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जेलमें जन्मे कान्हा को नहीं मिली नंद के घर शरण

Fri, 23 Aug 2019 10:06 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Aug 2019 10:06 PM IST
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kanha born in jail
जिला कारागार में जन्मा बच्चा - फोटो : CITY OFFICE
मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण जिला कारागार में निरुद्ध महिला बंदी के नवजात बेटे को पालने के लिए आगरा के राजकीय शिशु गृह में भेजा गया था। इस शिशु गृह ने उसे अपने यहां शरण देने से मना कर दिया। वहां के अधिकारियों का कहना है कि बालक अनाथ नहीं है, उसकी मां जिंदा है। इस कारण बालक को यहां नहीं रखा जा सकता। बिहार की मूल निवासी बच्चे की मां पर अपहरण का आरोप है।
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दूसरी ओर सात दिन के इस नवजात की मां को भी बनारस के मानसिक आरोग्यशाला में भेजने की तैयारी हो रही थी, लेकिन बच्चे के वापस लौट आने के चलते इस प्रक्रिया को भी रोक दिया गया है। इससे पहले जेल प्रशासन ने आगरा और बनारस स्थित दोनों संस्थानों के प्रमुखों को शुक्रवार को पत्र लिखा था। कृष्ण जन्माष्टमी पर हुए इस घटनाक्रम को लेकर जेल प्रशासन के साथ साथ अन्य बंदियों में भी चर्चा है। मूल रूप से बिहार के नालंदा के थाना थरधारी के कस्बा अस्ता खज्जमा के रहने वाले रवि रंजन की पत्नी पुष्पलता को सासनी गेट थाने में दर्ज अपहरण के मुकदमे में जिला कारागार में 28 जुलाई को निरुद्ध किया गया था।
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16 अगस्त को महिला ने जिला अस्पताल में पुत्र को जन्म दिया। महिला की मानसिक स्थिति पहले से ही ठीक नहीं थी। प्रसव के बाद उसकी हालत और अधिक बिगड़ गई। वह बात-बात पर चीखने लगती है। कई साथी बंदियों-कैदियों को दांतों से काट भी खा चुकी है, जिसके चलते इस महिला को उपचार के लिए बनारस के मानसिक चिकित्सालय में जाना था। उसके बच्चे को आगरा की विष्णु कालोनी, शाहगंज में बने राजकीय शिशु गृह भेजा गया लेकिन वहां की अधीक्षिका ने नियमों के चलते बालक को अपने यहां पर रखने में असमर्थता व्यक्त कर दी। इसके बाद बच्चे को वापस अलीगढ़ ले आया गया।
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ऐसा यह पहला मामला आया है। इस संबंध में विधिक राय ली जाएगी। साथ ही अलीगढ़ की संस्थाओं से भी बालक के लालन पालन के संबंध में संपर्क किया जाएगा।
- आलोक सिंह, जेल अधीक्षक
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