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Aligarh: प्रजा पोल का एग्जिट पोल रहा 'एग्जेक्ट', अलीगढ़ में डीएम रहे के राम मोहन राव चला रहे यह सर्वे एजेंसी

Wed, 06 May 2026 10:29 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Wed, 06 May 2026 10:29 PM IST
सार

के राम मोहन राव अलीगढ़ में 21 अप्रैल 2008 से 15 अगस्त 2010 तक डीएम रहे। वह चयन की शुरुआत में यूपी के कई जिलों में एसडीएम रहे। मुरादाबाद, बाराबंकी, उन्नाव आदि जिलों के सीडीओ रहे। वह बरेली, झांसी, आगरा, मिर्जापुर में कमिश्नर भी रह चुके हैं।

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K. Rama Mohan Rao survey agency Praja Poll
डॉ. सुनील गुप्ता व के राम मोहन राव - फोटो : स्वयं

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर एजेंसी प्रजा पोल का एग्जिट पोल एग्जेक्ट रहा। प्रजा पोल ने टीएमसी को 85 से 110 सीटें और भाजपा को 178 से 208 सीटें मिलने का अनुमान जताया था। चुनाव परिणाम के अनुसार टीएमसी को 80 और भाजपा को 207 सीटें मिलीं। सर्वे एजेंसी प्रजा पोल का संचालन अलीगढ़ में डीएम रहे के राम मोहन राव व के विजय कर रहे हैं। 

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यूपी कैडर (1994) के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के राम मोहन राव अलीगढ़ में 21 अप्रैल 2008 से 15 अगस्त 2010 तक डीएम रहे। वह चयन की शुरुआत में यूपी के कई जिलों में एसडीएम रहे। मुरादाबाद, बाराबंकी, उन्नाव आदि जिलों के सीडीओ रहे। वह बरेली, झांसी, आगरा, मिर्जापुर में कमिश्नर भी रह चुके हैं।
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अलीगढ़ के मसूदाबाद स्थित आवास विकास कॉलोनी निवासी डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि के. राम मोहन राव अलीगढ़ सहित कई जिलों के डीएम रहे थे। रिटायर होने के बाद वह प्रजा पोल सर्वे एजेंसी चला रहे हैं। अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में के. राम मोहन राव ने बताया कि एजेंसी ने जो अनुमान जताया था, वह बिल्कुल सटीक बैठा। पश्चिम बंगाल को लेकर सर्वे टीम चुनाव से 4-5 महीने पहले ही काम में लग गई थी। एक-एक विधानसभा में जाकर वोटरों से बातचीत की। 
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प्रजा पोल का एग्जिट पोलउन्होंने बताया कि बंगाल में खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं होता था। गुपचुप तरीके से वहां के वोटरों से जानकारी जुटाई।  घरेलू महिला, प्रोफेशनल्स, स्टूडेंट्स (जो वोटर हैं), वर्कर आदि से राज्य के विकास, कानून व्यवस्था, रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर बातचीत की। जिसके आधार पर सीटों का अनुमान सार्वजनिक किया गया। के. राम मोहन राव ने बताया कि मेरे अनुभव के अनुसार 95 प्रतिशत वोटर एक साल पहले ही तय कर चुका होता है कि वोट किसको देना है। वोटिंग के समय 5 प्रतिशत ही लोग फैसला लेते हैं।

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