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माध्यमिक विद्यालयों की खेल प्रतियोगिता में इगलास बना चैंपियन

Thu, 03 Nov 2022 01:24 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Nov 2022 01:24 AM IST
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Iglas became the champion in the sports competition of secondary schools
रामघाट रोड स्थित स्टेडियम में चल रही प्रतियोगिता के समापन में प्रथम पुरस्कार इगलास सिवदान सिंह ? - फोटो : CITY OFFICE
स्पोर्ट्स स्टेडियम मेें 65वें माध्यमिक विद्यालय जनपदीय युवा खेलकूद प्रतियोगिता में विकास खंड इगलास की टीम चैंपियन बन गई। विकास खंड खैर द्वितीय व कोल ब्लॉक की टीम तृतीय स्थान पर रही। बुधवार को प्रतियोगिता के समापन पर मुख्य अतिथि डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी शिक्षकों की है। अब अभिभावकों व बच्चों को खेल के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है।
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पहले की कहावत ‘खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब’ मौजूदा समय में अपना अस्तित्व खो चुकी है। अब विद्यार्थी खेलों में भी अपना सफल कॅरिअर बना सकते हैं। खेलकूद और पढ़ाई आपस में विरोधाभाषी नहीं है। दोनों में एकाग्रचित्त होने की आवश्यकता है। समापन समारोह में चिरंजीलाल बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने बैंड की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस मौके पर डीआईओएस सुभाष गौतम ने डीएम को कैप, बैज पहनाकर स्वागत किया।
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श्री उदय सिंह जैन इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना व रतन प्रेम डीएवी बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस मौके पर जिला क्रीड़ा सचिव डॉ. विपिन वार्ष्णेय, डॉ. आरपी सिंह, सत्यदेव नागर, डॉ. कौशलेंद्र यादव, जेपी यादव, डॉ. आरएन यादव, मनोरमा ठाकुर, डॉ. संजय सिंह, अंबुज जैन, इंदु सिंह, ईश्वर दास शर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन जीजीआईसी इंटर कॉलेज अतरौली की प्रवक्ता हर्षी गुप्ता ने किया।
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निजी विद्यालयों ने माध्यमिक विद्यालयों को छोड़ा पीछे : इंद्र विक्रम
डीएम ने कहा कि आज सरकारी माध्यमिक विद्यालय उतने ख्याति प्राप्त नहीं हैं, जितने होने चाहिए। निजी क्षेत्र के विद्यालयों ने अनुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति व उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता के चलते माध्यमिक विद्यालयों को कहीं पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि यूपी बोर्ड के बच्चे प्रतिस्पर्धा में बहुत पीछे हैं।

विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण नहीं है। इसकी जिम्मेदारी प्रधानाचार्यों व शिक्षकों को लेनी ही होगी। कहा कि सरकारी विद्यालयों के पास न योग्यता की कमी है, न संसाधनों की। हमारे हाथ में अभिभावकों ने अकूत क्षमता वाले बच्चे दिए हैं। शिक्षकों से कहा कि जिस प्रकार वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित रहते हैं, उसी प्रकार इन बच्चों का भविष्य भी संवार सकते हैं।
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