विरासत वाली सीट हाथरस पर रिकार्ड मतों से सांसद भी निर्वाचित हुए
  • 2024 में चुनाव से ऐन पहले हृदयाघात से उनका देहांत हुआ। इसके बाद बेटे सुरेंद्र ने विरासत संभाली
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