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बीमार पिता की मौत का सदमा झेल रहा जितेंद्र बना टॉपर
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Mon, 30 Apr 2018 02:09 AM IST
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जिले में चौथी रैंक प्राप्त करने के बाद मां से आशीर्वाद लेते जितेंद्र।
- फोटो : Amar Ujala
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छह महीने तक पढ़ाई छोड़कर बीमार पिता की सेवा में लगा रहा, इसके बावजूद अपनी लगन और विश्वास के दम पर मजदूर के बेटे जितेंद्र ने इलाहाबाद बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में चौथा स्थान हासिल कर सबको अपना मुरीद बना लिया। दुखद पहलू यह है कि बीती पांच अप्रैल को उसके पिता की मौत हो चुकी है। वे जितेंद्र को जिले में टॉप करते देखना चाहते थे।
तहसील क्षेत्र के गांव महगंवा निवासी रामबाबू सिंह मजदूरी करते थे। वह गांव के प्रधान भी रह चुके थे। उनका बेटा जितेंद्र अतरौली के पाली मार्ग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में इंटरमीडिएट में पढ़ता है। छह माह पूर्व रामबाबू की अचानक तबियत खराब हो गई। उनकी बीमारी के चलते घर की माली हालत भी बिगड़ती चली गई। सारी जमा पूंजी बीमारी में खर्च हो गई। रामबाबू अकेले कमाने वाले थे। पत्नी सावित्री देवी रामबाबू का जहां-तहां इलाज कराने जाती थीं तो कभी जितेंद्र, कभी दूसरे भाई को मां के साथ जाना पड़ता। एक भाई माता-पिता के साथ जाता तो दूसरा घर पर रहता था।
परीक्षा के समय रामबाबू की हालत और ज्यादा खराब हो गई। इसके बावजूद जितेंद्र ने पढ़ाई के लिए समय निकाला और तैयारी करता रहा। पिता की इच्छा थी कि उनका बेटा जिले का टॉपर बने। उसने दिवंगत पिता की इच्छा पूरी करने का पूरा प्रयास किया। महज दस अंक से जिला टॉपर से चूके जितेंद्र ने जिले में चौथा स्थान हासिल किया है। उसकी इस उपलब्धि पर मां समेत अन्य परिजनों के आंसू टपक पड़े। दृढ़ संकल्प के बल पर जितेंद्र ने पिता की अंतिम इच्छा पूरी की।
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तहसील क्षेत्र के गांव महगंवा निवासी रामबाबू सिंह मजदूरी करते थे। वह गांव के प्रधान भी रह चुके थे। उनका बेटा जितेंद्र अतरौली के पाली मार्ग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में इंटरमीडिएट में पढ़ता है। छह माह पूर्व रामबाबू की अचानक तबियत खराब हो गई। उनकी बीमारी के चलते घर की माली हालत भी बिगड़ती चली गई। सारी जमा पूंजी बीमारी में खर्च हो गई। रामबाबू अकेले कमाने वाले थे। पत्नी सावित्री देवी रामबाबू का जहां-तहां इलाज कराने जाती थीं तो कभी जितेंद्र, कभी दूसरे भाई को मां के साथ जाना पड़ता। एक भाई माता-पिता के साथ जाता तो दूसरा घर पर रहता था।
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परीक्षा के समय रामबाबू की हालत और ज्यादा खराब हो गई। इसके बावजूद जितेंद्र ने पढ़ाई के लिए समय निकाला और तैयारी करता रहा। पिता की इच्छा थी कि उनका बेटा जिले का टॉपर बने। उसने दिवंगत पिता की इच्छा पूरी करने का पूरा प्रयास किया। महज दस अंक से जिला टॉपर से चूके जितेंद्र ने जिले में चौथा स्थान हासिल किया है। उसकी इस उपलब्धि पर मां समेत अन्य परिजनों के आंसू टपक पड़े। दृढ़ संकल्प के बल पर जितेंद्र ने पिता की अंतिम इच्छा पूरी की।
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