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अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस : विधि के विधान ने पति छीना तो हालात से लड़कर सीखा जीना

Thu, 23 Jun 2022 01:12 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2022 01:12 AM IST
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International Widow Day
मधुर रोहतगी की मां अनुजा रोहतगी, साथ में बहन विशाखा रोहतगी। - फोटो : CITY OFFICE
आज (23 जून को) अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस है। हम चुनिंदा ऐसी महिलाओं के संघर्ष की गाथा आज आपके सामने ला रहे हैं, जिन्होंने कॉल के क्रूर हाथों अपने जीवन का शृंगार खोने के बावजूद अपने बच्चों के लिए स्वयं को मजबूत किया। अपने हौसलों से घर चलाकर परिवार के साथ समाज में ऐसा मुकाम हासिल किया जिस पर आज लोग उनकी जीवटता को सलाम कर रहे हैं।
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मीना कुमारी : राज्य महिला आयोग के जरिए कम करने में जुटीं महिलाओं का दर्द
कस्बा पिसावा निवासी मीना कुमारी को 2018 में राज्य महिला आयोग का सदस्य बनाया गया था। तब से वह प्रदेश में महिलाओं के दर्द की आवाज बनी हुई हैं। पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाकर उनके दर्द को कम करने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
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मीना कुमारी के पति चौ. धर्मवीर सिंह वकील होने के साथ कारोबारी थे। वर्ष 1995 में मीना कुमारी जिला पंचायत सदस्य चुनी गई। इसके करीब दस माह बाद ही उनके पति का एक हादसे में निधन हो गया। उस समय तीनों पुत्र पुष्पराज, विकास राज व मनीष राज क्रमश: 12, 9 व 6 वर्ष के थे। बेटों को अच्छी परवरिश और काबिल बनाने की जिम्मेदारी अब मीना कुमारी पर थी। वह स्वयं राजनीति में रहीं लेकिन बच्चों को शिक्षित बनाते हुए राजनीति से दूर ही रखा। स्वयं के दम पर वर्ष 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर उन्होंने चुनाव लड़ा, लेकिन बदकिस्मती से लॉटरी से हुए चुनाव में उन्हें मात खानी पड़ी। वर्ष 2007 में खैर विधानसभा क्षेत्र से भाग्य आजमाया लेकिन चुनाव हार गईं। वर्ष 2010 में उन्हें भाजपा जिलाध्यक्ष चुना गया। 2012 में उन्हें क्षेत्रीय उपाध्यक्ष चुना गया। मां के संर्घ से आज मीना कुमारी के बड़े पुत्र पुष्पराज लोनिवि में ठेकेदार हैं। विकास राज गुरुग्राम स्थित एक मल्टीनेशन कंपनी में निदेशक हैं। उनकी पत्नी डॉ. मनुराधा चौधरी जेएनयू में प्रोफेसर हैं। तीसरे नंबर के पुत्र मनीष राज नोएडा में सोयाबीन पनीर का प्लांट चलाते हैं।
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अनुजा रोहतगी : चुनौतियों के आगे बनीं चट्टान, बेटे ने बढ़ाया मान
कस्बा खैर के मोहल्ला बहादुरगंज निवासी अनुजा रोहतगी बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षामित्र हैं। बेटी विशाखा रोहतगी बीसीए की पढ़ाई कर रही है। पुत्र मधुर रोहतगी ने शनिवार को यूपी बोर्ड परीक्षा के आए परिणा में खैर इंटर कॉलेज खैर से हाईस्कूल की परीक्षा में अलीगढ़ मंडल में पहला स्थान लाकर अपनी मां का गौरव बढ़ाया है। बच्चों की पढ़ाई और उनकी लगन समेत परिवार चलाने के पीछे अनुजा रोहतगी का अपना संघर्ष है। पति जगदीश रोहतगी का वर्ष 2018 में बीमारी के चलते निधन हो गया था। पति के निधन के बाद बच्चों को बेहतर परवरिश और शिक्षा दिलाना किसी चुनौती से कम नहीं था, अनुजा ने हिम्मत नहीं हारी और चुनौतियों का चट्टान की तरह सामना किया। अनुजा कहती हैं कि बीमारी ने पति को उनसे छीन लिया। कुछ समय तक यही सोचती रहीं कि हार जाएंगी तो उनके बच्चों का क्या होगा? स्वयं को अकेला महसूस करने के साथ ही अपने आंसुआें को अपनी ताकत बना लिया। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में पुत्र के रिजल्ट ने थोड़ी हिम्मत बढ़ाई है, अब बच्चों को बेहतर भविष्य दे पाऊंगी।
उमलेश यादव : मजदूरी कर बच्चों को पाला, भाग्य ने साथ निभाया
हाथरस में ग्राम विकास अधिकारी के रूप में कार्यरत शहर के धनीपुर मंडी के पास वैष्णोंधाम कॉलोनी निवासी उमलेश यादव की कहानी भी संघर्ष की गाथा है। वर्ष 2012 में उनके पति मोरध्वज यादव असाध्य बीमारी से ग्रसित हो गए। उनका इलाज कराने में सारी जमा पूंजी खर्च हो गई, इसके बावजूद उमलेश यादव का सुहाग उजड़ गया। तब बड़ी बेटी तन्नू यादव (कक्षा 6) व पुत्र तरुण यादव (कक्षा 3) में पढ़ते थे। उनके समक्ष पुत्र व पुत्री के पालन-पोषण की चुनौती आ खड़ी हुई। बच्चों की स्कूल की फीस तक भर पाना मुश्किल होने लगा।

ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी उमलेश यादव ने हिम्मत नहीं हारी। मेहनत- मजदूरी कर बच्चों का पालन-पोषण और बेहतर शिक्षा दिलाने का काम जारी रखा। साथ ही सरकारी सेवा के लिए आवेदन किया। उनका चयन ग्राम विकास अधिकारी के रूप में हो गया। आज उनकी बेटी तन्नू जेएनयू से बीए ऑनर्स करने के साथ ही सिविल सर्विस की तैयारी के लिए कोचिंग कर रही है। पुत्र तरुण इंटरमीडिएट में पढ़ाई कर रहा है। अपनी खुशियां बच्चों के लिए समर्पित कर देने वाली उमलेश यादव आज खुशहाल जीवन बिता रहीं हैं। वह कहती हैं कि किसी तरह का कोई गिला-शिकवा नहीं हैं, सिवाय पति को गवां देने के दुख को छोड़कर।

उमलेश यादव बेटी तनु और बेटा तरुण के साथ।

उमलेश यादव बेटी तनु और बेटा तरुण के साथ।- फोटो : CITY OFFICE

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