सोल्डर फिल्म 'छपाक’ की सहायक अभिनेत्री तेजाब पीडि़ता जीतू मौत से जूझ रहे अपने कांस्टेबिल पिता को बचाने में जुटी प्वाइंटर जेएन मेडिकल कालेज ने कहा कि नया कैंसर मरीज नहीं लेंगे जेपी हास्प्टिल ने भर्ती करने से पहले मांगी कोरोना निगेटिव रिपोर्ट मैनपुरी में हेड कांस्टेबल हैं जीतू के पिता, आमद नहीं होने से मैनपुरी पुलिस ने नहीं दी चार महीने की तनख्वाह राजा तिवारी अलीगढ़। दिनों दिन बढ़ते संक्रमण से कोरोना की दहशत अस्पतालों में भी बढ़ती जा रही है। ताजा मामला फिल्म 'छपाक' में मशहूर वालीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के साथ काम कर चुकी तेजाब अटैक पीडि़ता जीतू शर्मा का है। जीतू शर्मा के ५५ वर्षीय कांस्टेबिल पिता सोमदत्त शर्मा को कैंसर हो गया है और कोरोना का टेस्ट कराए बगैर अस्पतालों ने इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उसके पिता का एक भारी दुख ये भी है कि बीमारी के कारण कागजों में आमद नहीं कराने पर मैनपुरी पुलिस ने उनको चार महीने से एक रुपये का वेतन नहीं दिया है। ये उस पुलिस का कारनामा है जिसकी सेवा में उन्होंने जिंदगी भर दिन रात एक कर दिया। अब मौत से जूझते अपने पिता को बचाने के लिए जीतू रियल लाइफ संघर्ष कर रही हैं। मूल रूप से डिबाई बुलंदशहर के रहने वाले जीतू के पिता सोमदत्त शर्मा लगभग १५ साल से बरौला जाफराबाद में रह रहे हैं। दिसंबर में उनकी तैनाती मैनपुरी पुलिस लाइन में हुई, जहां से उनको एक थाने में भेजा गया। मगर गले में भीषण दर्द होने के कारण वह ज्वाइन नहीं कर पाए। जांच कराई गई तो उनको गले में खाने की नली में थर्ड स्टेज का कैंसर बताया गया। यहीं से जीतू का संघर्ष शुरू हुआ। अब वह अपने पिता को लेकर अस्पताल दर अस्पताल चक्कर लगा रही हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा है। दिसंबर से तनख्वाह नहीं मिलने से परिवार में पैसे का भी संकट है। बेटी जीतू शीरोज हैंगआउट से जुड़े होने के कारण आगरा से लेकर लखनऊ तक छांव फाउंडेशन के अधिकारियों से मदद मांग रही है। छांव फाउंडेशन के आउट रीच अधिकारी दुर्गा प्रसाद शुक्ला ने बताया कि वह भी जीतू की मदद के लिए प्रयासरत हैं। उसके पिता की तनख्वाह दिलाने के लिए डीजीपी को पत्र लिख रहे हैं। जीतू ने बताया कि अभी तक उसके पिता का इलाज नोएडा के जेपी हास्पिटल में चल रहा था। लोन लेकर वहां इलाज करा रहे थे। तयशुदा तारीख पर दिखाने जाते और दवा लेकर लौट आते। अब कोरोना का संक्रमण बढऩे के बाद जेपी अस्पताल वाले कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट मांग रहे हैं। बुधवार को एएमयू के जेएन मेडिकल कालेज के कैंसर डिपार्टमेंट मे दिखाने गए तो वहां भी नहीं देखा गया। मेडिकल कालेज वालों ने कहा कि नया मरीज नहीं लेंगे। यहां जिस एंबुलेंस से पहुंचे थे, वह भी छोड़ गया तो चिलचिलाती धूप में पिता को रिक्शे पर लाद कर घर पहुंचे। पिता इस समय पानी भी नहीं पी पा रहे है, पानी मुंह से वापस निकल रहा है, क्योंकि कैंसर तीसरे स्टैज का है। खुद जीतू शर्मा तेजाब हमले की पीडि़ता हैं इसलिए वह भी ज्यादा दौड़ धूप करने पर निढ़ाल हो जाती है। उनके साथ घर में दो बहन, आठ साल का छोटा भाइ और मां है। ऐसे में सारा बोझ बेटियों पर ही पड़ा हुआ है। बेटियों ने अलग अलग कर्ज लेकर पिता के इलाज का बीड़ा उठाया है, लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।