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एएमयू में जूनियर डॉक्टर और मेडिकल कॉलेज प्रशासन में ठनी

Sun, 05 Aug 2018 01:57 AM IST
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Sun, 05 Aug 2018 01:57 AM IST
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Junior doctor and medical college in AMU settles in administration
अलीगढ़ युनिवर्सिटी - फोटो : ANI
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने सहित अन्य मांगों को लेकर धरने और भूख हड़ताल पर बैठे जूनियर डॉक्टरो के हड़ताल को कॉलेज प्रशासन ने अवैध करार दिया है, जबकि जूनियर डॉक्टरों ने अपने हड़ताल को जायज बताया है। विरोधाभाषी बयान को लेकर जूनियर डॉक्टर व मेडिकल कॉलेज प्रशासन की आपस में ठन गई है।
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कॉलेज प्रशासन ने रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन व इंटर्न द्वारा की जा रही हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया है। साथ ही धरने को तत्काल वापस लेने का आग्रह किया है। प्रशासन ने दो टूक कहा कि हड़ताल वापस न लेने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कॉलेज के प्रिंसिपल व सीएमएस प्रो. एससी शर्मा ने बताया कि हड़ताल के चलते प्रशासनिक कार्यों व कॉलेज लाइब्रेरी के इस्तेमाल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि प्रशासन हड़ताली डॉक्टरों की समस्याओं के हल के प्रति पूरी तरह से गंभीर है। उनकी समस्या के हल के लिए एक कमेटी का गठन किया  है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट जमा करेगी। प्रो. शर्मा ने आश्वस्त किया है कि एएमयू के वित्त अधिकारी इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। 
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13 दिन बाद याद आया धरना : अब्दुल्लाह
रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लाह आजमी ने कहा कि उनका धरना और भूख हड़ताल किसी कीमत पर अवैध नहीं है। धरना करने से पहले उन्होंने इसकी सूचना प्रशासन को दी थी। फिर, कैसे धरना और भूख हड़ताल अवैध हो गई। हमारी मांग सिर्फ सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू करवाने की नहीं है, हास्पिटल से जुड़ी समस्याएं भी हैं, जिनका निराकरण बहुत जरूरी है। अब तक धरना स्थल तक प्रिंसिपल नहीं आए हैं। कुलपति को इस संबंध में पत्र भी लिख चुके हैं, जिसमें इन मांगों का उल्लेख है।
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